239 शहरों में महज 14 की हवा साफ, बल्लभगढ़ फिर बना प्रदूषण का केंद्र

दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 26 रिकॉर्ड किया गया
भारत में बढ़ते प्रदूषण का जहर अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है; फोटो: आईस्टॉक
भारत में बढ़ते प्रदूषण का जहर अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है; फोटो: आईस्टॉक
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सारांश
  • बल्लभगढ़ में वायु प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 302 दर्ज किया गया। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 500 फीसदी अधिक है।

  • देश के 239 शहरों में से केवल 14 शहरों की हवा साफ है, जबकि 51 फीसदी शहरों में स्थिति गंभीर है। दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 26 रिकॉर्ड किया गया।

  • 05 फरवरी 2026 को 239 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 5.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 43.1 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 51 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।

  • राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता बेहद खराब से खराब श्रेणी में पहुंच गई। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 339 दर्ज किया गया था, जो 05 फरवरी को 98 अंकों के सुधार के साथ 241 पर पहुंच गया।

  • फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 162 (-38) रिकॉर्ड किया गया है।  

  • आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में गुरुग्राम (293) दूसरे जबकि धारूहेड़ा (290) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 279 अंकों के साथ चरखी दादरी चौथे स्थान पर है।

  • कटक-गाजियाबाद में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 279 और 266 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

विश्लेषण से पता चला है कि 05 फरवरी 2026 को एक बार फिर देश में बल्लभगढ़ की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 302 दर्ज किया गया। मतलब कि वायु गुणवत्ता बेहद खराब है। हालांकि कल से वहां प्रदूषण में गिरावट आई है। इससे पहले 04 फरवरी को बल्लभगढ़ में वायु गुणवत्ता सूचकांक 370 तक पहुंच गया था।

रुझानों में सामने आया है कि बल्लभगढ़ की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

बल्लभगढ़ में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 500 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 26 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर बल्लभगढ़ की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 11 गुणा खराब है।

राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता बेहद खराब से खराब श्रेणी में पहुंच गई। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 339 दर्ज किया गया था, जो 05 फरवरी को 98 अंकों के सुधार के साथ 241 पर पहुंच गया। इससे पहले 18 जनवरी को दिल्ली में 2026 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया।         

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 05 फरवरी 2026 को 239 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 5.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है।

वहीं 43.1 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 51 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।

बता दें कि कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 27.3 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 12 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरफ मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में करीब 9.2 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से 71.4 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसके विपरीत बेहद खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 91.7 फीसदी की गिरावट आई है, जोकि राहत की खबर है।

फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 162 (-38) रिकॉर्ड किया गया है।  

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में गुरुग्राम (293) दूसरे जबकि धारूहेड़ा (290) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 279 अंकों के साथ चरखी दादरी चौथे स्थान पर है। कटक-गाजियाबाद में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 279 और 266 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

गुवाहाटी (248) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में दिल्ली (241), नोएडा  (237) और भिवाड़ी (228) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के दो (गाजियाबाद, नोएडा) और हरियाणा के चार शहर (बल्लभगढ़, गुरुग्राम, धारूहेड़ा, चरखी दादरी) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि गुरुग्राम, धारूहेड़ा, चरखी दादरी, गाजियाबाद, गुवाहाटी, दिल्ली, नोएडा, भिवाड़ी, ग्रेटर नोएडा, पीथमपुर, मंडी गोबिंदगढ़, मेरठ, नारनौल, रूपनगर, बहादुरगढ़, बागपत, नागपुर, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, मानेसर, पुणे, टोंक, नाहरलागुन, ग्वालियर, मुजफ्फरनगर, विशाखापत्तनम, कुरुक्षेत्र, तुमकुरु, सीकर, कोलकाता, फरीदाबाद, नागांव, राजमहेंद्रवरम, जींद, हावड़ा, जयपुर, अंगुल, परभनी, आगरा, भुवनेश्वर, उल्हासनगर, सिरसा, हल्दिया, बर्नीहाट, पिंपरी-चिंचवाड़, नवी मुंबई, कोटा, वडोदरा, हाजीपुर, चित्तौड़गढ़, नांदेड़, सूरत, कल्याण, वातवा, बालासोर, धौलपुर, एलूर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं बल्लभगढ़, अमरावती (आंध्रप्रदेश), तालचेर, बद्दी, बीकानेर, झुंझुनू, बेलापुर, हनुमानगढ़, खुर्जा, भिवंडी, बारबिल, मीरा-भायंदर, चंद्रपुर, कुंजेमुरा, विरार, बदलापुर, चूरू, महाड, अलवर, मालेगांव, कोरबा, बोइसर, जलगांव, सिलीगुड़ी, अहमदनगर, नागौर, ब्रजराजनगर, भरतपुर, अंकलेश्वर, राजकोट, मंगुराहा, अकोला, लुधियाना, अजमेर, धारवाड़ आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 5.9 फीसदी यानी महज 14 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में गरतला, बागलकोट, किशनगंज, मदिकेरी, नागपट्टिनम, पंपोर, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, पुदुकोट्टई, समस्तीपुर आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 103 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, छपरा, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, कोयंबटूर, दौसा, धनबाद, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गंगटोक, गया, गोरखपुर, हिसार, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालोर, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कन्नूर, करौली, कटिहार, कटनी, खन्ना, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, लातूर, लखनऊ, मंडीखेड़ा, मिलुपारा, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नासिक, पाली, पलवल, पंचकुला, पानीपत, पटियाला, पटना, प्रतापगढ़, प्रयागराज आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 109 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंगुल, अंकलेश्वर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बागपत, बहादुरगढ़, बालासोर, बारबिल, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बेलापुर, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, ब्यासनगर, बर्नीहाट, चंद्रपुर, चित्तौड़गढ़, चूरू, देहरादून, देवास, धारवाड़, धौलपुर, एलूर, फरीदाबाद, गुम्मिडीपूंडी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हावड़ा, जयपुर, जलगांव, जलना, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जींद, कल्याण, कानपुर, करनाल, खुर्जा, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लुधियाना, महाड, मालेगांव, मंडीदीप, मानेसर, मंगुराहा, मेरठ, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरनगर, नागांव, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नारनौल, नवी मुंबई, पंचगांव, परभनी, पिंपरी-चिंचवाड़, पुणे, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, रोहतक, रूपनगर, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिरसा, सोलापुर, श्री गंगानगर, सूरत, तालचेर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तिरुपति, टोंक, तुमकुरु, उल्हासनगर, वडोदरा, वातवा, विरार, विशाखापत्तनम, यादगीर शामिल हैं।

आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 12 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में भिवाड़ी, चरखी दादरी, कटक, दिल्ली, धारूहेड़ा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, गुवाहाटी, मंडी गोबिंदगढ़, नोएडा, पीथमपुर शामिल हैं।

वहीं बल्लभगढ़ में वायु गुणवत्ता बेहद खराब है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 239 में से महज 14 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 103 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 04 फरवरी 2026 को यह आंकड़ा 92 दर्ज किया गया था।

109 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर बल्लभगढ़ में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 302 पर पहुंच गया है। हालांकि कल से बल्लभगढ़ के प्रदूषण में गिरावट आई है। कल बल्लभगढ़ में एक्यूआई 370 तक पहुंच गया था।

दिल्ली में 05 फरवरी को प्रदूषण में गिरावट दर्ज की गई। दिल्ली में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक 339 दर्ज किया गया था, जो आज (05 फरवरी) घटकर 241 पर पहुंच गया। मतलब कि कल से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में 98 अंकों का भारी सुधार आया है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 1,500 फीसदी अधिक खराब है।  

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है, जहां सूचकांक 162 (-38) रिकॉर्ड किया गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।   

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 05 फरवरी को चरखी दादरी चौथे स्थान पर है, वहीं गुरुग्राम (295) दूसरे, जबकि धारूहेड़ा (290) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 168, गाजियाबाद में 266, गुवाहाटी में 248, गुरूग्राम में 295, नोएडा में 237, ग्रेटर नोएडा में 220 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 125 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 93, चेन्नई में 87, चंडीगढ़ में 78, हैदराबाद में 100, जयपुर में 153 और पटना में 88 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 14 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अगरतला, बागलकोट, किशनगंज, मदिकेरी, नागपट्टिनम, पंपोर, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, पुदुकोट्टई, समस्तीपुर, शिलांग, श्रीनगर, तंजावुर, थूथुकुडी शामिल हैं।

वहीं आइजोल, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), बांसवाड़ा, बारां, बरेली, बेगूसराय, बेलगाम, बेंगलुरु, बेतिया, भागलपुर, भिलाई, भोपाल, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बूंदी, बक्सर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, छपरा, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, कोयंबटूर, दौसा, धनबाद, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गंगटोक, गया, गोरखपुर, हिसार, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालोर, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कन्नूर, करौली, कटिहार, कटनी, खन्ना, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, लातूर, लखनऊ, मंडीखेड़ा, मिलुपारा, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नासिक, पाली, पलवल, पंचकुला, पानीपत, पटियाला, पटना, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पूर्णिया, राजगीर, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, सहरसा, सांगली, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सिवान, तिरुमाला, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, वृंदावन, यमुना नगर आदि 103 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:

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