

11 सितम्बर 2026 को देश के कई शहरों में हवा की गुणवत्ता में उतार-चढ़ाव के बीच मानेसर देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर सामने आया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक मानेसर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 258 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में है। एक दिन पहले यहां एक्यूआई 179 था, यानी महज 24 घंटे में प्रदूषण 79 अंक बढ़ गया।
खास चिंता की बात यह है कि मानेसर की हवा में पीएम2.5 का दबदबा है और प्रदूषण का स्तर डब्ल्यूएचओ की सुरक्षित सीमा से करीब 1,600 फीसदी अधिक दर्ज किया गया।
मानेसर के बाद पानीपत (251) और भिवाड़ी (209) सबसे प्रदूषित शहर रहे। देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में सात शहर हरियाणा से हैं, जो उत्तर भारत में बढ़ते वायु प्रदूषण की गंभीर तस्वीर दिखाता है।
हालांकि कुछ शहरों में राहत भी मिली। बुलंदशहर का एक्यूआई 277 से गिरकर 99 हो गया, जबकि दिल्ली में 134 से घटकर 127 और फरीदाबाद में 183 से 167 पर पहुंचा। इसके बावजूद दिल्ली की हवा ‘मध्यम’ श्रेणी में बनी हुई है।
सीपीसीबी के 242 शहरों के आंकड़ों के अनुसार 61 शहरों में हवा ‘बेहतर’, 140 में ‘संतोषजनक’ और 38 में ‘मध्यम’ रही, जबकि तीन शहरों में हवा ‘खराब’ दर्ज की गई। आंकड़े बताते हैं कि देश में प्रदूषण का संकट लगातार बदलते रूप में सामने आ रहा है—कहीं हवा में मामूली सुधार है, तो कहीं महज एक दिन में प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 11 सितम्बर 2026 को देश में मानेसर सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 258 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (10 सितम्बर) को मानेसर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 179 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण 79 अंकों का भारी इजाफा हुआ है, जोकि चिंता का विषय है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि मानेसर की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
मानेसर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,600 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में आइजोल की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 16 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर मानेसर की तुलना आइजोल से करें तो वहां स्थिति 16.1 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में बुलंदशहर की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 277 रिकॉर्ड किया गया। हालांकि आज 178 अंकों के भारी सुधार के साथ बुलंदशहर में सूचकांक घटकर 99 पर पहुंच गया। मतलब की वायु गुणवत्ता खराब से सीधे 'संतोषजनक' हो गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 134 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 127 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 7 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 07-11 सितम्बर को 63 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 183 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 167 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 16 अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज भी एक्यूआई मध्यम श्रेणी में बना हुआ है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 11 सितम्बर 2026 को 242 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 25.2 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 57.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 16.9 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 4.7 फीसदी की कमी आई है, जोकि चिंता का विषय है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 11.1 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 20.8 फीसदी की कमी आई है, जोकि राहत की खबर है। दूसरी तरफ खराब हवा वाले शहरों का आंकड़ा पांच से तीन हो गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में पानीपत (251) दूसरे जबकि भिवाड़ी (209) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह पंचगांव (179) चौथे स्थान पर है। ग्रेटर नोएडा (170) –फरीदाबाद (167) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
मंडी गोबिंदगढ़ (157) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में नोएडा (154), खैरथल (144) और खोरा (143) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के सात शहर (मानेसर, पानीपत, भिवाड़ी, पंचगांव, फरीदाबाद, खैरथल और खोरा) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि मानेसर, पानीपत, भिवाड़ी, पंचगांव, फरीदाबाद, खोरा, बर्नीहाट (मेघालय), गुरुग्राम, जींद, पीथमपुर, चरखी दादरी और मेरठ आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं ग्रेटर नोएडा, मंडी गोबिंदगढ़, नोएडा, खैरथल, अंबाला, बद्दी, दिल्ली, सवाई माधोपुर, अलवर, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, नारनौल, कैथल, छपरा, वातवा, गाजियाबाद, सिरसा, जयपुर, जोरापोखर, श्री गंगानगर, दौसा, फतेहाबाद, मंडीदीप, रोहतक, टोंक, चंद्रपुर, कुरुक्षेत्र और मथुरा आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 25.2 फीसदी यानी 61 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कोयंबटूर, डोंबिवली, फिरोजाबाद, गंगटोक, हाजीपुर, हल्दिया, हावड़ा, काकीनाडा, कलबुर्गी, कल्याण, करनाल, कारवार, क्योंझर, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, मदिकेरी, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नाहरलागुन, नंदेसरी, नयागढ़, पंचकुला, प्रयागराज, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, रामनगर, रतलाम, राउरकेला, सहरसा, सांगली, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, शिवसागर, श्रीनगर, त्रिशूर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 140 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, बागपत, बांसवाड़ा, बारां, बरेली, बाड़मेर, बठिंडा, बीड, बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलाईपाड़ा, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, देहरादून, देवास, धनबाद, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फतेहपुर सीकरी, गडग, गजरौला, गांधीनगर, गया, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हिंगोली, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, कानपुर, करौली, कटिहार, कटनी, खन्ना, खुर्जा, कोहिमा, कोटा, कुरनूल, मछलीपट्टनम, महाड, मालेगांव, मेहसाणा, मोदीनगर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुजफ्फरनगर, नागांव, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पाली, पारादीप, परभणी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़ आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 38 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अलवर, अंबाला, बद्दी, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बर्नीहाट (मेघालय), चंद्रपुर, चरखी दादरी, छपरा, दौसा, दिल्ली, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, हिसार, जयपुर, जींद, जोरापोखर, कैथल, खैरथल, खोरा, कुरुक्षेत्र, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मथुरा, मेरठ, नारनौल, नोएडा, पंचगांव, पीथमपुर, रोहतक, सवाई माधोपुर, सिरसा, श्री गंगानगर, टोंक और वातवा आदि शामिल हैं।
वहीं मानेसर (258), पानीपत (251) और भिवाड़ी (209) में स्थिति ‘खराब' है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 242 में से 61 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 140 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 10 सितम्बर को भी यह आंकड़ा 126 दर्ज किया गया था।
38 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज मानेसर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 258 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (10 सितम्बर) को मानेसर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 179 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण 79 अंकों का भारी इजाफा हुआ है, जोकि चिंता का विषय है।
इससे पहले कल देश में बुलंदशहर की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 277 रिकॉर्ड किया गया। हालांकि आज 178 अंकों के भारी सुधार के साथ बुलंदशहर में सूचकांक घटकर 99 पर पहुंच गया है। मतलब की वायु गुणवत्ता खराब से सीधे 'संतोषजनक' हो गई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 134 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 127 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 7 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 183 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 167 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 16 अंकों के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज भी एक्यूआई मध्यम श्रेणी में बना हुआ है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 11 सितम्बर को पंचगांव (179) चौथे स्थान पर है, वहीं पानीपत (251) दूसरे, जबकि भिवाड़ी (209) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 83, गाजियाबाद में 109, गुवाहाटी में 63, गुरूग्राम में 131, नोएडा में 154, ग्रेटर नोएडा में 170 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 47 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 43, चेन्नई में 95, चंडीगढ़ में 80, हैदराबाद में 62, जयपुर में 104 और पटना में 59 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 61 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में अहमदनगर, आइजोल, अकोला, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बारबिल, बारीपाड़ा, बैरकपुर, बेतिया, भिलाई, भिवंडी, बिलासपुर, बोइसर, चामराजनगर, छाल, कोयंबटूर, डोंबिवली, फिरोजाबाद, गंगटोक, हाजीपुर, हल्दिया, हावड़ा, काकीनाडा, कलबुर्गी, कल्याण, करनाल, कारवार, क्योंझर, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, मदिकेरी, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नाहरलागुन, नंदेसरी, नयागढ़, पंचकुला, प्रयागराज, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, रामनगर, रतलाम, राउरकेला, सहरसा, सांगली, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, शिवसागर, श्रीनगर, त्रिशूर, तुमडीह और उल्हासनगर शामिल हैं।
वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, बागपत, बांसवाड़ा, बारां, बरेली, बाड़मेर, बठिंडा, बीड, बेगूसराय, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलाईपाड़ा, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, देहरादून, देवास, धनबाद, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फतेहपुर सीकरी, गडग, गजरौला, गांधीनगर, गया, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हिंगोली, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, कानपुर, करौली, कटिहार, कटनी, खन्ना, खुर्जा, कोहिमा, कोटा, कुरनूल, मछलीपट्टनम, महाड, मालेगांव, मेहसाणा, मोदीनगर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुजफ्फरनगर, नागांव, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पाली, पारादीप, परभणी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, ऋषिकेश, रूपनगर, सागर, सतारा, सतना, शामली, सीकर, सिरोही, सोलापुर, सोनीपत, सूरत, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, तिरुमाला, तिरुपति, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार, विशाखापत्तनम, वृंदावन और यादगीर आदि 140 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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