प्लास्टिक प्रदूषण व जलवायु परिवर्तन से पारिस्थितिकी के लिए अहम समुद्री कछुओं के जीवन पर संकट

विश्व समुद्री कछुआ दिवस: समुद्री कछुओं की संख्या घटकर लगभग 65 लाख रह गई, कई प्रजातियां संकटग्रस्त हॉकसबिल और केम्प्स रिडले कछुए विलुप्ति के कगार पर पहुंचे
समुद्री कछुए समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र संतुलित रखते हैं, वे जेलीफिश और समुद्री घास को नियंत्रित कर जैव विविधता बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं
समुद्री कछुए समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र संतुलित रखते हैं, वे जेलीफिश और समुद्री घास को नियंत्रित कर जैव विविधता बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • विश्व समुद्री कछुआ दिवस पर प्लास्टिक प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन से समुद्री कछुओं के जीवन पर गंभीर संकट उजागर हुआ

  • वैज्ञानिक रिपोर्टों के अनुसार समुद्री कछुओं की संख्या घटकर लगभग 65 लाख रह गई कई प्रजातियां विलुप्ति के कगार पर

  • हॉक्सबिल और केम्प्स रिडले कछुए अत्यधिक संकटग्रस्त घोषित समुद्री प्रदूषण मछली जाल और आवास नष्ट होना मुख्य खतरे बने हुए

  • समुद्री कछुए समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र संतुलित रखते हैं, वे जेलीफिश और समुद्री घास को नियंत्रित कर जैव विविधता बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं

  • प्लास्टिक कम करना तटीय सफाई और सुरक्षित मछली पकड़ने के तरीके अपनाकर समुद्री कछुओं का संरक्षण आवश्यक बताया गया

हर साल 16 जून को पूरी दुनिया में “विश्व समुद्री कछुआ दिवस” मनाया जाता है। यह दिन समुद्री कछुओं के संरक्षण और उनके महत्व के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है।

इस दिन को मनाने की प्रेरणा प्रसिद्ध अमेरिकी पारिस्थितिकीविद् आर्ची कैर के जन्मदिन से ली गई है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन समुद्री कछुओं के अध्ययन और संरक्षण को समर्पित किया। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि समुद्री जीवन को बचाना कितना जरूरी है, खासकर आज के समय में जब समुद्र प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन बढ़ते खतरे बन चुके हैं।

विश्व समुद्री कछुआ दिवस क्या है?

विश्व समुद्री कछुआ दिवस का उद्देश्य लोगों को समुद्री कछुओं के जीवन, उनकी समस्याओं और उनके संरक्षण के बारे में जागरूक करना है। यह दिन दुनिया भर में पर्यावरण संगठनों और वैज्ञानिकों द्वारा मनाया जाता है। इसका एक मुख्य संदेश यह भी है कि समुद्र में बढ़ता प्लास्टिक प्रदूषण इन जीवों के लिए सबसे बड़ा खतरा है। कई बार कछुए प्लास्टिक को भोजन समझकर खा लेते हैं, जिससे उनकी मृत्यु हो जाती है। इस दिन लोगों को समुद्र और समुद्री तटों को स्वच्छ रखने के लिए प्रेरित किया जाता है।

समुद्री कछुओं का जीवन और विशेषताएं

समुद्री कछुए बहुत ही प्राचीन जीवों में से एक हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार ये 50 से 80 साल तक जीवित रह सकते हैं। ये धीरे-धीरे बड़े होते हैं और कई वर्षों बाद प्रजनन के योग्य बनते हैं। मादा कछुए समुद्र से बाहर आकर रेत में गड्ढा बनाती हैं और लगभग 100 से 125 अंडे देती हैं।

एक दिलचस्प बात यह है कि रेत का तापमान बच्चों के लिंग को निर्धारित करता है। ठंडी रेत से नर कछुए पैदा होते हैं, जबकि गर्म रेत से मादा कछुए अधिक जन्म लेते हैं। तापमान में बदलाव होने पर नर और मादा दोनों का संतुलन बनता है।

प्रवास और जीवन चक्र

समुद्री कछुए अपने जीवन में हजारों किलोमीटर की यात्रा करते हैं। कुछ प्रजातियां जैसे लेदरबैक कछुआ हर साल लगभग 10,000 मील तक यात्रा कर सकती हैं। ये कछुए भोजन और प्रजनन के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं। इनके जीवन का अधिकांश हिस्सा समुद्र में बीतता है, लेकिन अंडे देने के लिए ये तटों पर जरूर आते हैं।

समुद्री कछुए बहुत समय तक पानी के अंदर सांस रोके नहीं रह सकते, इसलिए उन्हें बीच-बीच में सतह पर आना पड़ता है। यह भी उनके जीवन को थोड़ा चुनौतीपूर्ण बनाता है।

पर्यावरण में भूमिका

समुद्री कछुए समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये समुद्री घास और जेलीफिश को खाते हैं, जिससे इनकी संख्या नियंत्रित रहती है। यदि कछुए न हों तो समुद्र में कुछ प्रजातियाँ बहुत अधिक बढ़ सकती हैं, जिससे पूरा संतुलन बिगड़ सकता है।

इसके अलावा, इनके शरीर पर छोटे जीव जैसे शैवाल और बार्नेकल चिपक जाते हैं, जो अन्य समुद्री जीवों के लिए भोजन का हिस्सा बनते हैं। इस तरह कछुए समुद्र के भोजन चक्र को मजबूत बनाते हैं।

समुद्री कछुओं के सामने खतरे

आज समुद्री कछुओं के सामने कई गंभीर खतरे हैं। समुद्र में बढ़ता प्लास्टिक कचरा उनके लिए सबसे बड़ा संकट है। इसके अलावा मछली पकड़ने वाले बड़े जालों में फंसकर भी कई कछुए मर जाते हैं।

तटीय क्षेत्रों में निर्माण कार्य के कारण उनके अंडे देने की जगह कम हो रही है। रोशनी और शोर के कारण मादा कछुए तट पर आने से डर जाती हैं। जलवायु परिवर्तन भी एक बड़ा खतरा है क्योंकि इससे रेत का तापमान बदल रहा है, जो उनके जन्म अनुपात को प्रभावित करता है। अनुमान के अनुसार दुनिया में केवल कुछ लाख समुद्री कछुए ही बचे हैं और कई प्रजातियां संकटग्रस्त हैं

समुद्री कछुओं की घटती संख्या

वैज्ञानिकों के अनुसार दुनिया भर में समुद्री कछुओं की संख्या लगातार कम हो रही है। अनुमान लगाया जाता है कि समुद्रों में अब केवल लगभग 65 लाख समुद्री कछुए ही बचे हैं। यह संख्या सटीक नहीं है, क्योंकि इनका सही आकलन करना बहुत कठिन होता है, लेकिन शोध यही संकेत देते हैं कि इनकी आबादी तेजी से घट रही है।

आज लगभग सभी प्रजातियां संकट में हैं। अधिकांश समुद्री कछुओं को “संकटग्रस्त” या “गंभीर रूप से संकटग्रस्त” श्रेणी में रखा गया है। इनमें कुछ प्रजातियां बहुत कम संख्या में बची हैं। उदाहरण के लिए, गंभीर रूप से संकटग्रस्त हॉक्सबिल कछुआ की दुनिया भर में केवल लगभग 57,000 संख्या ही है।

इसी तरह, केम्प्स रिडले समुद्री कछुआ को भी सबसे अधिक खतरे वाली प्रजातियों में शामिल किया गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अब केवल लगभग 10,000 कछुए ही जीवित बचे हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि समुद्री कछुओं का अस्तित्व गंभीर खतरे में है।

समग्र रूप से, ये सभी प्रजातियां समुद्री कछुआ परिवार का हिस्सा हैं, जो समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। लेकिन जलवायु परिवर्तन, प्लास्टिक प्रदूषण और मानव गतिविधियों के कारण इनकी संख्या लगातार कम होती जा रही है।

संरक्षण और संदेश

समुद्री कछुओं को बचाने के लिए हमें समुद्र में प्लास्टिक फेंकना बंद करना होगा। समुद्री तटों को साफ रखना और कछुओं के अंडे देने वाले स्थानों की सुरक्षा करना बहुत जरूरी है। मछली पकड़ने के सुरक्षित तरीकों को अपनाकर भी इनकी रक्षा की जा सकती है।

विश्व समुद्री कछुआ दिवस हमें यह संदेश देता है कि प्रकृति का हर जीव महत्वपूर्ण है। यदि हम समुद्री कछुओं को बचाएंगे, तो हम पूरे समुद्री जीवन को सुरक्षित रख पाएंगे। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और संतुलित समुद्र छोड़ें।

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