खुले खेतों की रक्षक ‘जंगली बिल्ली’ पर मंडराया खतरा, घटी आबादी

भारत में जंगली बिल्ली 'फेलिस चाउस' को 1972 के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-द्वितीय के तहत संरक्षित किया गया है। इसका मतलब है कि इसे शिकार करना या व्यापार करना गैरकानूनी है।
जंगली बिल्ली (फेलिस चाउस) भारत के विभिन्न खुले आवासों में पाई जाती है, लेकिन इसकी आबादी धीरे-धीरे घट रही है।
जंगली बिल्ली (फेलिस चाउस) भारत के विभिन्न खुले आवासों में पाई जाती है, लेकिन इसकी आबादी धीरे-धीरे घट रही है।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • जंगली बिल्ली (फेलिस चाउस) भारत के विभिन्न खुले आवासों में पाई जाती है, लेकिन इसकी आबादी धीरे-धीरे घट रही है।

  • यह बिल्ली घने जंगलों और अत्यधिक मानव-बहुल क्षेत्रों से दूर रहती है, खुले कृषि और चराई वाले क्षेत्रों को पसंद करती है।

  • भारत में जंगली बिल्ली की अनुमानित संख्या लगभग तीन लाख है, सबसे बड़े समूह मध्य प्रदेश, राजस्थान और ओडिशा में पाए जाते हैं।

  • आवास विनाश, सड़क दुर्घटनाएं, शिकार, आवारा कुत्ते और संभावित संकरन इसके लिए गंभीर खतरे हैं, जिनसे संरक्षण की जरूरत बढ़ जाती है।

  • संरक्षण प्रयासों में खुले पारिस्थितिक तंत्र और मानवजनित बदलावों के बीच संतुलन बनाना, वन्यजीव मार्ग और पारिस्थितिक गलियारों की योजना शामिल होनी चाहिए।

जंगली बिल्ली, जिसे विज्ञान में ‘फेलिस चाउस’ कहा जाता है, भारत और एशिया के कई हिस्सों में पाई जाती है। यह छोटी बिल्ली घास के मैदान, दलदली क्षेत्र, रेगिस्तान और खुले कृषि-स्थल जैसे विभिन्न वातावरण में रह सकती है।

प्रकृति संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ (आईयूसीएन) की रेड लिस्ट में इसे “कम चिंता वाली प्रजाति” बताया गया है। इस वजह से अक्सर यह गलतफहमी बन जाती है कि जंगली बिल्ली की आबादी सुरक्षित है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तव में इसकी संख्या घट रही है और यह बड़े शिकारी जानवरों जैसे बाघ और तेंदुए की तरह ध्यान नहीं पा रही है।

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जंगली बिल्ली (फेलिस चाउस) भारत के विभिन्न खुले आवासों में पाई जाती है, लेकिन इसकी आबादी धीरे-धीरे घट रही है।

भारत में जंगली बिल्ली को 1972 के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-द्वितीय के तहत संरक्षित किया गया है। इसका मतलब है कि इसे शिकार करना या व्यापार करना गैरकानूनी है। हालांकि यह भारत की सबसे फैली हुई छोटी बिल्ली है, फिर भी इसके बारे में अध्ययन कम हुए हैं और संरक्षण पर ध्यान भी कम गया है। यह अध्ययन 'साइंटिफिक रिपोर्ट्स' में प्रकाशित किया गया है जो भविष्य की संरक्षण योजनाओं के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।

जंगली बिल्ली का आवास और जीवनशैली

नए अध्ययन के अनुसार, जंगली बिल्ली घने जंगलों और मानव-बहुल क्षेत्रों से दूर रहती है। यह खुले और मिश्रित कृषि-चराई वाले क्षेत्रों में रहना पसंद करती है। यह बिल्ली मानवीय गतिविधियों को कुछ हद तक सहन कर सकती है, लेकिन अत्यधिक आबादी वाले इलाकों से बचती है।

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यह जानवर गर्म और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में अधिक पाए जाते हैं, जहां मौसम मौसमी रूप से शुष्क होता है और वर्षा मध्यम होती है। कैनोपी यानी पेड़-पौधों का आवरण भी इन क्षेत्रों में संतुलित होता है। अध्ययन में यह भी पाया गया कि भारत के पूर्वी हिस्से में इनकी अधिक संभावित आबादी है, जबकि पश्चिमी शुष्क क्षेत्रों में कम हैं।

भारत में संख्या और वितरण

इस अध्ययन में भारत भर के 26,000 से अधिक कैमरा-ट्रैप वाली जगहों, रेडियो कॉलर से मिले आंकड़ों और पहले के अध्ययनों को मिलाकर जंगल बिल्ली के लिए उपयुक्त आवास का पता लगाया गया। मशीन-लर्निंग तकनीक का उपयोग करके इसका देशव्यापी अनुमान लगाया गया।

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जंगली बिल्ली (फेलिस चाउस) भारत के विभिन्न खुले आवासों में पाई जाती है, लेकिन इसकी आबादी धीरे-धीरे घट रही है।

अनुमान के अनुसार, भारत में जंगल बिल्ली की कुल संख्या लगभग तीन लाख हो सकती है। इसमें सबसे कम संख्या 1.57 लाख और सबसे अधिक 4.59 लाख के बीच हो सकती है। सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य हैं मध्य प्रदेश, राजस्थान और ओडिशा। हालांकि सिक्किम से पर्याप्त आंकड़े नहीं मिलने के कारण इसे अध्ययन में शामिल नहीं किया गया।

पारिस्थितिक महत्व

जंगल बिल्ली कृषि क्षेत्रों में चूहे और अन्य छोटे स्तनधारियों को नियंत्रित करके किसानों के लिए फायदेमंद साबित होती है। इस प्रकार यह कृषि क्षेत्रों और खुले प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र में जैव विविधता बनाए रखने में मदद करती है।

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ये क्षेत्र राष्ट्रीय उद्यानों और संरक्षित क्षेत्रों के बाहर होने के कारण भी महत्वपूर्ण हैं। यह दिखाता है कि वन्यजीव केवल जंगलों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मानव-संवर्द्धित क्षेत्रों में भी उनका अस्तित्व महत्वपूर्ण है।

खतरे और चुनौतियां

जंगली बिल्ली कई खतरों का सामना कर रही है। सबसे बड़ा खतरा है आवास का विनाश। कृषि विस्तार, शहरीकरण और सड़कों का निर्माण इनके प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंचा रहा है। सड़क पर होने वाली दुर्घटनाओं और शिकार की घटनाओं से भी इनके जीवन को खतरा है।

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एक और संभावित खतरा है घरेलू बिल्लियों के साथ संकरन, जो इनके आनुवंशिक गुणों को प्रभावित कर सकता है, हालांकि इस पर और शोध की जरूरत है।

साथ ही, आवारा कुत्तों की संख्या भी जंगल बिल्लियों के लिए खतरा है। ये कुत्ते रोग फैलाने के साथ-साथ जंगल बिल्लियों और अन्य शिकारी जीवों के शिकार को छीन सकते हैं।

संरक्षण की दिशा

इस अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ कि भारत में खुली पारिस्थितिकी तंत्र और कृषि व चराई वाले इलाकों में वन्यजीव संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण हैं। केवल संरक्षित क्षेत्रों में ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। सड़क निर्माण और अन्य अवसंरचना परियोजनाओं के दौरान वन्यजीव मार्ग और पारिस्थितिक गलियारों की योजना बनाना जरूरी है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि जंगल बिल्लियों के बारे में अभी भी कई चीजें अज्ञात हैं, जैसे उनके गुफा (डेन), शिकार की आदतें, बच्चे की संख्या और घूमें का क्षेत्र। ये जानवर रात में सक्रिय होते हैं और छुपकर रहते हैं, इसलिए अध्ययन करना कठिन होता है।

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जंगली बिल्ली भारत में सबसे फैली हुई छोटी बिल्ली है, लेकिन यह खतरे से मुक्त नहीं है। इसकी सुरक्षा और संरक्षण के लिए आवश्यक है कि हम खुले पारिस्थितिक तंत्र, कृषि-चराई वाले क्षेत्र और मानव-निर्मित परिवर्तनों के बीच संतुलन बनाएं। यह अध्ययन इस दिशा में पहला बड़ा कदम है और भविष्य में और अधिक शोध और जागरूकता की जरूरत है।

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