सांसों पर संकट: 51 फीसदी से ज्यादा भारतीय शहरों में हवा चिंताजनक, गुम्मिडीपूंडी में बढ़कर 285 पर पहुंचा एक्यूआई

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में पानीपत (274) दूसरे जबकि गजरौला (247) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह भिवाड़ी (244) चौथे पायदान पर है।
भारत की 96 फीसदी आबादी यानी 133 करोड़ लोग ऐसी हवा में सांस लेने को मजबूर हैं जहां पीएम 2.5 का वार्षिक औसत स्तर डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी मानकों से सात गुणा खराब है; फोटो: आईस्टॉक
भारत की 96 फीसदी आबादी यानी 133 करोड़ लोग ऐसी हवा में सांस लेने को मजबूर हैं जहां पीएम 2.5 का वार्षिक औसत स्तर डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी मानकों से सात गुणा खराब है; फोटो: आईस्टॉक
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सारांश
  • 27 अक्टूबर 2026 को देश के 274 शहरों की वायु गुणवत्ता के विश्लेषण से पता चला है कि 51.8 फीसदी यानी 142 शहरों में हवा चिंताजनक स्थिति में है, जबकि महज 19 शहरों में वायु गुणवत्ता बेहतर दर्ज की गई।

  • तमिलनाडु के गुम्मिडीपूंडी में प्रदूषण सबसे अधिक रहा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) एक दिन में 78 अंक उछलकर 285 पर पहुंच गया।

  • पानीपत (274), गजरौला (247) और भिवाड़ी (244) भी सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे।

  • इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि वायु प्रदूषण अब किसी एक शहर या महानगर तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों की सेहत के लिए खतरा बन रहा है।

  • दिल्ली में भी हवा की गुणवत्ता बिगड़ी है। यहां एक्यूआई 174 से बढ़कर 197 पर पहुंच गया, जबकि फरीदाबाद में यह 117 से बढ़कर 122 दर्ज किया गया।

  • गुम्मिडीपूंडी में प्रदूषण के महीन कण पीएम2.5 का दबदबा रहा, जबकि कई अन्य शहरों में पीएम10 भी चिंता का कारण बना हुआ है।

  • इसके विपरीत, ओडिशा के नयागढ़ में एक्यूआई महज 19 दर्ज किया गया। देश में साफ हवा वाले शहरों की संख्या में गिरावट और मध्यम प्रदूषण वाले शहरों की बढ़ती संख्या बताती है कि वायु गुणवत्ता में उतार-चढ़ाव के बीच प्रदूषण नियंत्रण की चुनौती लगातार गंभीर बनी हुई है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 27 अक्टूबर 2026 को देश में गुम्मिडीपूंडी सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 285 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (26 अक्टूबर) को गुम्मिडीपूंडी में सूचकांक 207 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 78 अंकों का भारी उछाल आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि गुम्मिडीपूंडी की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

गुम्मिडीपूंडी में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,800 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में नयागढ़ की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 19 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर गुम्मिडीपूंडी की तुलना नयागढ़ से करें तो वहां स्थिति 15 गुणा खराब है।

इससे पहले कल अगरतला में एक्यूआई 264 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 143 अंकों के भारी सुधार के साथ अगरतला में सूचकांक घटकर 121 पर पहुंच गया। मतलब कि सुधार के साथ वहां वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 174 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 197 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 23 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 06 सितम्बर को 55 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64  दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 117 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 122 दर्ज किया गया। मतबल की कल से वहां प्रदूषण में 5 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

प्रदूषण के बदलते समीकरण

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 27 अक्टूबर 2026 को 274 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 6.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 41.2 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 51.8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा चिंताजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 5 फीसदी की कमी आई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 3.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 12 फीसदी से अधिक का उछाल आया है, जोकि चिंता का विषय है। वहीं आज 12 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब दर्ज की गई, जबकि कल इन शहरों की गिनती 13 रिकॉर्ड की गई थी।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में पानीपत (274) दूसरे जबकि गजरौला (247) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह भिवाड़ी (244) चौथे स्थान पर है। फतेहपुर सीकरी (224) – बीकानेर (219) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

मानेसर (219) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में श्रीगंगानगर (212), बड़ौत (211) और हाजीपुर (209) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के तीन शहर (गजरौला, फतेहपुर सीकरी, बड़ौत) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि गुम्मिडीपूंडी, पानीपत, गजरौला, मानेसर, बड़ौत, हाजीपुर, जालंधर, मुजफ्फरनगर, बहादुरगढ़, दिल्ली, पुडुचेरी, मेरठ, हनुमानगढ़, बर्नीहाट (मेघालय), अंबाला, यमुनानगर, मथुरा, बागपत, खैरथल, गुरुग्राम, ग्वालियर, सिवान, नोएडा, अररिया, कटनी, कोटा, मंडी गोबिंदगढ़, वृंदावन, पटना, बद्दी, कैथल, चेन्नई, तालचेर, गाजियाबाद, कानपुर, बल्लभगढ़, आगरा, भावनगर, हापुड़, लखनऊ, धारूहेड़ा, मंडीखेड़ा, सागर, पुणे, बरेली, गया, जींद, लुधियाना, मुरादाबाद, सोनीपत, डूंगरपुर, गांधीनगर, रोहतक, वडोदरा, मोतिहारी, नागपुर, तिरुमाला, मेहसाणा और पूर्णिया आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं भिवाड़ी, फतेहपुर सीकरी, बीकानेर, श्रीगंगानगर, पीथमपुर, खोरा, मालेगांव, सतारा, बुलंदशहर, टोंक, जालौर, सासाराम, अहमदाबाद, झुंझुनू, उदयपुर, खुर्जा, सिरसा, भोपाल, वाराणसी, हिसार, महाड, जोधपुर, पिंपरी-चिंचवाड़, धुले, नागौर, बूंदी, चरखी दादरी, बारां, चित्तौड़गढ़, पाली, भरतपुर, नारनौल, सवाई माधोपुर, अमरावती (आंध्र प्रदेश), बेलापुर, सूरत, भीलवाड़ा, बिलीपाड़ा, फरीदाबाद, मंडीदीप, अगरतला, बेंगलुरु, देवास, मोदीनगर, वातवा, चंद्रपुर, जैसलमेर, भिवंडी, अहमदनगर, जबलपुर, धौलपुर, जलना, नासिक, राजकोट, सिरोही, नांदेड़, राजसमंद, सीकर, पटियाला, रामनगर, अमृतसर, पंचगांव, कुरुक्षेत्र, भिवानी, प्रयागराज, टेन्सा, अमरावती (महाराष्ट्र), रायचूर, अजमेर, छपरा, हावड़ा, प्रतापगढ़ और उल्हासनगर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 6.9 फीसदी यानी 19 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भिलाई, भुवनेश्वर, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, कटक, दमोह, करनाल, क्योंझर, कोप्पल, कोरबा, मदिकेरी, मिलुपारा, नयागढ़, पंचकूला, शिवमोगा, तिरुवनंतपुरम और विजयपुरा आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 113 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जलगांव, झांसी, जोरापोखर, कडप्पा, काकीनाडा, कल्याण, कन्नूर, करौली, कारवार, कटिहार, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, लेह, मैहर, मंगलौर, मंगुराहा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नवी मुंबई, नेल्लोर, ओंगोल, पलवल, पारादीप, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, रूपनगर, सहरसा, समस्तीपुर, सांगली, सतना, शामली, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिंगरौली, सीतामढ़ी, शिवसागर, सोलापुर, श्रीकाकुलम, श्रीनगर, सुआकाती, ठाणे आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 130 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्र प्रदेश), अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अररिया, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बागपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बारां, बरेली, बाड़मेर, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, बूंदी, बर्नीहाट (मेघालय), चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, छपरा, चित्तौड़गढ़, चूरू, दौसा, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, फरीदाबाद, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, गुरुग्राम, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हापुड़, हिंगोली, हिसार, हावड़ा, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जलना, जालौर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कैथल, कानपुर, कटनी, खैरथल, खोरा, खुर्जा, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, महाड, मालेगांव, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मथुरा, मेरठ, मेहसाणा, मोदीनगर, मुरादाबाद, मोतिहारी, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नारनौल, नासिक, नोएडा, पाली, पंचगांव, परभणी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायचूर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रोहतक, सागर, सासाराम, सतारा, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही, सिरसा, सिवान, सोनीपत, सूरत, तालचेर, टेन्सा, तिरुमाला, टोंक, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वाराणसी, वातवा, वृंदावन और यमुनानगर शामिल हैं।

इसी तरह बड़ौत, भिवाड़ी, बीकानेर, फतेहपुर सीकरी, गजरौला, गुम्मिडीपूंडी, हाजीपुर, जालंधर, मानेसर, मुजफ्फरनगर, पानीपत और श्रीगंगानगर में स्थिति खराब दर्ज की गई है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 274 में से 19 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 113 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 26 अक्टूबर को यह आंकड़ा 117 दर्ज किया गया था।

130 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज गुम्मिडीपूंडी में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 285 दर्ज किया गया, जोकि ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (26 अक्टूबर) को गुम्मिडीपूंडी में सूचकांक 207 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 78 अंकों का भारी उछाल आया है।

इससे पहले कल अगरतला में एक्यूआई 264 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 143 अंकों के भारी सुधार के साथ अगरतला में सूचकांक घटकर 121 पर पहुंच गया। मतलब कि सुधार के साथ वहां वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 174 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 197 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 23 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 117 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 122 दर्ज किया गया। मतबल की कल से वहां प्रदूषण में 5 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 27 अक्टूबर को भिवाड़ी (244) चौथे स्थान पर है, वहीं पानीपत (274) दूसरे, जबकि गजरौला (247) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 172, गाजियाबाद में 140, गुवाहाटी में 81, गुरूग्राम में 174, नोएडा में 164, ग्रेटर नोएडा में 82 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 99 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 129, चेन्नई में 143, चंडीगढ़ में 61, हैदराबाद में 71, जयपुर में 114 और पटना में 146 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 19 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में आइजोल, बेतिया, भिलाई, भुवनेश्वर, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, कटक, दमोह, करनाल, क्योंझर, कोप्पल, कोरबा, मदिकेरी, मिलुपारा, नयागढ़, पंचकूला, शिवमोगा, तिरुवनंतपुरम और विजयपुरा शामिल हैं।

वहीं अकोला, अंबरनाथ, अनंतपुर, अंगुल, अनपरा, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), बदलापुर, बागलकोट, बालासोर, बारबिल, बारीपाड़ा, बैरकपुर, बठिंडा, बीड, बेगूसराय, भागलपुर, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बक्सर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, कोयंबटूर, दरभंगा, देहरादून, धारवाड़, डोंबिवली, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फिरोजाबाद, गडग, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जलगांव, झांसी, जोरापोखर, कडप्पा, काकीनाडा, कल्याण, कन्नूर, करौली, कारवार, कटिहार, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, लेह, मैहर, मंगलौर, मंगुराहा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नवी मुंबई, नेल्लोर, ओंगोल, पलवल, पारादीप, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, रूपनगर, सहरसा, समस्तीपुर, सांगली, सतना, शामली, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिंगरौली, सीतामढ़ी, शिवसागर, सोलापुर, श्रीकाकुलम, श्रीनगर, सुआकाती, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुपति, तुमडीह, वापी, विजयवाड़ा, विरार और विशाखापत्तनम आदि 113 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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