पहाड़ों पर प्रदूषण का पहरा: लेह की हवा सबसे खराब, आइजोल सबसे साफ

दिल्ली में बारिश के बाद कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 111 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 101 पर पहुंच गया।
फोटो: सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई)
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सारांश
  • देश में हवा की तस्वीर एक बार फिर विरोधाभासों से भरी नजर आई। 25 अगस्त 2026 को 249 शहरों के लिए जारी सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला कि पहाड़ों में बसा लेह लगातार सबसे प्रदूषित शहर बना हुआ है, जहां एक्यूआई 188 दर्ज किया गया।

  • लेह में कार्बन मोनोऑक्साइड का दबदबा चिंता बढ़ा रहा है और प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 4,500 फीसदी अधिक है।

  • इसके उलट आइजोल में एक्यूआई महज 20 रहा, जिससे दोनों शहरों के बीच हवा की गुणवत्ता में 9.4 गुना का अंतर सामने आया।

  • इस बीच बारिश ने दिल्ली-एनसीआर को कुछ राहत दी है। दिल्ली का एक्यूआई 111 से घटकर 101 और फरीदाबाद का 135 से घटकर 107 पर पहुंच गया, हालांकि दोनों शहरों की हवा अब भी ‘मध्यम’ श्रेणी में है।

  • देश के 34.5 फीसदी शहरों में हवा साफ और 49.8 फीसदी में संतोषजनक रही, लेकिन 39 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में दर्ज की गई।

  • साफ हवा वाले शहरों की संख्या में गिरावट और मध्यम प्रदूषण वाले शहरों में तेज बढ़ोतरी आने वाले दिनों के लिए चिंता का संकेत है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 25 अगस्त 2026 को देश में एक बार फिर लेह सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 188 दर्ज किया गया, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। हालांकि कल (24 अगस्त) लेह में सूचकांक 187 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में एक अंक का मामूली इजाफा हुआ है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि लेह की हवा में कार्बन मोनोऑक्साइड पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

लेह में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमासे 4,500 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में आइजोल की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 20 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर लेह की तुलना आइजोल से करें तो वहां स्थिति 9.4 गुणा खराब है।

दिल्ली में बारिश के बाद कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 111 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 101 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 10 अंकों का सुधार आया है। हालांकि इसके बावजूद दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है। 

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 07-25 अगस्त को 63 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64  दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 135 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 107 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 28 अंक के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज भी एक्यूआई मध्यम श्रेणी में बना हुआ है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 25 अगस्त 2026 को 249 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 34.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 49.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 15.7 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में एक फीसदी से अधिक की गिरावट आई है। वहीं दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 6 फीसदी की वृद्धि हुई है। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से करीब 11.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि चिंता का विषय है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में श्री गंगानगर (183) दूसरे जबकि पाली (148) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह वातवा (142) चौथे स्थान पर है। भिवानी (141) – पानीपत (139) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

जालंधर (138) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में खोरा (131), सीकर (127) और भागलपुर (125) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के तीन शहर (श्री गंगानगर, पाली और सीकर) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि वातवा, पानीपत, जालंधर, खोरा, बर्नीहाट (असम), जींद, नोएडा, सासाराम, फरीदाबाद, गोरखपुर, दिल्ली और खन्ना आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं श्री गंगानगर, पाली, भिवानी, सीकर, भागलपुर, ग्रेटर नोएडा, पीथमपुर, बद्दी, भीलवाड़ा, नारनौल, छपरा, जालोर, उदयपुर, अंबाला, सिवान, अहमदाबाद, गांधीनगर, कैथल, सिरोही और बल्लभगढ़ आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 34.5 फीसदी यानी 86 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बेतिया, भरतपुर, भिलाई, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, ब्यासनगर, चामराजनगर, छाल, चिक्कमगलुरु, कुड्डालोर, कटक, दमोह, धौलपुर, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, फिरोजाबाद, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, कलबुर्गी, करौली, कारवार, खुर्जा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुरनूल, लातूर, लखनऊ, महाड, मैहर, मंडीखेड़ा, मथुरा, मीरा-भायंदर, मैसूर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, पंपोर, परभणी आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 124 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें अंकलेश्वर, आरा, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बागपत, बहादुरगढ़, बालासोर, बांसवाड़ा, बारीपाड़ा, बाड़मेर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भावनगर, भिवाड़ी, बीकानेर, बूंदी, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, देहरादून, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी, गडग, गजरौला, गया, गाजियाबाद, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुरुग्राम, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हापुड़, हिंगोली, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जलगांव, झालावाड़, झांसी, जोधपुर, कडप्पा, काकीनाडा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करनाल, कटिहार, कटनी, कोहिमा, मछलीपट्टनम, मालेगांव, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, मंगुराहा, मेरठ, मेहसाणा, मोदीनगर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नंदेसरी, नवी मुंबई, नेल्लोर, पलवल, पंचकुला आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 39 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अजमेर, अलवर, अंबाला, बड़ौत, भागलपुर, भिवाड़ी, भिवानी, बर्नीहाट (असम), चरखी दादरी, छपरा, चित्तौड़गढ़, दिल्ली, धनबाद, फरीदाबाद, गांधीनगर, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, खैरथल, खोरा, लेह, मानेसर, मुजफ्फरनगर, नारनौल, नोएडा, पलवल, पानीपत, पीथमपुर, सिलीगुड़ी, सिवान, श्री गंगानगर, टोंक और वातवा आदि शामिल हैं।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 249 में से 86 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 124 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 24 अगस्त को भी यह आंकड़ा 117 दर्ज किया गया था।

39 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर लेह में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 188 दर्ज किया गया, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। हालांकि कल (24 अगस्त) लेह में सूचकांक 187 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में एक अंक का मामूली इजाफा हुआ है।

दिल्ली में बारिश के बाद कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 111 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 101 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 10 अंकों का सुधार आया है। हालांकि इसके बावजूद दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है। 

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 135 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 107 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 28 अंक के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज भी एक्यूआई मध्यम श्रेणी में बना हुआ है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 25 अगस्त को वातवा (142) चौथे स्थान पर है, वहीं श्री गंगानगर (183) दूसरे, जबकि पाली (148) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 55, गाजियाबाद में 91, गुवाहाटी में 30, गुरूग्राम में 95, नोएडा में 120, ग्रेटर नोएडा में 125 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 52 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 47, चेन्नई में 63, चंडीगढ़ में 53, हैदराबाद में 48, जयपुर में 54 और पटना में 58 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 86 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में अहमदनगर, आइजोल, अमरावती (महाराष्ट्र), अररिया, आसनसोल, बदलापुर, बारां, बरबिल, बैरकपुर, बीड, बेलगाम, बेतिया, भरतपुर, भिलाई, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, ब्यासनगर, चामराजनगर, छाल, चिक्कमगलुरु, कुड्डालोर, कटक, दमोह, धौलपुर, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, फिरोजाबाद, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, कलबुर्गी, करौली, कारवार, खुर्जा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुरनूल, लातूर, लखनऊ, महाड, मैहर, मंडीखेड़ा, मथुरा, मीरा-भायंदर, मैसूर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, पंपोर, परभणी, पुडुचेरी, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, सांगली, सवाई माधोपुर, शिवमोगा, शिवसागर, सोलापुर, सोनीपत, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, तिरुमाला, उल्हासनगर, वाराणसी, विरार, वृंदावन और यादगीर शामिल हैं।

वहीं अगरतला, आगरा, अजमेर, अकोला, अलवर, अंबरनाथ, अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, आरा, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बागपत, बहादुरगढ़, बालासोर, बांसवाड़ा, बारीपाड़ा, बाड़मेर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भावनगर, भिवाड़ी, बीकानेर, बूंदी, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, देहरादून, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी, गडग, गजरौला, गया, गाजियाबाद, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुरुग्राम, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हापुड़, हिंगोली, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जलगांव, झालावाड़, झांसी, जोधपुर, कडप्पा, काकीनाडा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करनाल, कटिहार, कटनी, कोहिमा, मछलीपट्टनम, मालेगांव, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, मंगुराहा, मेरठ, मेहसाणा, मोदीनगर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागौर, नंदेसरी, नवी मुंबई, नेल्लोर, पलवल, पंचकुला, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, रोहतक, रूपनगर, सहरसा, समस्तीपुर, सतारा, सतना, शामली, सिलचर, सिरसा, श्रीकाकुलम, श्रीनगर, सूरत, तालचेर, थूथुकुडी, तिरुपति, टोंक, उज्जैन, वडोदरा, वापी, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम और यमुना नगर आदि 124 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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