

अंतर्राष्ट्रीय जगुआर दिवस हर साल 29 नवंबर को जगुआर संरक्षण और जैव विविधता की सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है।
जगुआर 2030 फोरम (2018) में 14 देशों ने मिलकर जगुआर संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और इस दिवस की स्थापना का प्रस्ताव रखा।
जगुआर की संख्या घट रही है, आवास हानि, मानव-वन्यजीव संघर्ष, शिकार और अवैध व्यापार इसके मुख्य कारण हैं।
जगुआर को आईयूसीएन की ‘निकट संकटग्रस्त’ श्रेणी में रखा गया है, जो तुरंत संरक्षण उपायों की आवश्यकता दर्शाता है।
जगुआर संरक्षण के लिए संरक्षित गलियारे, समुदाय सहभागिता, जागरूकता अभियान और ईकोटूरिज्म जैसे प्रयास सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहे हैं।
हर साल 29 नवंबर को अंतर्राष्ट्रीय जगुआर दिवस मनाया जाता है। यह दिन अमेरिका महाद्वीप की सबसे बड़ी जंगली बिल्ली जगुआर को समर्पित है। जगुआर केवल एक शानदार वन्यजीव ही नहीं, बल्कि जैव विविधता संरक्षण का एक महत्वपूर्ण छत्र प्रजाति भी है।
इसका मतलब है कि यदि जगुआर सुरक्षित है, तो उसके साथ-साथ उसके पूरे आवास और उसमें रहने वाले असंख्य अन्य जीव भी सुरक्षित रहते हैं। इसके अतिरिक्त, यह प्रजाति मध्य और दक्षिण अमेरिका की सदियों पुरानी संस्कृति, परंपराओं और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक भी है।
जगुआर 2030 फोरम और अंतर्राष्ट्रीय जगुआर दिवस की शुरुआत
मार्च 2018 में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, न्यूयॉर्क में 14 जगुआर-आवास वाले देशों के प्रतिनिधि इकट्ठा हुए। इस बैठक को जगुआर 2030 फोरम के नाम से जाना जाता है। यहां देशों ने मिलकर जगुआर 2030 स्टेटमेंट का निर्माण किया।
इस बयान में जगुआर संरक्षण से जुड़े कई अंतरराष्ट्रीय सहयोगात्मक प्रयासों का विवरण दिया गया, जिनमें से एक था - अंतर्राष्ट्रीय जगुआर दिवस मनाने का प्रस्ताव। इसका उद्देश्य था दुनिया का ध्यान इस ओर आकर्षित करना कि जगुआर और उसके गलियारों को बचाना, संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करने की दिशा में एक अहम कदम है।
जगुआर की मौजूदा स्थिति: एक मौन संकट
हालांकि जगुआर को कई स्थानों पर पूजनीय और सम्मानित माना जाता है, फिर भी यह प्रजाति आज एक मौन गिरावट का सामना कर रही है। वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के अनुसार दुनिया में अब लगभग 1,73,000 जगुआर बचे हैं। यह संख्या धीरे-धीरे घट रही है, और इस कमी के कई कारण हैं।
1. आवासों से तेजी से हानि
जगुआर घने जंगलों और विस्तृत प्राकृतिक क्षेत्रों में पनपते हैं। लेकिन तेजी से बढ़ती वन कटाई, खेती के लिए भूमि परिवर्तन और मानव बस्तियों का विस्तार इनके घर को निरंतर छोटा कर रहा है। जब जगुआर के रहने और घूमने के क्षेत्र घटते हैं, तो उनकी जीवित रहने की संभावनाएं भी कम हो जाती हैं।
2. मानव-वन्यजीव संघर्ष
जैसे-जैसे मनुष्य जंगलों में प्रवेश करता है, वह जगुआर के प्राकृतिक शिकार को कम करता जाता है। ऐसे में कई बार जगुआर मवेशियों पर हमला करते हैं। इससे किसान नाराज होते हैं और कभी-कभी प्रतिशोध में जगुआर को मार देते हैं। यह संघर्ष जगुआर की संख्या को तेजी से प्रभावित करता है।
3. शिकार और अवैध व्यापार
जगुआर को ऐतिहासिक रूप से उनकी खूबसूरत खाल के लिए मारा जाता रहा है। आज भी अवैध शिकार पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। हाल के वर्षों में इनके दांत और हड्डियों का अवैध व्यापार बढ़ा है, जिनकी मांग विशेष रूप से एशियाई देशों में पाई गई है। इस गैरकानूनी व्यापार ने जगुआर को और संकट में डाल दिया है।
संरक्षण की आवश्यकता: समय कम है
अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) ने जगुआर को अपनी रेड लिस्ट में निकट संकटग्रस्त श्रेणी में रखा है। यह संकेत है कि यदि समय पर कदम न उठाए गए, तो यह प्रजाति भविष्य में और अधिक खतरे में पड़ सकती है। वैज्ञानिक और संरक्षणकर्ता लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि अभी भी समय है, पर तेज और ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है।
संरक्षण के प्रयास: उम्मीद की किरण
जगुआर को बचाने के लिए विभिन्न स्तरों पर कई पहलें चल रही हैं। इनमें सबसे महत्त्वपूर्ण हैं -
1. संरक्षण गलियारों की स्थापना
जगुआर बड़े इलाकों में घूमने और शिकार करने वाले जीव हैं, इसलिए अलग-अलग जंगलों को सुरक्षित मार्गों से जोड़ना जरूरी है। कई देशों ने मिलकर ऐसे गलियारे बनाए हैं जिनसे जगुआर सुरक्षित रूप से एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जा सके।
2. स्थानीय समुदायों की भागीदारी
जगुआर संरक्षण तभी सफल हो सकता है जब स्थानीय लोग इसमें शामिल हों। कई स्थानों पर समुदाय-आधारित कार्यक्रमों ने शानदार परिणाम दिए हैं। किसानों को बताया जाता है कि जगुआर उनके लिए खतरा नहीं, बल्कि प्राकृतिक पारिस्थितिकी का आवश्यक हिस्सा है। उन्हें सुरक्षित पशुपालन के तरीके सिखाए जाते हैं और नुकसान होने पर मुआवजा भी दिया जाता है।
3. शिक्षा और जागरूकता
स्कूलों, गांवों और मीडिया के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। जब लोग समझते हैं कि जगुआर जंगलों का संतुलन बनाए रखने में कितना महत्वपूर्ण है, तो वे इसके संरक्षण में साझेदार बनते हैं।
4. ईकोटूरिज्म का विकास
पर्यटन से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है, जिससे वे जगुआर और उसके आवास को सुरक्षित रखने के लिए प्रेरित होते हैं। इस प्रकार, सतत विकास और वन्यजीव संरक्षण दोनों लक्ष्य पूरे होते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय जगुआर दिवस हमें याद दिलाता है कि प्रकृति के ये शानदार प्रहरी केवल जंगलों के ही नहीं, बल्कि हमारी साझा पृथ्वी की धरोहर हैं। यदि हम मिलकर प्रयास करें, तो न केवल जगुआर बल्कि उससे जुड़ी पूरी पारिस्थितिकी सुरक्षित रह सकती है। यह दिन हमें जागरूक होने, शिक्षित होने और भविष्य के लिए कार्रवाई करने का संदेश देता है।