

19 सितंबर 2026 को देश की हवा में प्रदूषण का दबाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दिया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के 243 शहरों के आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक, लगातार दूसरे दिन मोदीनगर देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 203 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में है।
हालांकि, 18 सितंबर के 215 के मुकाबले इसमें 12 अंकों का सुधार हुआ। मोदीनगर में ओजोन प्रदूषण प्रमुख रहा और एक्यूआई स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 230 फीसदी अधिक रहा।
देश में सबसे साफ हवा सासाराम में दर्ज की गई, जहां एक्यूआई महज 21 रहा। इसके मुकाबले मोदीनगर का प्रदूषण स्तर करीब 9.6 गुना अधिक था। प्रदूषण के मामले में लेह 196, बड़ौत 193 और खोरा 189 एक्यूआई के साथ अगले स्थानों पर रहे।
देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के पांच शहर शामिल रहे, जो राज्य के कई हिस्सों में बढ़ते प्रदूषण दबाव को दर्शाता है।
राजधानी दिल्ली में भी महज 24 घंटे में एक्यूआई 88 से बढ़कर 118 हो गया। इसके साथ ही हवा ‘संतोषजनक’ से ‘मध्यम’ श्रेणी में पहुंच गई। फरीदाबाद में भी एक्यूआई 107 से बढ़कर 137 दर्ज हुआ।
कुल मिलाकर 74 शहरों में हवा ‘बेहतर’, 138 में ‘संतोषजनक’ और 30 शहरों में ‘मध्यम’ रही, जबकि मोदीनगर ‘खराब’ श्रेणी में रहा। एक दिन में साफ हवा वाले शहरों की संख्या घटी और मध्यम प्रदूषण वाले शहर बढ़े, जो देश के कई हिस्सों में बिगड़ती वायु गुणवत्ता का संकेत है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 19 सितम्बर 2026 को देश में एक बार फिर मोदीनगर सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 203 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (18 सितम्बर) को मोदीनगर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 215 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में 12 अंकों का सुधार आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि मोदीनगर की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
मोदीनगर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 230 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में सासाराम की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 21 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर मोदीनगर की तुलना सासाराम से करें तो वहां स्थिति 9.6 गुणा खराब है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 88 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 118 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 30 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता ‘संतोषजनक’ से ‘मध्यम’ श्रेणी में पहुंच गई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 07-19 सितम्बर को 63 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 107 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 137 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 30 अंकों के उछाल के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 19 सितम्बर 2026 को 243 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 30.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 56.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 12.8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 22.9 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 7.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से करीब 25 फीसदी की वृद्धि हुई है, जोकि चिंता की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में लेह (196) दूसरे जबकि बड़ौत (193) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह खोरा (189) चौथे स्थान पर है। भिवाड़ी (162) – पानीपत (157) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
मानेसर (155) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में कैथल (154), ग्रेटर नोएडा (141) और नोएडा (141) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के पांच शहर (मोदीनगर, बड़ौत, खोरा, ग्रेटर नोएडा, नोएडा) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि बड़ौत, खोरा, भिवाड़ी, पानीपत, मानेसर, मंडी गोबिंदगढ़, फरीदाबाद, जींद, गुरुग्राम, यमुना नगर, मुंगेर और चरखी दादरी आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं ग्रेटर नोएडा, नोएडा, बुलंदशहर, खैरथल, अजमेर, गजरौला, विशाखापत्तनम, बागपत, मुजफ्फरनगर, पाली, हनुमानगढ़, अलवर और गाजियाबाद आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 30.5 फीसदी यानी 74 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में दमोह, धौलपुर, डोंबिवली, डूंगरपुर, गांधीनगर, गंगटोक, हैदराबाद, इंदौर, जलगांव, काकी नाडा, कलबुर्गी, कल्याण, करनाल, कटनी, कोल्हापुर, कोरबा, कोटा, कुरनूल, लातूर, महाद, मंडीखेड़ा, मीरा-भायंदर, मुंबई, नागपुर, नाहरलागुन, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सांगली, सासाराम, सिलीगुड़ी, सोलापुर, श्रीनगर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तुमडीह आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 138 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवानी, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दौसा, देहरादून, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हापुड़, हिंगोली, हिसार, हावड़ा, हुबली, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, जालौर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, कन्नूर, कानपुर, कटिहार, क्योंझर, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मैहर, मंडीदीप, मैंगलोर, मथुरा, मेरठ, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नागौर, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नेल्लोर, पलवल, पंचगांव, परभणी, पटना, पीथमपुर, प्रयागराज आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 30 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अजमेर, अलवर, बागपत, बड़ौत, भिवाड़ी, बुलंदशहर, चरखी दादरी, दिल्ली, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गजरौला, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, हनुमानगढ़, जींद, कैथल, खैरथल, खोरा, लेह, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, नोएडा, पाली, पानीपत, टोंक, विशाखापत्तनम और यमुना नगर शामिल हैं।
वहीं मोदीनगर (203) में स्थिति 'खराब' दर्ज की गई है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 243 में से 74 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 138 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 18 सितम्बर को भी यह आंकड़ा 128 दर्ज किया गया था।
30 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर मोदीनगर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 203 दर्ज किया गया, जोकि ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (18 सितम्बर) को मोदीनगर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 215 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में 12 अंकों का सुधार आया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 88 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 118 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 30 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता ‘संतोषजनक’ से ‘मध्यम’ श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 107 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 137 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 30 अंकों के उछाल के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 19 सितम्बर को खोरा (189) चौथे स्थान पर है, वहीं लेह (196) दूसरे, जबकि बड़ौत (193) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 57, गाजियाबाद में 103, गुवाहाटी में 66, गुरूग्राम में 120, नोएडा में 141, ग्रेटर नोएडा में 141 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 35 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 74, चेन्नई में 76, चंडीगढ़ में 43, हैदराबाद में 48, जयपुर में 86 और पटना में 76 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 74 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बारीपदा, बीड, बेलापुर, भिलाई, भिवंडी, भोपाल, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, बूंदी, चामराजनगर, चंडीगढ़, छाल, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, दमोह, धौलपुर, डोंबिवली, डूंगरपुर, गांधीनगर, गंगटोक, हैदराबाद, इंदौर, जलगांव, काकी नाडा, कलबुर्गी, कल्याण, करनाल, कटनी, कोल्हापुर, कोरबा, कोटा, कुरनूल, लातूर, महाद, मंडीखेड़ा, मीरा-भायंदर, मुंबई, नागपुर, नाहरलागुन, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सांगली, सासाराम, सिलीगुड़ी, सोलापुर, श्रीनगर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तुमडीह, उल्हासनगर, वापी और विरार शामिल हैं।
वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अंबरनाथ, अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आसनसोल, बद्दी, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बारबिल, बरेली, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवानी, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दौसा, देहरादून, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद, गया, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हापुड़, हिंगोली, हिसार, हावड़ा, हुबली, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, जालौर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, कन्नूर, कानपुर, कटिहार, क्योंझर, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मैहर, मंडीदीप, मैंगलोर, मथुरा, मेरठ, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नागौर, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नेल्लोर, पलवल, पंचगांव, परभणी, पटना, पीथमपुर, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, रायबरेली, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, रोहतक, रूपनगर, सागर, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, शिवमोगा, सीकर, सिलचर, सिरोही, सिरसा, शिवसागर, सिवान, सोनीपत, श्री गंगानगर, सूरत, तालचेर, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, वाराणसी, विजयवाड़ा और वृंदावन आदि 138 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
देश में वायु गुणवत्ता की ताजा जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर से प्राप्त कर सकते हैं