

21 अप्रैल 2026 को देश में वायु प्रदूषण का बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जिसमें ओजोन प्रदूषण के कारण ओडिशा का अंगुल 301 एक्यूआई के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया। पिछले 24 घंटों में यहां प्रदूषण में 70 अंकों की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे स्थिति ‘खराब’ से ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है और यह स्तर डब्ल्यूएचओ की सुरक्षित सीमा से करीब 400 फीसदी अधिक है।
इसके विपरीत, तमिलनाडु का रामनाथपुरम 23 एक्यूआई के साथ देश का सबसे साफ शहर रहा, जिससे दोनों शहरों के बीच वायु गुणवत्ता में 13 गुणा का भारी अंतर सामने आया।
देशभर में कुल 248 शहरों के विश्लेषण में केवल 8.9 फीसदी शहरों में हवा ‘बेहतर’ पाई गई, जबकि 41.5 फीसदी शहरों में स्थिति चिंताजनक रही। अधिकांश शहर ‘संतोषजनक’ और ‘मध्यम’ श्रेणी में बने हुए हैं, लेकिन मध्यम प्रदूषण वाले शहरों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो बढ़ते जोखिम का संकेत है।
एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में भी स्थिति मिली-जुली रही। बल्लभगढ़, हाजीपुर, गाजियाबाद, मेरठ और हापुड़ जैसे शहर देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे, जबकि दिल्ली और फरीदाबाद में हल्का सुधार देखा गया, लेकिन दोनों शहरों में वायु गुणवत्ता अभी भी मध्यम श्रेणी में हैं।
विशेष रूप से, कई शहरों में पीएम2.5 और पीएम10 कणों के साथ-साथ ओजोन और कार्बन प्रदूषण हवा को और अधिक जहरीला बना रहे हैं। हालांकि कुछ शहरों में हल्की राहत और सुधार के संकेत जरूर दिखे हैं, लेकिन कुल मिलाकर देश के बड़े हिस्से में वायु गुणवत्ता अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 21 अप्रैल 2026 को देश में अंगुल सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 301 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल अंगुल में वायु गुणवत्ता सूचकांक 231 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 70 अंकों का भारी उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि अंगुल की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। अंगुल में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 400 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में रामनाथपुरम की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 23 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर अंगुल की तुलना रामनाथपुरम से करें तो वहां स्थिति 13 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में मंडी गोबिंदगढ़ की स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 350 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज 148 से ज्यादा अंकों के सुधार के साथ इस शहर में सूचकांक 202 पर बना हुआ है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 181 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 177 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 4 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 93 पर पहुंच गया था। इसके बाद 01 अप्रैल को सूचकांक 113 दर्ज क्या गया। वहीं आज सूचकांक 114 रिकॉर्ड किया गया है। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 172 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 130 दर्ज किया गया। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 21 अप्रैल 2026 को 248 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 8.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 49.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 41.5 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में आठ फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 15.4 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया है। इसी तरफ खराब हवा वाले शहरों की गिनती में करीब 7.7 फीसदी की कमी आई है, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बल्लभगढ़ (284) दूसरे जबकि हाजीपुर (251) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह चरखी दादरी (249) चौथे स्थान पर है। बागपत-गाजियाबाद में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 245 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
मेरठ (236) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में रोहतक (236), हापुड़ (235) और बद्दी (222) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तरप्रदेश के चार शहर (बागपत, गाजियाबाद, मेरठ, हापुड) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि हाजीपुर, चरखी दादरी, गाजियाबाद, रोहतक, तिरुपति, जींद, सुआकाती, मानेसर, यमुना नगर, भिवाड़ी, बहादुरगढ़, कल्याण, नंदेसरी, बेगूसराय, मोतिहारी, पंचगांव, नारनौल, गया, पलवल, वडोदरा, धारूहेड़ा, आरा, बर्नीहाट (असम), करनाल आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं बल्लभगढ़, बागपत, मेरठ, हापुड़, बद्दी, ग्रेटर नोएडा, मंडी गोबिंदगढ़, बुलंदशहर, पटना, कुरुक्षेत्र, पानीपत, नोएडा, दिल्ली, गुरुग्राम, मुजफ्फरनगर, बठिंडा, भागलपुर, मेहसाणा, सीकर, सहरसा, सिंगरौली, खुर्जा, भावनगर, जयपुर, लखनऊ, हनुमानगढ़, फरीदाबाद, टोंक, आगरा, नांदेड़, सोनीपत, वातवा, बारां, गांधीनगर, गोरखपुर, जैसलमेर, झुंझुनू, ठाणे, विशाखापत्तनम, परभनी, नयागढ़, नागौर, पाली, सिवान, पीथमपुर, धुले, कैथल आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 8.9 फीसदी यानी महज 22 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में देहरादून, गुवाहाटी, कलबुर्गी, कोप्पल, मछलीपट्टनम, मदिकेरी, मंगलौर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नेल्लोर, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, रामनाथपुरम शामिल हैं।
इसी तरह देश के 123 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बेंगलुरु, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बक्सर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कोयंबटूर, कटक, दमोह, दौसा, देवास, धारवाड़, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गंगटोक, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, झालावाड़, झांसी, जोधपुर, कडप्पा, कन्नूर, कानपुर, करौली, क्योंझर, खन्ना, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कोटा, लातूर, लुधियाना, मंडीखेड़ा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, नागांव, नागपुर, नासिक, नवी मुंबई, ऊटी, पंपोर, पंचकुला, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 90 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अमृतसर, आरा, औरंगाबाद (बिहार), बहादुरगढ़, बालासोर, बारां, बारबिल, बठिंडा, बेगूसराय, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भोपाल, बुलंदशहर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चूरू, दिल्ली, धारूहेड़ा, धुले, फरीदाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुरुग्राम, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हिसार, जयपुर, जैसलमेर, झुंझुनू, जींद, जोरापोखर, कैथल, कल्याण, करनाल, कटनी, खुर्जा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, महाड, मालेगांव, मंडीदीप, मानेसर, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागौर, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नयागढ़, नोएडा, पाली, पलवल, पंचगांव, पानीपत, परभनी, पटियाला, पटना, पीथमपुर, प्रतापगढ़, सागर, सहरसा, सवाई माधोपुर, सीकर, सिंगरौली, सिरसा, सिवान, सोनीपत, श्री गंगानगर, सुआकाती, ठाणे, टोंक, उदयपुर, वडोदरा, वातवा, विशाखापत्तनम, यमुना नगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में बद्दी, बागपत, बल्लभगढ़, चरखी दादरी, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, हाजीपुर, हापुड़, मंडी गोबिंदगढ़, मेरठ, रोहतक, तिरुपति में स्थिति ‘खराब’ है। वहीं अंगुल (301) में स्थिति बेहद खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 248 में से महज 22 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 123 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 20 अप्रैल को यह आंकड़ा 123 दर्ज किया गया था।
90 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज अंगुल में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 301 दर्ज किया गया। गौरतलब है कि कल अंगुल में वायु गुणवत्ता सूचकांक 231 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 70 अंकों का भारी उछाल आया है। यहां वायु गुणवत्ता खराब से बेहद खराब हो गई है।
इससे पहले कल देश में मंडी गोबिंदगढ़ की स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 350 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज 148 अंकों के सुधार के साथ वहां सूचकांक 202 पर पहुंच गया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 181 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 177 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 4 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली की तरह फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 172 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 130 दर्ज किया गया। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 21 अप्रैल को चरखी दादरी चौथे स्थान पर है, वहीं बल्लभगढ़ (284) दूसरे, जबकि हाजीपुर (251) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 130, गाजियाबाद में 245, गुवाहाटी में 41, गुरूग्राम में 175, नोएडा में 178, ग्रेटर नोएडा में 214 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 91 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 136, चेन्नई में 53, चंडीगढ़ में 80, हैदराबाद में 79, जयपुर में 136 और पटना में 190 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 22 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अंबाला, बेतिया, भिलाई, भिवानी, देहरादून, गुवाहाटी, कलबुर्गी, कोप्पल, मछलीपट्टनम, मदिकेरी, मंगलौर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नेल्लोर, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, रामनाथपुरम, रूपनगर, सिलचर, शिवसागर, तिरुवनंतपुरम, विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं अगरतला, अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अमरावती (आंधप्रदेश), अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अनंतपुर, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागलकोट, बांसवाड़ा, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बेलगाम, बेंगलुरु, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बक्सर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कोयंबटूर, कटक, दमोह, दौसा, देवास, धारवाड़, धौलपुर, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गंगटोक, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, झालावाड़, झांसी, जोधपुर, कडप्पा, कन्नूर, कानपुर, करौली, क्योंझर, खन्ना, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कोटा, लातूर, लुधियाना, मंडीखेड़ा, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुंगेर, नागांव, नागपुर, नासिक, नवी मुंबई, ऊटी, पंपोर, पंचकुला, पेरुंदुरई, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सांगली, सासाराम, सतना, शिलांग, शिवमोगा, सिलीगुड़ी, सिरोही, सोलापुर, श्रीनगर, सूरत, तालचेर, टेन्सा, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तुमडीह, उज्जैन, उल्हासनगर, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन, यादगीर आदि 123 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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