

कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 309 तक पहुंच गया है, जिससे यह देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया है। ओजोन के महीन कणों के कारण हवा में जहर घुला हुआ है, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 400 फीसदी अधिक प्रदूषण के कारण स्थिति चिंताजनक है।
दूसरी तरफ देश में दमोह की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 21 रिकॉर्ड किया गया।
राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो वहां कल सूचकांक 289 दर्ज किया गया था, जो आज नौ अंकों के सुधार के साथ घटकर 280 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता एक बार फिर खराब श्रेणी में बनी हुई है।
244 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 3.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 27.9 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 68.9 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।
विश्लेषण से पता चला है कि 08 जनवरी 2026 को देश में कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 309 रिकॉर्ड किया गया। कल चिक्कबल्लापुर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 170 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 139 अंकों का भारी इजाफा हुआ है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता ‘खराब’ से ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है।
रुझानों में सामने आया है कि चिक्कबल्लापुर की हवा में ओजोन के महीन कण पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
चिक्कबल्लापुर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 400 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में दमोह की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 21 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर में चिक्कबल्लापुर की तुलना दमोह से करें तो वहां स्थिति 14 गुणा खराब है।
कल देश में सिंगरौली की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 345 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 48 अंकों के सुधार के साथ वहां एक्यूआई घटकर 297 पर पहुंच गया है। मतलब की वायु गुणवत्ता बेहद खराब से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो वहां कल सूचकांक 289 दर्ज किया गया था, जो आज नौ अंकों के सुधार के साथ घटकर 280 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता एक बार फिर खराब श्रेणी में बनी हुई है। दिल्ली में वायु गुणवत्ता डब्ल्यूएचओ मानकों से 1,600 फीसदी अधिक प्रदूषित है।
गौरतलब है कि इससे पहले 14 नवंबर को दिल्ली में 2025 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 461 तक पहुंच गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 08 जनवरी 2026 को 244 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 3.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है।
वहीं 27.9 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 68.9 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।
बता दें कि कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस बनी हुई है। दूसरी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 21.4 अंकों का इजाफा हुआ है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में करीब 5.3 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 22.6 फीसदी की कमी आई है, जोकि राहत की खबर है। बेहद खराब हवा वाले शहरों की गिनती में भी कल से 50 फीसदी की गिरावट आई है।
फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 223 रिकॉर्ड किया गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में सिंगरौली (297) दूसरे जबकि गाजियाबाद (296) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 294 अंकों के साथ नोएडा चौथे स्थान पर है। ग्रेटर नोएडा-गुरुग्राम में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 290 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
दिल्ली (280) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गुम्मिडीपूंडी (279), बागपत (262) और चरखी दादरी (249) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के दो (गुरुग्राम, चरखी दादरी) और उत्तर प्रदेश के चार (गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, बागपत) शहर शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि सिंगरौली, गाजियाबाद, नोएडा, गुरुग्राम, दिल्ली, गुम्मिडीपूंडी, बागपत, चरखी दादरी, ग्वालियर, झालावाड़, तालचेर, आरा, कोलकाता, बल्लभगढ़, फरीदाबाद, जयपुर, नारनौल, तिरुपति, राजमहेंद्रवरम, मुजफ्फरनगर, पाली, हावड़ा, चित्तौड़गढ़, टोंक, पटना, बैरकपुर, कोटा, प्रतापगढ़, देहरादून, धारूहेड़ा, बहादुरगढ़, भिवानी, तुमकुरु, बेलापुर, भीलवाड़ा, चंडीगढ़, बिलीपाड़ा, चूरू, पुणे, बूंदी, कटक, डूंगरपुर, हापुड़, बालासोर, पानीपत, बद्दी, कुरुक्षेत्र, पीथमपुर, सीकर, करनाल, वाराणसी, सिवान, पंचकुला, राजसमंद, लखनऊ, वातवा, बर्नीहाट, प्रयागराज, आसनसोल, उल्हासनगर, नलबाड़ी, समस्तीपुर, यमुना नगर, हल्दिया आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं ग्रेटर नोएडा, मेरठ, भुवनेश्वर, बेगूसराय, भिवाड़ी, खुर्जा, अंकलेश्वर, गांधीनगर, मंडीदीप, पिंपरी-चिंचवाड़, कल्याण, रतलाम, गया, फतेहाबाद, ठाणे, मालेगांव, हाजीपुर, हिसार, झुंझुनू, आगरा, अलवर, मुंबई, अमरावती (आंध्रप्रदेश), दुर्गापुर, मंडी गोबिंदगढ़, विशाखापत्तनम, चंद्रपुर, बेंगलुरु, अजमेर, भागलपुर, छपरा, कानपुर, कैथल, तिरुवनंतपुरम, परभनी, महाड, मंगुराहा, नयागढ़, बारां, धुले, भरतपुर, बांसवाड़ा, नासिक, पलवल, राउरकेला, सवाई माधोपुर, अकोला, नागौर, श्री गंगानगर, पटियाला आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 3.3 फीसदी यानी महज आठ शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में चामराजनगर, दमोह, गंगटोक, कलबुर्गी, किशनगंज, मदिकेरी, श्रीनगर, विजयपुरा आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 68 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें कोयंबटूर, दौसा, दावनगेरे, धारवाड़, एलूर, फिरोजाबाद, गोरखपुर, हनुमानगढ़, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जालंधर, जलना, झांसी, कन्नूर, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, कोहिमा, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मदुरै, मिलुपारा, मोतिहारी, मैसूर, पंपोर, पंचगांव, पेरुंदुरई, पुडुकोट्टई, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, रामनगर, ऋषिकेश, रूपनगर, सागर, सलेम, सांगली आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 143 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, आसनसोल, बद्दी, बदलापुर, बहादुरगढ़, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बारीपाड़ा, बाड़मेर, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, बेतिया, भागलपुर, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बोइसर, बुलंदशहर, बूंदी, बक्सर, ब्यासनगर, बर्नीहाट, चंडीगढ़, चंद्रपुर, छपरा, चित्तौड़गढ़, चूरू, कुड्डालोर, कटक, देहरादून, देवास, धारूहेड़ा, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फतेहाबाद, गांधीनगर, गया, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हापुड़, हिसार, हावड़ा, जबलपुर, जैसलमेर, जलगांव, जालोर, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कानपुर, करौली, करनाल, करूर, कटनी, खुर्जा, कोल्हापुर, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, महाड, मालेगांव, मंडी बिंदगढ़, मंडीदीप, मंगुराहा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पलवल, पंचकुला, पानीपत, परभनी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, राजगीर, राजसमंद, रतलाम, राउरकेला, सहरसा, समस्तीपुर, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिरोही, सिवान, सोनीपत, श्री गंगानगर, सुआकाती, सूरत, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तिरुमाला, टोंक, तुमकुरु, उदयपुर, उल्हासनगर, वापी, वाराणसी, वातवा, विजयवाड़ा, विरार, विशाखापत्तनम, यमुना नगर शामिल हैं।
आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 24 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में आरा, बागपत, बल्लभगढ़, भुवनेश्वर, चरखी दादरी, दिल्ली, फरीदाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, ग्वालियर, जयपुर, झालावाड़, कोलकाता, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नारनौल, नोएडा, पाली, राजमहेंद्रवरम, सिंगरौली, तालचेर, तिरुपति शामिल हैं।
वहीं चिक्कबल्लापुर (309) में वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 244 में से महज आठ शहरों में हवा 'बेहतर' है। 68 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 07 जनवरी 2026 को भी यह आंकड़ा 56 दर्ज किया गया था।
143 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज चिक्कबल्लापुर (309) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां एक्यूआई 310 पर पहुंच गया। आंकड़ों के मुताबिक कल से वहां प्रदूषण में 139 अंकों का भारी इजाफा हुआ है। इसके साथ ही आज चिक्कबल्लापुर में वायु गुणवत्ता खराब से बेहद खराब हो गई है।
कल देश में सिंगरौली की हवा सबसे प्रदूषित थी, जब एक्यूआई बढ़कर 345 तक पहुंच गया था। आज 48 अंकों के सुधार के साथ सिंगरौली में वायु गुणवत्ता सूचकांक घटकर 297 पर पहुंच गया है।
गौरतलब है कि कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 289 दर्ज किया गया था। हालांकि आज नौ अंकों के सुधार के साथ वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक घटकर 280 पर पहुंच गया। मतलब कि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता खराब बनी हुई है। दिल्ली के उलट कल से फरीदाबाद में प्रदूषण के स्तर में इजाफा हुआ है। आज फरीदाबाद में सूचकांक 223 रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता ‘खराब’ श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 07 जनवरी को नोएडा चौथे स्थान पर है, वहीं सिंगरौली (297) दूसरे, जबकि गाजियाबाद (296) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 246, गाजियाबाद में 296, गुवाहाटी में 143, गुरूग्राम में 290, नोएडा में 294, ग्रेटर नोएडा में 290 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 126 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 160, चेन्नई में 83, चंडीगढ़ में 179, हैदराबाद में 90, जयपुर में 222 और पटना में 192 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन आठ शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें चामराजनगर, दमोह, गंगटोक, कलबुर्गी, किशनगंज, मदिकेरी, श्रीनगर, विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं अगरतला, अहमदनगर, आइजोल, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अररिया, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बागलकोट, बरेली, बठिंडा, बेलगाम, भिलाई, ब्रजराजनगर, चेन्नई, छाल, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, कोयंबटूर, दौसा, दावनगेरे, धारवाड़, एलूर, फिरोजाबाद, गोरखपुर, हनुमानगढ़, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जालंधर, जलना, झांसी, कन्नूर, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, कोहिमा, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मदुरै, मिलुपारा, मोतिहारी, मैसूर, पंपोर, पंचगांव, पेरुंदुरई, पुडुकोट्टई, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, रामनगर, ऋषिकेश, रूपनगर, सागर, सलेम, सांगली, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरसा, शिवसागर, सोलापुर, थूथुकुडी, तुमडीह, वृंदावन, यादगीर आदि 68 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:
सिंगरौली बना देश का सबसे प्रदूषित शहर, हवा डब्ल्यूएचओ मानकों से 21 गुणा ज्यादा जहरीली