

इटली के अपेनाइन भालू छोटे आकार, अलग चेहरे और कम आक्रामक व्यवहार के साथ इंसानों के करीब विकसित हुए हैं, मानव दबाव के कारण।
जीनोम अध्ययन से पता चला कि अपेनाइन भालुओं में जीनोमिक विविधता कम, इनब्रीडिंग अधिक और आक्रामकता से जुड़े जीन में बदलाव हैं।
वन्यजीवों के साथ कटाई, कृषि विस्तार, बदलती जलवायु और बढ़ती आबादी ने भालुओं के व्यवहार और शरीर पर लंबे समय तक प्रभाव डाले हैं।
उत्तराखंड में इस साल वन्यजीवों से जुड़े 64 मौतें और 467 घायल मामले दर्ज, ब्लैक बियर से संबंधित आठ मौतें भी शामिल हैं।
उत्तरकाशी में काले भालू का घर के आंगन में दिखना दर्शाता है कि मानव-वन्यजीव संपर्क और संघर्ष दोनों बढ़ रहे हैं।
भालुओं और लोगों के बीच संबंध दुनिया के कई हिस्सों में रोचक और कभी-कभी खतरनाक साबित हो रहे हैं। हाल ही में हुए शोध और घटनाओं से पता चलता है कि मानव गतिविधियां व जलवायु परिवर्तन न केवल भालुओं की संख्या और स्थान को प्रभावित करती हैं, बल्कि उनके व्यवहार और शारीरिक लक्षणों में भी बदलाव ला सकती हैं।
इटली का अपेनाइन भालू
इटली में पाए जाने वाले अपेनाइन भालू एक दुर्लभ और पृथक प्रजाति हैं। ये भालू केवल मध्य इटली में रहते हैं और इंसानों के करीब जीवन जीते आए हैं। हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन में यह पता चला है कि ये भालू अन्य यूरोपीय, अमेरिकी और एशियाई भालुओं की तुलना में छोटे आकार के, चेहरे और सिर में अलग और व्यवहार में कम आक्रामक हैं।
मानवजनित गतिविधियों - जैसे जंगलों के काटे जाने, कृषि का विस्तार, बढ़ती आबादी और जलवायु में बदलाव ने इन भालुओं के विकास को प्रभावित किया है। 2000-3000 साल पहले अन्य यूरोपीय भालुओं से अलग होने के बाद से यह प्रजाति पूरी तरह पृथक रह गई। अध्ययन से पता चला कि अधिक आक्रामक भालुओं को इंसानों द्वारा हटाए जाने के कारण शांति और कम आक्रामकता वाले भालुओं का विकास हुआ।
मॉलिक्यूलर बायोलॉजी एंड इवोलुशन नामक पत्रिका में प्रकाशित जीनोम अध्ययन से यह भी स्पष्ट हुआ कि अपेनाइन भालुओं में जीनोमिक विविधता कम है और इनब्रीडिंग (सात्विक प्रजनन) अधिक है, जिससे उनका विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि इन भालुओं की अनोखी आनुवंशिक विशेषताएं संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह उदाहरण दिखाता है कि मानव गतिविधियां प्रजातियों के लिए खतरा तो बन सकती हैं, लेकिन कभी-कभी अनजाने में उनके व्यवहार और विकास को भी प्रभावित कर सकती हैं।
उत्तराखंड में भालुओं और मानव संघर्ष
भारत के उत्तराखंड में भी हाल ही में भालुओं और मानवों के बीच बढ़ता संपर्क चिंता का विषय बन गया है। इस साल अब तक राज्य वन विभाग के अनुसार, 64 लोगों की मौतें और 467 घायल होने के मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक खतरा काले भालुओं (ब्लैक बियर) से देखा गया है, जिन्होंने कम से कम आठ मौतें और 95 घायल होने के मामलों के लिए जिम्मेवार ठहराया गया है।
हाल ही में उत्तरकाशी जिले में एक घर के आंगन में मां और बच्चों वाला काला भालू देखा गया, जिससे स्थानीय लोगों में डर और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई। वन विभाग ने लोगों से सावधानी बरतने और भालुओं के करीब जाने से बचने की सलाह दी।
विशेषज्ञों का कहना है कि काले भालू अक्सर भोजन की तलाश में इंसानी आबादी के नजदीक आते हैं। ऐसे में संघर्ष और चोट का खतरा बढ़ जाता है। सुरक्षा के लिए आवश्यक उपायों में घर और बस्तियों में कचरे और खाने की वस्तुओं को सुरक्षित रखना, भालुओं को डराने या पीछा न करना, और वन विभाग के निर्देशों का पालन करना शामिल है।
साथ ही बदलती जलवायु के चलते इस साल सर्दी के मौसम में अभी तक उतनी बर्फबारी नहीं हुई है जितनी अन्य सालों के दौरान हुआ करती थी। भालू बढ़ती सर्दी और भारी बर्फबारी के दौरान शीतनिद्रा में चले जाते थे, लेकिन बर्फबारी में कमी के कारण ऐसा नहीं हो पाया। अपनी भूख मिटाने के लिए भालू आबादी वाले इलाकों में पहुंच गए और लोगों के साथ उनका संघर्ष बढ़ गया।
मानव-भालू संबंध और संरक्षण का संदेश
इटली और उत्तराखंड दोनों उदाहरण यह दर्शाते हैं कि मानव और वन्य जीवन के बीच संबंध जटिल हैं। इटली में भालुओं ने मानव दबाव के कारण व्यवहारिक बदलाव अपनाए और संघर्ष कम किया, जबकि उत्तराखंड में मानव-भालू संपर्क अभी भी खतरनाक साबित हो रहा है।
इससे यह स्पष्ट होता है कि वन्यजीवों के संरक्षण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। न केवल प्रजातियों की संख्या को बचाना आवश्यक है, बल्कि उनके अनोखे व्यवहार और अनुवांशिक विशेषताओं की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
भालुओं के उदाहरण यह दिखाते हैं कि प्रकृति और इंसान हमेशा विरोध नहीं करते। कभी-कभी मानव गतिविधियां अनजाने में भालुओं के व्यवहार और विकास को प्रभावित करती हैं। अपेनाइन भालू और उत्तराखंड के काले भालू दोनों हमें याद दिलाते हैं कि सह-अस्तित्व, जागरूकता और सुरक्षा उपाय ही मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखने का रास्ता हैं।