प्रदूषण में पहले पायदान पर पहुंचा पानीपत, 293 एक्यूआई, सीकर सहित 11 शहरों में स्थिति खराब

08 जून 2026 को 238 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में सीकर (290) दूसरे जबकि मुजफ्फरनगर (283) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह जींद (264) चौथे स्थान पर है
फोटो: सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट
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सारांश
  • देश में वायु प्रदूषण का संकट एक बार फिर गहराता दिख रहा है। 08 जून 2026 को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के 238 शहरों के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला कि हरियाणा का पानीपत देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 293 दर्ज किया गया।

  • चिंताजनक बात यह है कि महज 24 घंटों में यहां प्रदूषण 101 अंक बढ़ा है। पानीपत की हवा में पीएम10 कणों का दबदबा है और प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 550 फीसदी अधिक पहुंच चुका है।

  • सीकर (290) और मुजफ्फरनगर (283) क्रमशः दूसरे और तीसरे सबसे प्रदूषित शहर रहे, जबकि देश के 11 शहर ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज किए गए।

  • हालांकि तस्वीर पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। 38 शहरों में हवा ‘बेहतर’ और 118 शहरों में ‘संतोषजनक’ रही।

  • कर्नाटक का मदिकेरी सबसे साफ शहर रहा, जहां एक्यूआई महज 20 दर्ज किया गया।

  • इसके बावजूद आंकड़े संकेत देते हैं कि प्रदूषण का दबाव फिर बढ़ रहा है। खराब हवा वाले शहरों की संख्या में एक दिन में 120 फीसदी की वृद्धि हुई है, जबकि संतोषजनक श्रेणी वाले शहरों की संख्या घटी है। यह बदलाव बताता है कि मौसम और स्थानीय उत्सर्जन के कारण देश के कई हिस्सों में वायु गुणवत्ता तेजी से बिगड़ रही है और सतर्कता की आवश्यकता बढ़ गई है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 08 जून 2026 को देश में पानीपत सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 293 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल पानीपत में सूचकांक 192 दर्ज किया गया था। मतलब कि वहां कल से प्रदूषण में 101 अंकों का भारी उछाल आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि पानीपत की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

पानीपत में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 550 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 20 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर पानीपत की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 14.6 गुणा खराब है।

बता दें कि कल धनबाद में स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 291 तक पहुंच गया। आज 63 अंकों के भारी सुधार के साथ धनबाद में सूचकांक 228 पर पहुंच गया है। मतलब की सुधार के बावजूद वायु गुणवत्ता आज भी खराब बनी हुई है। 

राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 144 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 151 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 7 अंकों का इजाफा दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।  

इससे पहले 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 30 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 85 पर पहुंच गया। वहीं 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को एक्यूआई 93 रिकॉर्ड किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 112 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 118 पर पहुंच गया। मतलब कि फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 08 जून 2026 को 238 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 15.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 49.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 34.5 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 2.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 12.6 फीसदी की कमी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से 22.4 फीसदी का उछाल आया है। इसी तरह खराब हवा वाले शहरों के आंकड़ों को देखें तो उसमें 120 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि चिंता का विषय है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में सीकर (290) दूसरे जबकि मुजफ्फरनगर (283) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह जींद (264) चौथे स्थान पर है। करनाल (247) – मेरठ (246) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

धनबाद (228) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में कुरुक्षेत्र (222), बागपत (218) और रूपनगर (213) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार शहर (पानीपत, जींद, करनाल और कुरुक्षेत्र) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि जींद, करनाल, मेरठ, कुरुक्षेत्र, पंचगांव, गुरुग्राम, गाजियाबाद, बहादुरगढ़, भिवानी, अंबाला, बर्नीहाट (मेघालय), महाद, बर्नीहाट (असम), चरखी दादरी, मानेसर, काशीपुर, लखनऊ, फरीदाबाद, तालचेर, भिवाड़ी, धारूहेड़ा, वाराणसी, मुजफ्फरपुर, गया, सहरसा, सिवान आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं पानीपत, सीकर, मुजफ्फरनगर, धनबाद, बागपत, रूपनगर, सिंगरौली, बुलंदशहर, बल्लभगढ़, ग्रेटर नोएडा, सोनीपत, यमुना नगर, दिल्ली, चूरू, झुंझुनू, पटियाला, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, कैथल, कटनी, विशाखापत्तनम, बांसवाड़ा, पीथमपुर, वातवा, उदयपुर, मुरादाबाद, अगरतला, फतेहाबाद, छपरा, अमृतसर, धुले, आगरा, बाड़मेर, देहरादून, खन्ना, मंडीदीप, पटना, रतलाम, खुर्जा, कुंजेमुरा, रोहतक, बीकानेर, प्रतापगढ़ आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 15.9 फीसदी यानी 38 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कोयंबटूर, धौलपुर, गडग, गंगटोक, हुबली, जलना, कोहिमा, कोरबा, मदिकेरी, मैंगलोर, मीरा-भायंदर, मुंगेर, मैसूरु, नलबाड़ी, नांदेड़, पंपोर, परभणी, पुडुचेरी, रामनगर, समस्तीपुर, शिलांग, शिवमोगा, सिलचर, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, तिरुमाला, उल्हासनगर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 118 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोईसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, छाल, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कुड्डालोर, दमोह, दौसा, धारवाड़, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जालौर, झांसी, जोधपुर, जोरापोखर, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटिहार, क्योंझर, किशनगंज, कोलकाता, कोटा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मेहसाणा, मुंबई, नागांव, नागौर, नागपुर, नंदेसरी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, पाली, पलवल, पंचकुला, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज आदि शहर शामिल हैं।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 238 में से 38 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 118 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 07 जून को यह आंकड़ा 135 दर्ज किया गया था।

71 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज पानीपत में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 293 दर्ज किया गया। हालांकि कल वहां एक्यूआई 192 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में पानीपत में प्रदूषण के स्तर में 101 अंकों का भारी उछाल आया है।

इससे पहले कल धनबाद में स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 291 तक पहुंच गया। आज 63 अंकों के भारी सुधार के साथ धनबाद में सूचकांक 228 पर पहुंच गया है। मतलब की सुधार के बावजूद वायु गुणवत्ता आज भी खराब बनी हुई है।         

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 144 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 151 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 7 अंकों का इजाफा दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।    

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 112 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 118 पर पहुंच गया। मतलब कि फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 08 जून को जींद (264) चौथे स्थान पर है, वहीं सीकर (290) दूसरे, जबकि मुजफ्फरनगर (283) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 111, गाजियाबाद में 170, गुवाहाटी में 56, गुरूग्राम में 178, नोएडा में 134, ग्रेटर नोएडा में 178 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 69 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 120, चेन्नई में 55, चंडीगढ़ में 84, हैदराबाद में 64, जयपुर में 88 और पटना में 103 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 38 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, अंबरनाथ, बैरकपुर, बेंगलुरु, बेतिया, भिलाई, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, धौलपुर, गडग, गंगटोक, हुबली, जलना, कोहिमा, कोरबा, मदिकेरी, मैंगलोर, मीरा-भायंदर, मुंगेर, मैसूरु, नलबाड़ी, नांदेड़, पंपोर, परभणी, पुडुचेरी, रामनगर, समस्तीपुर, शिलांग, शिवमोगा, सिलचर, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, तिरुमाला, उल्हासनगर, विजयपुरा शामिल हैं।

वहीं अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बारां, बारबिल, बरेली, बारीपदा, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोईसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, छाल, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कुड्डालोर, दमोह, दौसा, धारवाड़, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जालौर, झांसी, जोधपुर, जोरापोखर, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटिहार, क्योंझर, किशनगंज, कोलकाता, कोटा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मेहसाणा, मुंबई, नागांव, नागौर, नागपुर, नंदेसरी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, पाली, पलवल, पंचकुला, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुणे, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, राउरकेला, सागर, सतना, सवाई माधोपुर, सिरोही, सिरसा, शिवसागर, सोलापुर, श्री गंगानगर, सुआकाती, सूरत, टेन्सा, ठाणे, त्रिशूर, टोंक, उज्जैन, वडोदरा, विजयवाड़ा, वृंदावन आदि 118 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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