

विश्लेषण के मुताबिक 10 मार्च 2026 को देश में ग्रेटर नोएडा सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 340 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल ग्रेटर नोएडा में एक्यूआई 260 रिकॉर्ड किया गया था। मतलब कि कल से सूचकांक में 80 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।
रुझानों में सामने आया है कि ग्रेटर नोएडा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
ग्रेटर नोएडा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 600 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 26 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर ग्रेटर नोएडा की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 13 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में सिंगरौली की हवा सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 335 दर्ज किया गया। हालांकि आज पांच अंकों के सुधार के साथ सूचकांक 330 पर पहुंच गया है। लेकिन चिंता की बात है कि सिंगरौली में वायु गुणवत्ता अभी भी बेहद खराब बनी हुई है।
राजधानी दिल्ली की बात करें तो कल से प्रदूषण में उछाल आया है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 209 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 265 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 56 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 480 फीसदी अधिक खराब है।
इसी तरफ फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा आया है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 208 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 224 पर पहुंच गया। इसका मतलब कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता अभी भी खराब श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 10 मार्च 2026 को 243 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 2.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 35.4 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 61.7 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा चिंताजनक बनी हुई है।
बता दें कल से देश में साफ और संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस बनी हुई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 0.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह खराब गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से करीब 42.9 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में सिंगरौली (330) दूसरे जबकि गाजियाबाद (329) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 307 अंकों के साथ गुरुग्राम चौथे स्थान पर है। यमुना नगर-नोएडा में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 302 और 288 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
मंडीदीप (275) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में किशनगंज (272), मानेसर (268) और दिल्ली (265) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश (ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, नोएडा) और हरियाणा (गुरुग्राम, यमुनानगर, मानेसर) के तीन-तीन शहर शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि सिंगरौली, गाजियाबाद, गुरुग्राम, यमुना नगर, मंडीदीप, किशनगंज, मानेसर, बागपत, भिवाड़ी, मुजफ्फरनगर, हापुड़, बहादुरगढ़, दमोह, धारूहेड़ा, पानीपत, बर्नीहाट, बल्लभगढ़, करनाल, नंदेसरी, काशीपुर, बुलंदशहर, अगरतला, अंबाला, बारबिल, महाड, पंचगांव, नाहरलागुन, बद्दी, सहरसा, जींद, कानपुर, बिलीपाड़ा, खुर्जा, नलबाड़ी, सांगली, भिवानी, वातवा, चित्तौड़गढ़, अंकलेश्वर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं ग्रेटर नोएडा, नोएडा, दिल्ली, आगरा, मेरठ, फरीदाबाद, सीकर, चंद्रपुर, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, भिवंडी, जालोर, उल्हासनगर, जयपुर, ग्वालियर, कुंजेमुरा, सिलीगुड़ी, गया, कटनी, जालंधर, कोटा, विरार, छपरा, नवी मुंबई, हनुमानगढ़, मुरादाबाद, बदलापुर, सूरत, नागौर, टोंक, फतेहाबाद, झालावाड़, जोधपुर, कोरबा, विशाखापत्तनम, पटना, पुणे, नारनौल, अहमदनगर, भीलवाड़ा, गांधीनगर, हिसार, क्योंझर, मंगुराहा, पटियाला, झुंझुनू, रायबरेली, तुमडीह, अहमदाबाद, धौलपुर, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, हाजीपुर, पाली, वृंदावन, चूरू, बेलापुर, भोपाल, जैसलमेर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के तीन फीसदी यानी महज 7 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में आइजोल, बागलकोट, भिलाई, कोहिमा, मदिकेरी, शिलांग, श्रीनगर आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 86 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें हैदराबाद, जबलपुर, जलगांव, जलना, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, कटिहार, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, लातूर, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मंगलौर, मीरा-भायंदर, मुंगेर, मैसूर, नांदेड़, नयागढ़, पलवल, पंचकुला, परभनी, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सुआकाती, तालचेर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, वडोदरा, विजयपुरा, विजयवाड़ा आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 125 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में अगरतला, अहमदाबाद, अहमदनगर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अंकलेश्वर, आरा, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बालासोर, बारां, बारबिल, बारीपदा, बाड़मेर, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, बीकानेर, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, बक्सर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चरखी दादरी, छाल, छपरा, चित्तौड़गढ़, चूरू, कोयंबटूर, देवास, धौलपुर, धुले, फतेहाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हिसार, इंदौर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कैथल, कन्नूर, कानपुर, करौली, काशीपुर, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, महाड, मालेगांव, मंगुराहा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नंदेसरी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, पाली, पंचगांव, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, रायबरेली, ऋषिकेश, राउरकेला, रूपनगर, सागर, सहरसा, सांगली, सासाराम, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सोलापुर, सूरत, ठाणे, टोंक, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वापी, वाराणसी, वातवा, विरार, विशाखापत्तनम, वृंदावन शामिल हैं।
आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 20 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में आगरा, बागपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, भिवाड़ी, बर्नीहाट, दमोह, दिल्ली, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, हापुड़, करनाल, किशनगंज, मंडीदीप, मानेसर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, नोएडा, पानीपत, श्री गंगानगर शामिल हैं।
वहीं ग्रेटर नोएडा, सिंगरौली, गाजियाबाद, गुरुग्राम, यमुना नगर में स्थिति बेहद खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 243 में से महज सात शहरों में हवा 'बेहतर' है। 86 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 09 मार्च को यह आंकड़ा 86 दर्ज किया गया था।
125 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज भी ग्रेटर नोएडा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 340 पर पहुंच गया। वहीं कल ग्रेटर नोएडा में एक्यूआई 260 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से सूचकांक में 80 अंकों का इजाफा हुआ है।
इससे पहले कल सिंगरौली में स्थिति सबसे ज्यादा खराब रिकॉर्ड की गई थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 335 तक पहुंच गया। वहीं आज सिंगरौली में एक्यूआई 330 दर्ज किया गया। मतलब कि कल से सूचकांक में पांच अंकों का सुधार आया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 209 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 265 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 56 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चिंता की बात यह है कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता अभी भी मानकों से 450 फीसदी अधिक खराब है।
इसी तरफ फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 208 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 224 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज भी खराब बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 10 मार्च को गुरुग्राम चौथे स्थान पर है, वहीं सिंगरौली (330) दूसरे, जबकि गाजियाबाद (329) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 153, गाजियाबाद में 329, गुवाहाटी में 133, गुरूग्राम में 307, नोएडा में 288, ग्रेटर नोएडा में 340 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 125 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 182, चेन्नई में 86, चंडीगढ़ में 134, हैदराबाद में 80, जयपुर में 155 और पटना में 128 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन सात शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, बागलकोट, भिलाई, कोहिमा, मदिकेरी, शिलांग, श्रीनगर शामिल हैं।
वहीं अजमेर, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अररिया, आसनसोल, बांसवाड़ा, बरेली, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेतिया, भागलपुर, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्यासनगर, चामराजनगर, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, कटक, दौसा, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, फिरोजाबाद, गंगटोक, हल्दिया, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जलगांव, जलना, झांसी, कडप्पा, कलबुर्गी, कल्याण, कटिहार, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, लातूर, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मंगलौर, मीरा-भायंदर, मुंगेर, मैसूर, नांदेड़, नयागढ़, पलवल, पंचकुला, परभनी, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, सतना, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, शिवसागर, सिवान, सुआकाती, तालचेर, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, वडोदरा, विजयपुरा, विजयवाड़ा, यादगीर आदि 86 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
कल देश में वायु गुणवत्ता की स्थिति कैसी थी इसकी जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर के पिछले अंक से प्राप्त कर सकते हैं:
सिंगरौली में बढ़ते प्रदूषण से राहत नहीं, 335 एक्यूआई, दिल्ली-फरीदाबाद में आया सुधार