

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 14 अप्रैल 2026 को मध्य प्रदेश का मंडीदीप देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा, जहां एक्यूआई 284 दर्ज किया गया।
इस दौरान वहां हवा में पीएम2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 1,750 फीसदी अधिक रहा, जबकि पुदुचेरी सबसे साफ शहर रहा।
देश के 253 शहरों में से महज 16 में ही हवा साफ दर्ज की गई, वहीं करीब आधे शहरों की वायु गुणवत्ता चिंताजनक रही। इस बीच दिल्ली का प्रदूषण भी 24 घंटों में 30 अंक बढ़कर 179 पर पहुंच गया, जो बड़े शहरों में बिगड़ते वायु संकट की ओर इशारा करता है।
वहीं दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 159 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 151 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 14 अप्रैल 2026 को देश में मंडीदीप सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 284 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि इससे पहले 13 अप्रैल को सरकारी आंकड़ों में मध्य प्रदेश के इस शहर का जिक्र नहीं था।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि मंडीदीप की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। मंडीदीप में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,750 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में पुदुचेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 19 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर मंडीदीप की तुलना पुदुचेरी से करें तो वहां स्थिति 14.9 गुणा खराब है।
इससे पहले कल (13 अप्रैल 2026) देश में हाजीपुर की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 238 तक पहुंच गया था। हालांकि आज सरकारी आंकड़ों में हाजीपुर का जिक्र नहीं है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 149 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 179 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 30 अंकों का उछाल दर्ज किया गया है।
बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 93 पर पहुंच गया था। इसके बाद 01 अप्रैल को सूचकांक 113 दर्ज क्या गया। वहीं आज सूचकांक 114 रिकॉर्ड किया गया है। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 159 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 151 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 14 अप्रैल 2026 को 253 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 6.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 46.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 47 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा चिंताजनक है।
बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 27 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 9.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 1.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी तरफ खराब हवा वाले शहरों की गिनती में करीब 129 फीसदी का उछाल आया है, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में सवाई माधोपुर (272) दूसरे जबकि खोरा (251) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह मोदीनगर (242) चौथे स्थान पर है। बिलीपाड़ा-सिंगरौली में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 233 और 232 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
भिवाड़ी (230) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में मंगुराहा (230), चरखी दादरी (229) और बागपत (227) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तरप्रदेश के तीन शहर (खोरा, मोदीनगर, बागपत) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि मंडीदीप, खोरा, मोदीनगर, मंगुराहा, चरखी दादरी, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, देवास, यमुना नगर, गुरुग्राम, मानेसर, चंद्रपुर, दिल्ली, समस्तीपुर, नारनौल, सोनीपत, फरीदाबाद, अररिया, गया, इंदौर, चित्तौड़गढ़, वातवा, बर्नीहाट (मेघालय), धारूहेड़ा, मंडी गोबिंदगढ़, गांधीनगर, मुजफ्फरपुर, नंदेसरी, मोतिहारी, बर्नीहाट (असम), दौसा, यादगीर, चूरू आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं बिलीपाड़ा, सिंगरौली, भिवाड़ी, बागपत, बल्लभगढ़, नयागढ़, बुलंदशहर, बारबिल, हापुड़, करौली, पीथमपुर, पानीपत, बीकानेर, कुरुक्षेत्र, नागपुर, कटनी, भीलवाड़ा, झुंझुनू, नागौर, रतलाम, क्योंझर, लखनऊ, पाली, सीकर, बेलापुर, जयपुर, ठाणे, जोरापोखर, जोधपुर, खुर्जा, मेहसाणा, झालावाड़, प्रतापगढ़, बूंदी, सोलापुर, भोपाल, अहमदाबाद, रायपुर, भावनगर, बदलापुर, भागलपुर, सहरसा, अमरावती (महाराष्ट्र), ब्रजराजनगर, अंकलेश्वर, हनुमानगढ़, जलगांव, अजमेर, कानपुर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 6.3 फीसदी यानी महज 16 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में गुवाहाटी, मदिकेरी, नागांव, नलबाड़ी, नेल्लोर, पंपोर, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, ऋषिकेश, रोहतक, रूपनगर, विजयपुरा शामिल हैं।
इसी तरह देश के 118 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें अंबाला, अंबरनाथ, अमृतसर, अनंतपुर, आरा, औरंगाबाद, बागलकोट, बहादुरगढ़, बालासोर, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बीड, बेगूसराय, बेंगलुरु, भिलाई, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, बक्सर, ब्यासनगर, चामराजनगर, चंडीगढ़, छपरा, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, कोयंबटूर, कटक, धारवाड़, धौलपुर, डोंबिवली, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गोरखपुर, गुंटूर, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जालंधर, जलना, जालोर, झांसी, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, करनाल, कटिहार, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 103 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आसनसोल, औरंगाबाद, बद्दी, बदलापुर, बारां, बारबिल, बेलापुर, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भोपाल, बीकानेर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), बर्नीहाट (मेघालय), चंद्रपुर, चित्तौड़गढ़, चूरू, दमोह, दौसा, दिल्ली, देवास, धनबाद, धारूहेड़ा, धुले, फरीदाबाद, गांधीनगर, गया, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, इंदौर, जयपुर, जलगांव, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कानपुर, करौली, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, मेरठ, मेहसाणा, मिलुपारा, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नोएडा, पाली, पानीपत, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, रायपुर, रतलाम, सागर, सहरसा, समस्तीपुर, सीकर, सोलापुर, सोनीपत, सुआकाती, तालचेर, ठाणे, तिरुपुर, टोंक, उदयपुर, वाराणसी, वातवा, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यादगीर, यमुना नगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में बागपत, बल्लभगढ़, भिवाड़ी, बिलीपाड़ा, चरखी दादरी, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, हिंगोली, खोरा, मंडीदीप, मंगुराहा, मोदीनगर, नयागढ़, सवाई माधोपुर, सिंगरौली, श्री गंगानगर में स्थिति खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 253 में से महज 16 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 118 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 13 अप्रैल को यह आंकड़ा 108 दर्ज किया गया था।
103 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज मंडीदीप में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 284 दर्ज किया गया। गौरतलब है कि कल सरकारी आंकड़ों में मंडीदीप का जिक्र नहीं था।
इससे पहले कल देश में हाजीपुर की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 238 तक पहुंच गया था। हालांकि आज सरकारी आंकड़ों में हाजीपुर का जिक्र नहीं है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 149 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 179 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 30 अंकों का उछाल दर्ज किया गया है।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 159 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 151 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वायु गुणवत्ता आज भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 14 अप्रैल को मोदीनगर चौथे स्थान पर है, वहीं सवाई माधोपुर (272) दूसरे, जबकि खोरा (251) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 160, गाजियाबाद में 203, गुवाहाटी में 46, गुरूग्राम में 197, नोएडा में 157, ग्रेटर नोएडा में 222 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 102 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 129, चेन्नई में 40, चंडीगढ़ में 70, हैदराबाद में 78, जयपुर में 127 और पटना में 136 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 16 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें बेतिया, भिवानी, चेन्नई, गुवाहाटी, मदिकेरी, नागांव, नलबाड़ी, नेल्लोर, पंपोर, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, ऋषिकेश, रोहतक, रूपनगर, विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं आइजोल, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अंबरनाथ, अमृतसर, अनंतपुर, आरा, औरंगाबाद, बागलकोट, बहादुरगढ़, बालासोर, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बीड, बेगूसराय, बेंगलुरु, भिलाई, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, बक्सर, ब्यासनगर, चामराजनगर, चंडीगढ़, छपरा, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, कोयंबटूर, कटक, धारवाड़, धौलपुर, डोंबिवली, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, गोरखपुर, गुंटूर, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जालंधर, जलना, जालोर, झांसी, कडप्पा, कैथल, कलबुर्गी, कल्याण, कन्नूर, करनाल, कटिहार, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाड, मंडीखेड़ा, मंगलौर, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंगेर, मैसूर, नाहरलागुन, नासिक, नवी मुंबई, ऊटी, पलवल, पंचगांव, पंचकुला, परभनी, पटियाला, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, राउरकेला, सांगली, सासाराम, सतना, शिलांग, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, सिरसा, शिवसागर, सूरत, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उल्हासनगर, वडोदरा, वापी, विजयवाड़ा आदि 118 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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