धरती के ‘अदृश्य इंजीनियर’ हैं जंगली जानवर, प्राकृतिक परिदृश्य को 136% तक बदलने की है ताकत

जानवरों की रोजमर्रा की गतिविधियां जैसे बिल बनाना, भोजन ढूंढना और आश्रय तैयार करना मिट्टी और रेत को इधर-उधर करने से प्राकृतिक परिदृश्य बदलता है।
जानवरों का बिल बनाना, नदी तल हिलाना और भोजन ढूंढना जैसी रोजमर्रा की गतिविधियां धीरे-धीरे पूरे परिदृश्य को आकार देती हैं।
जानवरों का बिल बनाना, नदी तल हिलाना और भोजन ढूंढना जैसी रोजमर्रा की गतिविधियां धीरे-धीरे पूरे परिदृश्य को आकार देती हैं।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • जंगली जानवर केवल पर्यावरण में रहने वाले जीव नहीं, बल्कि मिट्टी और रेत को स्थानांतरित कर भूमि बदलते हैं।

  • जानवरों की गतिविधियां मीठे पानी और भूमि दोनों में भू-आकृतिक प्रक्रियाओं को बड़े पैमाने पर प्रभावित करती हैं।

  • जानवरों की गतिविधियों से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और बारीक कण कम होने से पानी का बहाव बदलता है।

  • बिल बनाना, नदी तल हिलाना और भोजन ढूंढना जैसी रोजमर्रा की गतिविधियां धीरे-धीरे पूरे परिदृश्य को आकार देती हैं।

  • जानवरों का प्रभाव लंबे समय में भूमि विकास और प्राकृतिक प्रक्रियाओं पर स्थायी बदलाव ला सकता है।

जंगली जानवर केवल जंगलों में रहने वाले जीव नहीं हैं, बल्कि वे पृथ्वी के प्राकृतिक स्वरूप को बदलने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों जैसे बिल बनाना, खाना ढूंढना और आश्रय बनाना के जरिए मिट्टी और रेत को इधर-उधर करते रहते हैं। इस तरह वे धीरे-धीरे पूरे वातावरण पर असर डालते हैं।

अर्थ सरफेस नामक पत्रिका में प्रकाशित एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में वैज्ञानिकों ने 64 अलग-अलग शोधों का विश्लेषण किया। इसमें 61 प्रकार के जंगली जानवरों को शामिल किया गया, जो जमीन और पानी दोनों में रहते हैं। इस अध्ययन का उद्देश्य यह समझना था कि जानवर किस तरह से धरती और जल के स्वरूप को बदलते हैं।

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जानवरों का बिल बनाना, नदी तल हिलाना और भोजन ढूंढना जैसी रोजमर्रा की गतिविधियां धीरे-धीरे पूरे परिदृश्य को आकार देती हैं।

क्या कहते हैं शोध के निष्कर्ष

शोध में पाया गया कि जानवरों की गतिविधियों का प्रभाव बहुत बड़ा होता है। मीठे या ताजे पानी वाले क्षेत्रों में, जैसे नदियां और झीलें, जानवरों ने भू-आकृतिक प्रक्रियाओं को लगभग 136 प्रतिशत तक प्रभावित किया। वहीं जमीन पर रहने वाले जानवरों ने इन प्रक्रियाओं में लगभग 66 प्रतिशत बदलाव किया। इसका मतलब है कि जानवर मिट्टी और रेत के बहाव और जमाव को काफी हद तक बदल देते हैं।

जानवर कैसे बदलते हैं भूमि?

जानवर कई तरीकों से वातावरण पर अपना असर डालते हैं। जब वे जमीन में बिल बनाते हैं, तो मिट्टी एक जगह से दूसरी जगह चली जाती है। कुछ जानवर नदी के तल को हिलाते हैं, जिससे पानी का बहाव बदल सकता है। इसके अलावा जब जानवर अपना घर बनाते हैं या भोजन की तलाश करते हैं, तो वे जमीन की ऊपरी परत को बदल देते हैं। इन सभी गतिविधियों का असर धीरे-धीरे पूरे क्षेत्र पर पड़ता है।

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मिट्टी और पानी पर असर

शोध में यह भी पाया गया कि जानवरों की गतिविधियों से मिट्टी की संरचना बदल जाती है। मिट्टी में छोटे-छोटे छेद बढ़ जाते हैं, जिससे पानी आसानी से अंदर जा सकता है। इसे मिट्टी की छिद्रता बढ़ना कहा जाता है। इसके साथ ही, मिट्टी में मौजूद बारीक कण कम हो जाते हैं। इससे पानी का बहाव, कटाव और जमीन का विकास प्रभावित होता है।

वैज्ञानिकों की राय

वैज्ञानिकों का कहना है कि जानवर लगातार मिट्टी और रेत को इधर-उधर करते रहते हैं। जब यह प्रक्रिया लंबे समय तक चलती है, तो इसका असर बहुत बड़ा हो जाता है। उनका मानना है कि जानवर भी पृथ्वी को आकार देने वाले अहम इंजीनियर हैं, ठीक वैसे ही जैसे हवा और पानी।

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जानवरों का बिल बनाना, नदी तल हिलाना और भोजन ढूंढना जैसी रोजमर्रा की गतिविधियां धीरे-धीरे पूरे परिदृश्य को आकार देती हैं।

क्यों अहम है यह अध्ययन?

यह अध्ययन हमें यह समझने में मदद करता है कि प्रकृति में हर जीव का एक खास महत्व होता है। अगर जानवरों की संख्या कम हो जाती है, तो इसका असर केवल जैव विविधता पर ही नहीं बल्कि भूमि के स्वरूप पर भी पड़ेगा। इससे भविष्य में पर्यावरण संरक्षण की योजनाओं को बेहतर तरीके से बनाया जा सकता है।

अंत में, यह कहा जा सकता है कि जंगली जानवर हमारे पर्यावरण के छिपे हुए इंजीनियर हैं। वे बिना किसी मशीन के, अपने छोटे-छोटे कामों से पूरी धरती को बदलने की क्षमता रखते हैं। इसलिए हमें जानवरों और उनके प्राकृतिक आवास की रक्षा करनी चाहिए, ताकि पृथ्वी का संतुलन बना रहे।

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