धीमा जहर बनी हवा: श्री गंगानगर में बढ़कर 303 पर पहुंचा एक्यूआई, मेरठ-बेतिया में स्थिति खराब

दिल्ली में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 152 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 176 पर पहुंच गया।
हवा में घुले जहर से बचाने के लिए अपने बच्चे को मास्क पहनने में मदद करती मां; फोटो: आईस्टॉक
हवा में घुले जहर से बचाने के लिए अपने बच्चे को मास्क पहनने में मदद करती मां; फोटो: आईस्टॉक
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सारांश
  • सुबह घर से निकलते समय जो हवा सुकून देनी चाहिए, वही अब कई शहरों में धीरे-धीरे जहर बनती जा रही है। 16 मई को सरकारी आंकड़ों ने इसी डरावनी तस्वीर को उजागर किया।

  • राजस्थान का श्री गंगानगर देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा, जहां एक्यूआई 303 तक पहुंच गया। हैरानी की बात यह है कि सिर्फ 24 घंटों में यहां सूचकांक 194 से 303 पहुंच गया है, यानी इसमें 109 अंकों का उछाल आया है।

  • श्री गंगानगर की हवा में ओजोन का दबदबा है और प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 400 फीसदी ज्यादा दर्ज किया गया है। देश के सबसे साफ शहर मदिकेरी (एक्यूआई 25) की तुलना में श्री गंगानगर की हवा 12 गुणा ज्यादा जहरीली है।

  • इसी तरह मेरठ (267) और बेतिया (266) भी सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हैं।

  • दिल्ली में भी राहत नहीं—एक दिन में एक्यूआई 152 से बढ़कर 176 हो गया। कुल 243 शहरों के आंकड़ों में एक-तिहाई से ज्यादा शहरों की हवा चिंताजनक पाई गई। ऐसे में सवाल यही है कि क्या हम अब भी हवा को अदृश्य मानकर उसके जहर को नजरअंदाज करते रहेंगे?

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से सामने आया है कि 16 मई 2026 को देश में श्री गंगानगर की हवा सबसे ज्यादा खराब रही, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 303 तक पहुंच गया, जो बेहद खराब स्थिति को दिखाता है।

चौंकाने वाली बात यह है कि एक ही दिन में श्री गंगानगर का एक्यूआई 194 से बढ़कर 303 हो गया, यानी इसमें 109 अंकों का तेज उछाल आया है। एक दिन पहले तक ‘मध्यम’ श्रेणी में रहने वाले यह शहर अब सीधे ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गया है, जिससे साफ है कि हवा की गुणवत्ता अचानक तेजी से बिगड़ी है और लोगों की सांसों पर खतरा बढ़ गया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि श्री गंगानगर की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

श्री गंगानगर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 400 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 25 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर श्री गंगानगर की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 12 गुणा खराब है।

कल चूरू में स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 293 दर्ज किया गया। वहीं आज सूचकांक घटकर 214 पर पहुंच गया है। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण में 79 अंकों का सुधार हुआ है।

राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 152 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 176 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 24 अंकों का इजाफा दर्ज किया गया है। हालांकि दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।  

बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 05 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 86 पर पहुंच गया। वहीं 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को एक्यूआई 93 रिकॉर्ड किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है। फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 179 दर्ज किया गया। मतलब कि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 16 मई 2026 को 243 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 14.8 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 51.4 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 33.7 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 5.3 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 12.6 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से 11.3 फीसदी की कमी आई है। दूसरी तरफ खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में मेरठ (267) दूसरे जबकि बेतिया (266) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह ग्रेटर नोएडा चौथे स्थान पर है। भिवाड़ी-चरखी दादरी में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 248 और 244 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

बीकानेर (237) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गाजियाबाद (234), चूरू (214) और मानेसर (202) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के तीन शहर (श्री गंगानगर, बीकानेर और चूरू) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि बेतिया, भिवाड़ी, चरखी दादरी, गाजियाबाद, मानेसर, धारूहेड़ा, सहरसा, हाजीपुर, गुरुग्राम, बर्नीहाट (असम), फरीदाबाद, दिल्ली, चित्तूर, जयपुर, हापुड़, खन्ना, बल्लभगढ़, चंद्रपुर, नागपुर, बहादुरगढ़, गुम्मिडीपूंडी, राजकोट, जालंधर, यमुना नगर, कानपुर, लखनऊ, अंबाला, बेंगलुरु, वाराणसी, मुजफ्फरपुर, पंचकुला, किशनगंज आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं ग्रेटर नोएडा, बीकानेर, बुलंदशहर, नोएडा, सीकर, दौसा, पानीपत, सिंगरौली, हनुमानगढ़, जैसलमेर, झुंझुनू, कुरुक्षेत्र, बागपत, मेहसाणा, नागौर, फतेहाबाद, मंडीदीप, भीलवाड़ा, पटना, अलवर, टोंक, बेगूसराय, जोरापोखर, सोनीपत, नांदेड़, बांसवाड़ा, बिलीपाड़ा, वातवा, यादगीर, बारबिल, अमृतसर, पीथमपुर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 14.8 फीसदी यानी 36 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बिहार शरीफ, चामराजनगर, चेन्नई, चिक्कमगलुरु, गडग, गंगटोक, गुवाहाटी, हल्दिया, कलबुर्गी, कोहिमा, कोलकाता, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, मुंबई, नाहरलागुन, नासिक, राजमहेंद्रवरम, ऋषिकेश, रूपनगर, शिवमोगा, सिलचर, शिवसागर, श्रीनगर, सूरत, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, उल्हासनगर, विरार आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 125 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुंटूर, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालोर, झालावाड़, झांसी, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कन्नूर, करनाल, काशीपुर, कटनी, खुर्जा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाड, मैहर, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मैसूर, नागांव, नलबाड़ी, नंदेसरी, नारनौल, नवी मुंबई, नयागढ़, नेल्लोर, पाली, परभणी, पटियाला, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, सांगली, सतना, सिलीगुड़ी, सिरोही, सिरसा, सोलापुर, सुआकाती, तालचेर, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 71 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें आगरा, अलवर, अंबाला, अमृतसर, बद्दी, बागपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बेगूसराय, बेंगलुरु, भरतपुर, भिलाई, भीलवाड़ा, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चित्तूर, दौसा, दिल्ली, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, झुंझुनू, जींद, जोरापोखर, कल्याण, कानपुर, करौली, कटिहार, खन्ना, किशनगंज, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, मंडीदीप, मेहसाणा, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नोएडा, पंचकुला, पानीपत, पटना, पीथमपुर, राजकोट, सागर, सहरसा, सासाराम, सवाई माधोपुर, सीकर, सिंगरौली, सोनीपत, टोंक, वाराणसी, वातवा, यादगीर, यमुना नगर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश में बेतिया, भिवाड़ी, बीकानेर, चरखी दादरी, चूरू, धारूहेड़ा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, मानेसर, मेरठ में स्थिति ‘खराब’ है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 243 में से 36 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 125 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 15 मई को यह आंकड़ा 111 दर्ज किया गया था।

71 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज श्री गंगानगर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 303 दर्ज किया गया। इससे पहले कल श्री गंगानगर में सूचकांक 194 रिकॉर्ड किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में 109 अंकों का भारी इजाफा हुआ है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता मध्यम से ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है।

वहीं कल चूरू में स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 293 दर्ज किया गया। वहीं आज सूचकांक घटकर 214 पर पहुंच गया है। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण में 79 अंकों का सुधार हुआ है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 152 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 176 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 24 अंकों का इजाफा दर्ज किया गया है। हालांकि दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।   

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है। फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 179 दर्ज किया गया। मतलब कि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 16 मई को ग्रेटर नोएडा चौथे स्थान पर है, वहीं मेरठ (267) दूसरे, जबकि बेतिया (266) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 144, गाजियाबाद में 234, गुवाहाटी में 46, गुरूग्राम में 183, नोएडा में 192, ग्रेटर नोएडा में 264 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 47 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 114, चेन्नई में 48, चंडीगढ़ में 70, हैदराबाद में 91, जयपुर में 161 और पटना में 115 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 36 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबरनाथ, आरा, बागलकोट, बालासोर, बैरकपुर, बिहार शरीफ, चामराजनगर, चेन्नई, चिक्कमगलुरु, गडग, गंगटोक, गुवाहाटी, हल्दिया, कलबुर्गी, कोहिमा, कोलकाता, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, मुंबई, नाहरलागुन, नासिक, राजमहेंद्रवरम, ऋषिकेश, रूपनगर, शिवमोगा, सिलचर, शिवसागर, श्रीनगर, सूरत, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, उल्हासनगर, विरार, विशाखापत्तनम शामिल हैं।

वहीं अगरतला, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बठिंडा, बेलापुर, भागलपुर, भावनगर, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बक्सर, ब्यासनगर, चंडीगढ़, छाल, चिक्काबल्लापुर, चित्तौड़गढ़, कोयंबटूर, कुड्डालोर, कटक, दमोह, देहरादून, देवास, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुंटूर, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालोर, झालावाड़, झांसी, जोधपुर, कडप्पा, कैथल, कन्नूर, करनाल, काशीपुर, कटनी, खुर्जा, कोल्हापुर, कोल्लम, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाड, मैहर, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंगेर, मैसूर, नागांव, नलबाड़ी, नंदेसरी, नारनौल, नवी मुंबई, नयागढ़, नेल्लोर, पाली, परभणी, पटियाला, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, सांगली, सतना, सिलीगुड़ी, सिरोही, सिरसा, सोलापुर, सुआकाती, तालचेर, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमकुरु, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, वापी, विजयवाड़ा, वृंदावन आदि 125 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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