

देश में प्रदूषण का संकट एक बार फिर गहराता दिख रहा है, जहां 28 मार्च 2026 को मंडी गोबिंदगढ़ देश का सबसे जहरीला शहर बनकर उभरा।
महज 24 घंटों में एक्यूआई 128 से उछलकर 296 पहुंच गया, जो गंभीर स्वास्थ्य खतरे का संकेत है और डब्ल्यूएचओ की सुरक्षित सीमा से 1800 फीसदी अधिक है। इसके उलट मुंगेर में हवा सबसे साफ रही, जहां एक्यूआई महज 29 दर्ज किया गया, यानी दोनों शहरों के बीच प्रदूषण का अंतर 10 गुणा से ज्यादा है।
राजधानी दिल्ली और फरीदाबाद में भी प्रदूषण बढ़ा है, जबकि बुलंदशहर, रूपनगर और गुरुग्राम जैसे शहर टॉप प्रदूषित सूची में शामिल हैं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक देश के सिर्फ 7.6 फीसदी शहरों में ही हवा ‘बेहतर’ है, जबकि 27 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक बने हुए हैं, यह संकेत है कि साफ हवा अब अपवाद बनती जा रही है, न कि सामान्य स्थिति।
विश्लेषण के मुताबिक 28 मार्च 2026 को देश में मंडी गोबिंदगढ़ सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 296 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल पंजाब के इस शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 128 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 168 अंकों का उछाल आया है।
रुझानों में सामने आया है कि मंडी गोबिंदगढ़ की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। मंडी गोबिंदगढ़ में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,800 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में मुंगेर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 29 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर मंडी गोबिंदगढ़ की तुलना मुंगेर से करें तो वहां स्थिति 10.2 गुणा खराब है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 144 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 154 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 10 अंकों इजाफा हुआ है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली की तरफ ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 155 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 161 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 28 मार्च 2026 को 237 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 7.6 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 65.4 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 27 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 14.3 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 6.9 फीसदी से अधिक का इजाफा हुआ है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 26.5 फीसदी की कमी आई है। इसी तरह खराब हवा वाले शहरों में कल से 25 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बुलंदशहर (210) दूसरे जबकि रूपनगर (205) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बल्लभगढ़ (199) चौथे स्थान पर है। गुरुग्राम-ग्रेटर नोएडा में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 192 और 186 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
चरखी दादरी (176) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में श्री गंगानगर (171), नंदेसरी (165) और गाजियाबाद (162) भी शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के तीन शहर (बुलंदशहर, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि मंडी गोबिंदगढ़, रूपनगर, बल्लभगढ़, गुरुग्राम, चरखी दादरी, नंदेसरी, फरीदाबाद, सोनीपत, दिल्ली, रोहतक, बिलीपाड़ा, महाड, मानेसर, अगरतला, कल्याण, पटना आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, नोएडा, सिंगरौली, बद्दी, भिवाड़ी, पीथमपुर, बागपत, धनबाद, चंद्रपुर, गुम्मिडीपूंडी, मालेगांव, सवाई माधोपुर, सिरसा, अंकलेश्वर, धुले, खुर्जा, पाली, बीकानेर, नागौर, विशाखापत्तनम, लुधियाना, उदयपुर, पानीपत, प्रतापगढ़, आगरा, भीलवाड़ा, हनुमानगढ़, मंगुराहा, मुजफ्फरनगर, सूरत, देवास, पिंपरी-चिंचवाड़, वातवा, बेलापुर, कोरबा आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 7.6 फीसदी यानी महज 18 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बागलकोट, भिलाई, एलुरु, गुवाहाटी, किशनगंज, मदिकेरी, मैहर, मुंगेर, नागांव, नलबाड़ी, पंपोर, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, ऋषिकेश, शिवमोगा, श्रीनगर, विजयपुरा आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 155 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें बांसवाड़ा, बरेली, बाड़मेर, बठिंडा, बेगूसराय, बेतिया, भावनगर, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बर्नीहाट, चामराजनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, छपरा, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कोयंबटूर, कटक, दमोह, दौसा, देहरादून, धारवाड़, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गुंटूर, हाजीपुर, हल्दिया, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कन्नूर, कानपुर, करौली, करनाल, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, मछलीपट्टनम, मंगलौर, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, नेल्लोर आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 61 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में अगरतला, आगरा, अंकलेश्वर, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बागपत, बल्लभगढ़, बारां, बरबिल, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, बीकानेर, बिलीपाड़ा, चंद्रपुर, चरखी दादरी, दिल्ली, देवास, धनबाद, धुले, फरीदाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, ग्वालियर, हनुमानगढ़, जयपुर, झालावाड़, कल्याण, खुर्जा, कोरबा, लुधियाना, महाड, मालेगांव, मानेसर, मंगुराहा, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नागौर, नंदेसरी, नोएडा, पाली, पलवल, पानीपत, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, रोहतक, सवाई माधोपुर, सिंगरौली, सिरसा, सोनीपत, श्री गंगानगर, सूरत, उदयपुर, वातवा, विशाखापत्तनम शामिल हैं।
इसी तरह बुलंदशहर, मंडी गोबिंदगढ़, रूपनगर में वायु गुणवत्ता ‘खराब’ है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 237 में से महज 18 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 155 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 27 मार्च को यह आंकड़ा 145 दर्ज किया गया था।
61 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज मंडी गोबिंदगढ़ में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 296 दर्ज किया गया। वहीं कल मंडी गोबिंदगढ़ में सूचकांक 128 रिकॉर्ड किया गया। मतलब कि कल से प्रदूषण के स्तर में 168 अंकों का इजाफा हुआ है।
इससे पहले कल देश में (27 मार्च) को सिंगरौली में वायु गुणवत्ता सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 277 दर्ज किया गया था। हालांकि आज वहां वायु गुणवत्ता में 130 अंकों का सुधार आया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 144 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 154 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 10 अंकों इजाफा हुआ है। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली की तरफ ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 155 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 161 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 28 मार्च को बल्लभगढ़ चौथे स्थान पर है, वहीं बुलंदशहर (210) दूसरे, जबकि रूपनगर (205) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 112, गाजियाबाद में 162, गुवाहाटी में 42, गुरूग्राम में 192, नोएडा में 147, ग्रेटर नोएडा में 186 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 70 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 78, चेन्नई में 63, चंडीगढ़ में 55, हैदराबाद में 70, जयपुर में 112 और पटना में 101 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 18 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें बागलकोट, भिलाई, एलुरु, गुवाहाटी, किशनगंज, मदिकेरी, मैहर, मुंगेर, नागांव, नलबाड़ी, पंपोर, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, ऋषिकेश, शिवमोगा, श्रीनगर, विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं अहमदाबाद, अहमदनगर, आइजोल, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बांसवाड़ा, बरेली, बाड़मेर, बठिंडा, बेगूसराय, बेतिया, भावनगर, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बर्नीहाट, चामराजनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, छाल, छपरा, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कोयंबटूर, कटक, दमोह, दौसा, देहरादून, धारवाड़, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गुंटूर, हाजीपुर, हल्दिया, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कन्नूर, कानपुर, करौली, करनाल, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, मछलीपट्टनम, मंगलौर, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, नेल्लोर, पंचगांव, पंचकुला, परभनी, पटियाला, पेरुंदुरई, प्रयागराज, पुणे, रायपुर, रायरंगपुर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, राउरकेला, सागर, समस्तीपुर, सासाराम, सतना, सीकर, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, शिवसागर, सोलापुर, सुआकाती, तालचेर, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, टोंक, तुमडीह, उल्हासनगर, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन, यादगीर, यमुना नगर आदि 155 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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