

देश में वायु प्रदूषण की स्थिति एक बार फिर चिंताजनक होती दिख रही है। 22 मार्च 2026 के विश्लेषण के मुताबिक ओडिशा का अंगुल लगातार सबसे प्रदूषित शहर बना हुआ है, जहां एक्यूआई 292 दर्ज किया गया, जो सुरक्षित सीमा से करीब 350 फीसदी अधिक है और यहां हवा में ओजोन का प्रभाव सबसे ज्यादा है।
प्रदूषण के मामले में पाली और ग्रेटर नॉएडा क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे, जबकि कोहिमा देश का सबसे साफ शहर रहा, जहां एक्यूआई महज 19 दर्ज किया गया।
राजधानी दिल्ली में 24 घंटे में एक्यूआई 34 अंक बढ़कर 153 पर पहुंच गया, जिससे हवा फिर मध्यम श्रेणी में आ गई। वहीं फरीदाबाद में भी प्रदूषण में इजाफा दर्ज किया गया।
230 शहरों के आंकड़ों से पता चलता है कि देश में साफ हवा वाले शहरों की संख्या में 25 फीसदी की गिरावट आई है, जबकि खराब हवा वाले शहरों की संख्या में 400 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया है, जो प्रदूषण की बिगड़ती तस्वीर को दर्शाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक देश के कई शहरों में पीएम2.5, पीएम10, ओजोन और कार्बन प्रदूषण हावी है, जबकि हरियाणा के चार शहर देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हैं।
कुल मिलाकर, देश के ज्यादातर शहरों में हवा भले संतोषजनक श्रेणी में हो, लेकिन साफ हवा वाले शहर तेजी से कम हो रहे हैं और प्रदूषण का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
विश्लेषण के मुताबिक 22 मार्च 2026 को एक बार फिर देश में अंगुल सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 292 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल ओड़िशा के इस शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 305 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 13 अंकों का सुधार आया है।
रुझानों में सामने आया है कि अंगुल की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। अंगुल में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 350 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में कोहिमा की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 19 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर अंगुल की तुलना कोहिमा से करें तो वहां स्थिति 15 गुणा खराब है।
राजधानी दिल्ली की बात करें तो कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 119 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 153 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 34 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
इसी तरफ फरीदाबाद में भी कल से इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 185 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 188 पर पहुंच गया। इसका मतलब कि फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 22 मार्च 2026 को 230 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 18.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 58.7 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 23 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 25 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 2.2 फीसदी की कमी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में भी कल से करीब 29.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। खराब हवा वाले शहरों में भी कल से 400 फीसदी का उछाल आया है, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में पाली (278) दूसरे जबकि ग्रेटर नोएडा (240) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह कटक (226) चौथे स्थान पर है। बल्लभगढ़-ग्वालियर में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 217 और 200 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
फरीदाबाद (188) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गुरुग्राम (188), बद्दी (173), चरखी दादरी (167) भी शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार शहर (फरीदाबाद, बल्लभगढ़, चरखी दादरी, गुरुग्राम) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि फरीदाबाद, गुरुग्राम, चरखी दादरी, गाजियाबाद, महाड, सोनीपत, धारूहेड़ा, नोएडा, नंदेसरी, वडोदरा, वातवा , भावनगर, मानेसर, गांधीनगर, रोहतक, मंडीदीप, बहादुरगढ़, पुणे आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं ग्रेटर नोएडा, बल्लभगढ़, बद्दी, बुलंदशहर, अहमदाबाद, भिवाड़ी, टोंक, आगरा, पिंपरी-चिंचवाड़, धौलपुर, मेहसाणा, कटनी, बदलापुर, नागांव आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 18.3 फीसदी यानी महज 42 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बिलासपुर, चामराजनगर, चेन्नई, छाल, कोयंबटूर, देहरादून, एलुरु, गुवाहाटी, हल्दिया, झांसी, कलबुर्गी, क्योंझर, किशनगंज, कोहिमा, कोप्पल, कोरबा, मदिकेरी, मुंगेर, नाहरलागुन, नयागढ़, नेल्लोर, पंपोर, पेरुंदुरई, प्रयागराज, पुदुचेरी, रायरंगपुर, राजगीर, रामनगर, ऋषिकेश, शिलांग आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 135 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें बागपत, बालासोर, बांसवाड़ा, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बठिंडा, बेगूसराय, बेंगलुरु, भीलवाड़ा, भिवंडी, भिवानी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, ब्रजराजनगर, बूंदी, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चित्तौड़गढ़, चूरू, दौसा, देवास, धनबाद, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, करनाल, कटिहार, खन्ना, खुर्जा, कोल्हापुर, कोलकाता, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 48 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बदलापुर, बहादुरगढ़, बारां, बारबिल, भरतपुर, भावनगर, भिवाड़ी, भोपाल, बीकानेर, बोइसर, बुलंदशहर, चरखी दादरी, दिल्ली, धारूहेड़ा, धौलपुर, फरीदाबाद, गांधीनगर, गाजियाबाद, गुरुग्राम, ग्वालियर, झालावाड़, कटनी, कोटा, महाड, मंडीदीप, मानेसर, मेहसाणा, नागांव, नंदेसरी, नवी मुंबई, नोएडा, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुणे, रोहतक, सवाई माधोपुर, सिंगरौली, सोनीपत, श्री गंगानगर, टोंक, उल्हासनगर, वडोदरा, वातवा शामिल हैं।
इसी तरह अंगुल, बल्लभगढ़, कटक, ग्रेटर नोएडा और पाली में वायु गुणवत्ता ‘खराब’ है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 230 में से महज 42 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 135 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 21 मार्च को यह आंकड़ा 138 दर्ज किया गया था।
48 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर अंगुल में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 292 दर्ज किया गया। वहीं कल अंगुल में सूचकांक 305 रिकॉर्ड किया गया था। मतलब कि कल से प्रदूषण के स्तर में 13 अंकों का सुधार आया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 119 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 153 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 34 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता एक बार फिर मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली की तरफ ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 185 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 188 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 22 मार्च को कटक चौथे स्थान पर है, वहीं पाली (278) दूसरे, जबकि ग्रेटर नोएडा (240) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 200, गाजियाबाद में 162, गुवाहाटी में 48, गुरूग्राम में 188, नोएडा में 142, ग्रेटर नोएडा में 240 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 84 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 72, चेन्नई में 39, चंडीगढ़ में 54, हैदराबाद में 72, जयपुर में 90 और पटना में 70 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 42 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अमरावती (आंधप्रदेश), अमृतसर, बागलकोट, बैरकपुर, बेतिया, भागलपुर, भिलाई, बिलासपुर, चामराजनगर, चेन्नई, छाल, कोयंबटूर, देहरादून, एलुरु, गुवाहाटी, हल्दिया, झांसी, कलबुर्गी, क्योंझर, किशनगंज, कोहिमा, कोप्पल, कोरबा, मदिकेरी, मुंगेर, नाहरलागुन, नयागढ़, नेल्लोर, पंपोर, पेरुंदुरई, प्रयागराज, पुदुचेरी, रायरंगपुर, राजगीर, रामनगर, ऋषिकेश, शिलांग, सिलचर, श्रीनगर, टेन्सा, तिरुमाला, वाराणसी शामिल हैं।
वहीं अगरतला, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अलवर, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बागपत, बालासोर, बांसवाड़ा, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बठिंडा, बेगूसराय, बेंगलुरु, भीलवाड़ा, भिवंडी, भिवानी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, ब्रजराजनगर, बूंदी, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चित्तौड़गढ़, चूरू, दौसा, देवास, धनबाद, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, करनाल, कटिहार, खन्ना, खुर्जा, कोल्हापुर, कोलकाता, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मंगलौर, मंगुराहा, मेरठ, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नारनौल, नासिक, पलवल, पंचगांव, पानीपत, परभनी, पटियाला, पटना, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, राउरकेला, सागर, सासाराम, सतना, शिवमोगा, सीकर, सिलीगुड़ी, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, सूरत, तालचेर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, उदयपुर, उडुपी, उज्जैन, वापी, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यादगीर, यमुना नगर आदि 135 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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