

उत्तर भारत एक बार फिर जहरीली हवा की गिरफ्त में है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के ताजा आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि 29 जून 2026 को हरियाणा का सोनीपत देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 343 तक पहुंच गया।
महज 24 घंटों में यहां प्रदूषण 134 अंक बढ़ा और हवा में मौजूद पीएम2.5 के बेहद महीन कणों ने हालात को और खतरनाक बना दिया। सोनीपत में प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 2,150 फीसदी अधिक दर्ज किया गया, जो गंभीर स्वास्थ्य संकट की चेतावनी है।
इसके उलट कर्नाटक का मदिकेरी देश का सबसे स्वच्छ शहर रहा, जहां एक्यूआई केवल 15 दर्ज हुआ। आंकड़े यह भी बताते हैं कि देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के पांच शहर शामिल हैं, जिससे उत्तर भारत में प्रदूषण की भयावह तस्वीर सामने आती है।
हालांकि देश के लगभग 80 फीसदी शहरों में हवा बेहतर या संतोषजनक श्रेणी में रही, लेकिन उत्तर भारत के कई शहर अब भी प्रदूषण के हॉटस्पॉट बने हुए हैं। यह केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की सेहत और जीवन से जुड़ा गंभीर संकट है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 29 जून 2026 को देश में सोनीपत सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 343 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। कल सोनीपत में एक्यूआई 209 दर्ज किया गया था। इसका मतलब है कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 134 अंकों का भारी उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि सोनीपत की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
सोनीपत में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,150 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 15 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर सोनीपत की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 22.8 गुणा खराब है।
कल देश में पानीपत में प्रदूषण सबसे ज्यादा था, जब एक्यूआई 366 दर्ज किया गया। हालांकि आज पानीपत में 178 अंकों के भारी सुधार के साथ वायु गुणवत्ता सूचकांक 188 पर पहुंच गया है। मतलब की वायु गुणवत्ता बेहद खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में कल एक्यूआई 152 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 151 पर पहुंच गया है। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में एक अंक का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 30 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 85 पर पहुंच गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 173 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 170 पर पहुंच गया। इसके साथ ही तीन अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 29 जून 2026 को 241 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 24.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 55.2 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 20.3 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 11.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 8.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इसी तरह मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 2.6 फीसदी का उछाल आया है। इसी तरह खराब हवा वाले शहरों की गिनती में 14.3 फीसदी की बढ़ोतरी रिकॉर्ड की गई, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में मोदीनगर (258) दूसरे जबकि बहादुरगढ़ (251) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह ग्रेटर नोएडा (240) चौथे स्थान पर है। करनाल– रोहतक में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
बागपत (224) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गुरुग्राम (213), मेरठ (205) और गाजियाबाद (189) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के पांच शहर (सोनीपत, बहादुरगढ़, करनाल, रोहतक, और गुरुग्राम) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि सोनीपत, मोदीनगर, बहादुरगढ़, करनाल, गुरुग्राम, मेरठ, गाजियाबाद, फरीदाबाद, जींद, भिवानी, चरखी दादरी, दिल्ली, वातवा, खोरा, कैथल, नारनौल, मानेसर, बर्नीहाट (मेघालय) आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं ग्रेटर नोएडा, रोहतक, बागपत, पानीपत, जैसलमेर, हापुड़, बुलंदशहर, नोएडा, कुरुक्षेत्र, अंबाला, बल्लभगढ़, बीकानेर, मुजफ्फरनगर, भिवाड़ी, बाड़मेर, हिसार, धनबाद, छपरा, चूरू, फतेहाबाद, पटियाला, झुंझुनू, हनुमानगढ़, अंगुल, मथुरा, श्री गंगानगर, विशाखापत्तनम आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 24.5 फीसदी यानी 59 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भिलाई, भोपाल, बोईसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, चामराजनगर, छाल, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, कुड्डालोर, डोंबिवली, एलुरु, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, हिंगोली, जलगांव, झांसी, कलबुर्गी, क्योंझर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोप्पल, लातूर, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, मुंबई, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, परभणी, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, ऋषिकेश, सागर, सतारा, शिवसागर, सोलापुर, तिरुवनंतपुरम, तिरुमाला आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 133 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलाईपाड़ा, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कटक, दमोह, दौसा, देहरादून, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जालौर, झालावाड़, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटिहार, कटनी, खैरथल, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागौर, नंदेसरी, नेल्लोर, पाली, पंपोर, पंचगांव, पटना, पीथमपुर, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रतलाम आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 40 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अंबाला, अंगुल, बल्लभगढ़, बाड़मेर, भिवाड़ी, भिवानी, बीकानेर, बुलंदशहर, बर्नीहाट (मेघालय), चरखी दादरी, छपरा, चूरू, दिल्ली, धनबाद, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गांधीनगर, गाजियाबाद, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, जैसलमेर, झुंझुनू, जींद, कैथल, खोरा, कुरुक्षेत्र, मानेसर, मथुरा, मुजफ्फरनगर, नारनौल, नोएडा, पानीपत, पटियाला, सिलीगुड़ी, श्री गंगानगर, सुआकाती, तालचेर, वातवा, विशाखापत्तनम आदि शामिल हैं।
इसी तरह बागपत, बहादुरगढ़, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, करनाल, मेरठ, मोदीनगर, रोहतक में स्थिति खराब दर्ज की गई है। वहीं सोनीपत (343) में स्थिति बेहद खराब दर्ज की गई है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 241 में से 59 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 133 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 28 जून को यह आंकड़ा 146 दर्ज किया गया था।
40 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज सोनीपत में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 343 दर्ज किया गया, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है। इससे पहले कल सोनीपत में एक्यूआई 209 दर्ज किया गया था। मतलब की कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 134 अंकों की भारी बढ़ोतरी हुई है।
कल देश में पानीपत में प्रदूषण सबसे ज्यादा था, जब एक्यूआई 366 दर्ज किया गया। हालांकि आज पानीपत में 178 अंकों के भारी सुधार के साथ वायु गुणवत्ता सूचकांक 188 पर पहुंच गया है। मतलब की वायु गुणवत्ता बेहद खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में कल एक्यूआई 152 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 151 पर पहुंच गया है। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में एक अंक का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 173 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 170 पर पहुंच गया। इसके साथ ही तीन अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 29 जून को ग्रेटर नोएडा (240) चौथे स्थान पर है, वहीं मोदीनगर (258) दूसरे, जबकि बहादुरगढ़ (251) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 70, गाजियाबाद में 189, गुवाहाटी में 74, गुरूग्राम में 213, नोएडा में 167, ग्रेटर नोएडा में 240 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 41 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 99, चेन्नई में 58, चंडीगढ़ में 53, हैदराबाद में 53, जयपुर में 89 और पटना में 84 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 59 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), बरेली, बेलापुर, भिलाई, भोपाल, बोईसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, चामराजनगर, छाल, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, कुड्डालोर, डोंबिवली, एलुरु, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, हिंगोली, जलगांव, झांसी, कलबुर्गी, क्योंझर, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोप्पल, लातूर, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, मुंबई, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, परभणी, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, ऋषिकेश, सागर, सतारा, शिवसागर, सोलापुर, तिरुवनंतपुरम, तिरुमाला, तुमडीह, उल्हासनगर, वाराणसी, विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अमृतसर, अनंतपुर, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बागलकोट, बालासोर, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बारीपाड़ा, बैरकपुर, बीड, बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलाईपाड़ा, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कटक, दमोह, दौसा, देहरादून, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जालौर, झालावाड़, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटिहार, कटनी, खैरथल, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागौर, नंदेसरी, नेल्लोर, पाली, पंपोर, पंचगांव, पटना, पीथमपुर, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, राउरकेला, रूपनगर, सतना, सवाई माधोपुर, शिवमोगा, सीकर, सिलचर, सिंगरौली, सिरोही, श्रीनगर, सूरत, टेन्सा, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, टोंक, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, वापी, विजयवाड़ा, वृंदावन, यमुना नगर आदि 133 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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