प्रदूषण में बड़ा उलटफेर: अंगुल बना देश का सबसे प्रदूषित शहर, 305 पर पहुंचा एक्यूआई

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में कटक (231) दूसरे जबकि फरीदाबाद (185) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बल्लभगढ़ (179) चौथे स्थान पर है
फोटो: सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट
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सारांश
  • देश में प्रदूषण के स्तर में बड़े उलटफेर के बीच 21 मार्च 2026 को ओडिशा का अंगुल 305 एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया। जहां महज 24 घंटे में प्रदूषण 140 अंक बढ़ गया और ओजोन पूरी तरह हावी रहा। हालात इतने खराब हैं कि यहां प्रदूषण स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 400 फीसदी अधिक दर्ज किया गया।

  • प्रदूषण के मामले में कटक दूसरे और फरीदाबाद तीसरे स्थान पर रहे, जबकि हरियाणा के चार शहर टॉप-10 प्रदूषित शहरों में शामिल हैं।

  • दूसरी तरफ पंपोर देश का सबसे साफ शहर रहा, जहां एक्यूआई महज 14 दर्ज किया गया, यानी अंगुल की हवा उससे 21 गुना ज्यादा खराब है।

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 233 शहरों के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि देश के ज्यादातर शहरों में हवा संतोषजनक श्रेणी में है, लेकिन कई शहरों में पीएम2.5, पीएम10 और ओजोन प्रदूषण चिंता का कारण बना हुआ है।

  • दिल्ली और फरीदाबाद में भी पिछले 24 घंटों में प्रदूषण बढ़ा है, जिससे साफ है कि देश में प्रदूषण का स्तर लगातार उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहा है।

विश्लेषण के मुताबिक 21 मार्च 2026 को देश में अंगुल सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 305 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल ओड़िशा के इस शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 165 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 140 अंकों का उछाल आया है।

रुझानों में सामने आया है कि अंगुल की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। अंगुल में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 400 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में पंपोर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर अंगुल की तुलना पंपोर से करें तो वहां स्थिति 21 गुणा खराब है।

इससे पहले कल देश में छपरा की हवा सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 195 दर्ज किया गया। हालांकि आज सरकारी आंकड़ों में छपरा का जिक्र नहीं है।

राजधानी दिल्ली की बात करें तो कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 93 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 119 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 26 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।

इसी तरफ फरीदाबाद में भी कल से इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 157 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 185 पर पहुंच गया। इसका मतलब कि फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।         

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 21 मार्च 2026 को 233 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 24 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 59.2 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 16.7 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 43.6 फीसदी का इजाफा हुआ है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 11.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में भी कल से करीब 17.8 फीसदी की कमी आई है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में कटक (231) दूसरे जबकि फरीदाबाद (185) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बल्लभगढ़ (179) चौथे स्थान पर है। दौसा-सोनीपत में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 174 और 157 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

बीकानेर (156) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में ग्रेटर नोएडा (150), नंदेसरी (140) और गुरुग्राम (138) भी शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार शहर (फरीदाबाद, बल्लभगढ़, सोनीपत, गुरुग्राम) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि सोनीपत, नंदेसरी, खन्ना, गाजियाबाद, रोहतक, धारूहेड़ा, बहादुरगढ़, महाड, राजकोट आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं फरीदाबाद, बल्लभगढ़, दौसा, बीकानेर, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, वातवा, फतेहाबाद, दिल्ली, नोएडा, हनुमानगढ़, भिवाड़ी, चंद्रपुर, अहमदाबाद, सोलापुर, अलवर, पटना आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 24 फीसदी यानी महज 56 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बरेली, बैरकपुर, बेगूसराय, बेतिया, भागलपुर, भिलाई, बिलासपुर, चामराजनगर, चेन्नई, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, दमोह, देहरादून, दुर्गापुर, फिरोजाबाद, हल्दिया, हापुड़, जबलपुर, जलना, झांसी, जींद, कैथल, कलबुर्गी, खुर्जा, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोप्पल, कुंजेमुरा, मदिकेरी, मोतिहारी, नाहरलागुन, नयागढ़, नेल्लोर, पंपोर, पंचगांव आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 138 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें बठिंडा, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिलीपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट, चंडीगढ़, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, देवास, धनबाद, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, एलूर, एलुरु, गांधीनगर, गया, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करनाल, कटिहार, कटनी, कोल्लम, कोरबा, कोटा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मानेसर, मंगलौर, मेरठ, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 37 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में अहमदाबाद, अलवर, अनंतपुर, औरंगाबाद (बिहार), बहादुरगढ़, बालासोर, बल्लभगढ़, भिवाड़ी, बीकानेर, चंद्रपुर, चरखी दादरी, दौसा, दिल्ली, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, हनुमानगढ़, जयपुर, करौली, खन्ना, महाड, मेहसाणा, नंदेसरी, नोएडा, पलवल, पटना, राजकोट, रोहतक, सवाई धोपुर, सिंगरौली, सोलापुर, सोनीपत, श्री गंगानगर, वातवा शामिल हैं।

इसी तरह कटक (231) में वायु गुणवत्ता खराब जबकि अंगुल (305) में बेहद खराब है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 233 में से महज 56 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 138 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 20 मार्च को यह आंकड़ा 156 दर्ज किया गया था।

37 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज अंगुल में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 305 पर पहुंच गया। वहीं कल अंगुल में सूचकांक 165 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से प्रदूषण के स्तर में 140 अंकों का भारी उछाल आया है।

इससे पहले कल छपरा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब रिकॉर्ड की गई थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 195 तक पहुंच गया। वहीं आज सरकारी आंकड़ों अंगुल का जिक्र नहीं है। 

दिल्ली में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 93 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 119 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 26 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता एक बार फिर संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।

दिल्ली की तरफ ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 157 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 185 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।     

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 21 मार्च को बल्लभगढ़ चौथे स्थान पर है, वहीं कटक (231) दूसरे, जबकि फरीदाबाद (185) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 80, गाजियाबाद में 133, गुवाहाटी में 52, गुरूग्राम में 138, नोएडा में 119, ग्रेटर नोएडा में 150 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 66 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 71, चेन्नई में 41, चंडीगढ़ में 64, हैदराबाद में 68, जयपुर में 101 और पटना में 101 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 56 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, अमरावती (आंध्रप्रदेश), आसनसोल, बागलकोट, बरेली, बैरकपुर, बेगूसराय, बेतिया, भागलपुर, भिलाई, बिलासपुर, चामराजनगर, चेन्नई, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, दमोह, देहरादून, दुर्गापुर, फिरोजाबाद, हल्दिया, हापुड़, जबलपुर, जलना, झांसी, जींद, कैथल, कलबुर्गी, खुर्जा, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोप्पल, कुंजेमुरा, मदिकेरी, मोतिहारी, नाहरलागुन, नयागढ़, नेल्लोर, पंपोर, पंचगांव, पटियाला, पेरुंदुरई, प्रयागराज, पुदुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, ऋषिकेश, शिलांग, सिलचर, श्रीनगर, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, वाराणसी, वृंदावन शामिल हैं।

वहीं आगरा, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अंबाला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अंकलेश्वर, आरा, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बारीपाड़ा, बाड़मेर, बठिंडा, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिलीपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट, चंडीगढ़, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, देवास, धनबाद, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, एलूर, एलुरु, गांधीनगर, गया, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करनाल, कटिहार, कटनी, कोल्लम, कोरबा, कोटा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मानेसर, मंगलौर, मेरठ, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, पाली, पानीपत, परभनी, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, पुणे, पूर्णिया, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, राउरकेला, सागर, सांगली, सतना, शिवमोगा, सीकर, सिरोही, शिवसागर, सूरत, तालचेर, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, टोंक, उदयपुर, उडुपी, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, विजयवाड़ा, विरार, विशाखापत्तनम, यादगीर, यमुना नगर आदि 138 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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