प्रदूषित शहरों में पहले पायदान पर पहुंचा गुरुग्राम, गुवाहाटी-पंचगांव में भी स्थिति 'खराब'

गुरुग्राम में वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़कर 288 पर पहुंच गया है। मतलब कि प्रदूषण का स्तर सुरक्षित सीमा से 1,800 फीसदी अधिक है
देश के कई शहरों  में वायु गुणवत्ता न केवल इंसानों बल्कि दूसरे जीवों के लिए भी सुरक्षित नहीं है; फोटो: सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई)
देश के कई शहरों में वायु गुणवत्ता न केवल इंसानों बल्कि दूसरे जीवों के लिए भी सुरक्षित नहीं है; फोटो: सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई)
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विश्लेषण के मुताबिक 15 फरवरी 2026 को देश में गुरुग्राम सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 288 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे एक दिन पहले यानी 14 फरवरी को गुरुग्राम में एक्यूआई 276 था। यानी बीते 24 घंटों में प्रदूषण के स्तर में 12 अंकों का उछाल आया है। 

रुझानों में सामने आया है कि गुरुग्राम की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

गुरुग्राम में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,800 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में श्रीनगर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 35 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर गुरुग्राम की तुलना श्रीनगर से करें तो वहां स्थिति आठ गुणा खराब है।

गौरतलब है कि कल देश में बल्लभगढ़ की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब एक्यूआई 284 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज वहां 63 अंकों के सुधार के साथ प्रदूषण का स्तर घटकर 221 पर पहुंच गया है। मतलब कि सुधार के बावजूद वायु गुणवत्ता आज भी खराब बनी हुई है।     

राजधानी दिल्ली से जुड़े आंकड़ों को देखें तो कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। इसके बावजूद आज भी वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बनी हुई है। कल दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 230 दर्ज किया गया था, जो 15 फरवरी को 14 अंकों के सुधार के साथ घटकर 216 पर पहुंच गया। इससे पहले 18 जनवरी को दिल्ली में 2026 का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया।    

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 15 फरवरी 2026 को 244 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 3.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 35.7 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 61.1 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक बनी हुई है।

बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 4.8 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में भी 6.5 फीसदी का इजाफा हुआ है। दूसरी तरफ खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 28 फीसदी की गिरावट आई है, जोकि राहत की खबर है।

फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 193 (+12) दर्ज किया गया है।       

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में श्री गंगानगर (275) दूसरे जबकि मंडीदीप (263) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 251 अंकों के साथ गाजियाबाद चौथे स्थान पर है। बहादुरगढ़-भिवानी में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 238 और 234 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

बागपत (232) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में ब्यासनगर (231), गुवाहाटी (227), पंचगांव (222) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के दो (गाजियाबाद, बागपत) और हरियाणा के चार शहर (गुरुग्राम, बहादुरगढ़, भिवानी, पंचगांव) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि गुरुग्राम, मंडीदीप, गाजियाबाद, बहादुरगढ़, भिवानी, बागपत, गुवाहाटी, पंचगांव, बल्लभगढ़, हापुड़, पीथमपुर, मानेसर, गुम्मिडीपूंडी, नोएडा, सूरत, तालचेर, धारूहेड़ा, तुमकुरु, मुजफ्फरनगर, नागपुर, करनाल, रोहतक, देहरादून, कोलकाता, यमुना नगर, नाहरलागुन, चेन्नई, वातवा, चंद्रपुर, तिरुमाला, अंगुल, बर्नीहाट, पुणे, चित्तौड़गढ़, मंगुराहा, सांगली, बद्दी, उज्जैन, जयपुर, भोपाल, इंदौर, काशीपुर, सोनीपत, उल्हासनगर, वडोदरा, मुंबई, लातूर, मीरा-भायंदर, अंकलेश्वर, राजमहेंद्रवरम, हाजीपुर, नलबाड़ी, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), कोरबा, नांदेड़, नवी मुंबई, हल्दिया, सागर, नागांव, मंडीखेड़ा, आसनसोल, नारनौल, जलना, एलूर, मुरादाबाद आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं बेलापुर, भिवाड़ी, सीकर, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद, बुलंदशहर, सिंगरौली, नागौर, टोंक, हावड़ा, बारबिल, भावनगर, पाली, बिलीपाड़ा, विशाखापत्तनम, कोटा, उदयपुर, जलगांव, कुंजेमुरा, मेरठ, भिवंडी, नयागढ़, रतलाम, गांधीनगर, जैसलमेर, मंडी गोबिंदगढ़, तुमडीह, झुंझुनू, हनुमानगढ़, अमरावती (आंध्रप्रदेश), सिलीगुड़ी, अलवर, जालोर, कुरुक्षेत्र, बदलापुर, चूरू, दुर्गापुर, ग्वालियर, राउरकेला, कल्याण, महाड, बोइसर, लुधियाना, बीकानेर, देवास, सोलापुर, राजकोट, पटना, आगरा, क्योंझर, खुर्जा, धनबाद, मालेगांव, विरार, अमरावती (महाराष्ट्र), जोधपुर, सुआकाती, प्रतापगढ़, रायरंगपुर, भीलवाड़ा, झालावाड़, बारां, ठाणे, पेरुंदुरई, ब्रजराजनगर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 3.3 फीसदी यानी महज आठ शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बागलकोट, दमोह, मदिकेरी, पलवल, पंचकुला, रूपनगर, शिलांग, श्रीनगर  आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 87 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें बूंदी, बक्सर, चामराजनगर, चरखी दादरी, छाल, छपरा, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, कोयंबटूर, दौसा, धारवाड़, डूंगरपुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गया, गोरखपुर, हिसार, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जालंधर, झांसी, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटनी, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, लखनऊ, मिलुपारा, मोतिहारी, मुंगेर, नासिक, पंपोर, परभनी, पटियाला, प्रयागराज, पुदुचेरी, पूर्णिया, रायपुर, रामनगर, ऋषिकेश, समस्तीपुर, सतना, शिवमोगा, सिलचर आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 131 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अंगुल, अंकलेश्वर, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बालासोर, बारां, बारबिल, बेंगलुरु, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बर्नीहाट, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, देहरादून, देवास, धनबाद, धारूहेड़ा, धुले, दुर्गापुर, एलूर, फरीदाबाद, गांधीनगर, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जलगांव, जलना, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जोधपुर, कल्याण, करनाल, काशीपुर, क्योंझर, खुर्जा, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लुधियाना, महाड, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मेरठ, मेहसाना , मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नारनौल, नवी मुंबई, नयागढ़, नोएडा, पाली, पटना, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, पुणे, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, सागर, सहरसा, सांगली, सवाई माधोपुर, सिलीगुड़ी, सिंगरौली, सोलापुर, सोनीपत, सुआकाती, सूरत, तालचेर, ठाणे, तिरुमाला, टोंक, तुमकुरु, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वातवा, विरार, विशाखापत्तनम, यमुना नगर शामिल हैं।

आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 18 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में बागपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बेलापुर, भिवाड़ी, भिवानी, ब्यासनगर, दिल्ली, गाजियाबाद, गुरुग्राम, गुवाहाटी, हापुड़, मंडीदीप, मानेसर, पंचगांव, पीथमपुर, सीकर, श्री गंगानगर शामिल हैं।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 244 में से महज आठ शहरों में हवा 'बेहतर' है। 87 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 14 फरवरी 2026 को यह आंकड़ा 83 दर्ज किया गया था।

131 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज गुरुग्राम में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 288 पर पहुंच गया। इससे पहले कल गुरुग्राम में एक्यूआई 276 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 12 अंकों का इजाफा हुआ है।   

कल बल्लभगढ़ में वायु गुणवत्ता सूचकांक 284 दर्ज किया गया था। जहां आज 63 अंकों के सुधार के साथ सूचकांक घटकर 221 पर पहुंच गया। मतलब कि आज भी बल्लभगढ़ में वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बनी हुई है।   

दिल्ली में 15 फरवरी को प्रदूषण में गिरावट दर्ज की गई। दिल्ली में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक 230 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 216 पर पहुंच गया। मतलब कि कल से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में 14 अंकों का सुधार आया है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 200 फीसदी अधिक खराब है।  

दूसरी तरफ फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में उछाल आया है। फरीदाबाद में कल जहां एक्यूआई 181 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 193 पर पहुंच गया है। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।     

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 15 फरवरी को गाजियाबाद चौथे स्थान पर है, वहीं श्री गंगानगर (275) दूसरे, जबकि मंडीदीप (263) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 124, गाजियाबाद में 251, गुवाहाटी में 227, गुरूग्राम में 288, नोएडा में 184, ग्रेटर नोएडा में 195 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 134 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 96, चेन्नई में 161, चंडीगढ़ में 102, हैदराबाद में 100, जयपुर में 142 और पटना में 117 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन आठ शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें बागलकोट, दमोह, मदिकेरी, पलवल, पंचकुला, रूपनगर, शिलांग, श्रीनगर शामिल हैं।

वहीं अगरतला, आइजोल, अजमेर, अकोला, अंबाला, अमृतसर, अनंतपुर, अररिया, आरा, बांसवाड़ा, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बठिंडा, बेगूसराय, बेतिया, भागलपुर, भरतपुर, भिलाई, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बूंदी, बक्सर, चामराजनगर, चरखी दादरी, छाल, छपरा, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, कोयंबटूर, दौसा, धारवाड़, डूंगरपुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गया, गोरखपुर, हिसार, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जालंधर, झांसी, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटनी, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोल्लम, लखनऊ, मिलुपारा, मोतिहारी, मुंगेर, नासिक, पंपोर, परभनी, पटियाला, प्रयागराज, पुदुचेरी, पूर्णिया, रायपुर, रामनगर, ऋषिकेश, समस्तीपुर, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, सिरसा, शिवसागर, सिवान, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, वापी, वाराणसी, विजयपुरा, विजयवाड़ा, वृंदावन, यादगीर आदि 87 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:

प्रदूषण में अव्वल बल्लभगढ़, 284 एक्यूआई, दिल्ली-गुरुग्राम में भी स्थिति 'खराब'

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