

पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से उत्तर भारत के पर्वतीय इलाकों में बारिश और बर्फबारी की संभावना बढ़ गई है।
उत्तराखंड और हिमाचल के कई पहाड़ी जिलों में तापमान शून्य से नीचे, पाला और शीतलहर का असर।
जम्मू और कश्मीर में बर्फबारी के बाद शीतलहर तेज, गुलमर्ग में दिन का तापमान भी शून्य के आसपास।
दिल्ली-एनसीआर में शीतलहर, शीत दिवस और घना कोहरा, वायु गुणवत्ता खराब से बहुत खराब श्रेणी में बनी हुई।
समुद्री क्षेत्रों में तेज हवाओं का प्रकोप, मौसम विभाग ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह।
जनवरी के पहले सप्ताह में देश के मौसम में कई अहम बदलाव देखने को मिल रहे हैं। उत्तर भारत से लेकर मध्य, पूर्वी और तटीय क्षेत्रों तक अलग–अलग मौसमी गतिविधियां सक्रिय हैं, जिनका असर आम जनजीवन, स्वास्थ्य, कृषि, यातायात और समुद्री गतिविधियों पर पड़ सकता है।
मौसम विभाग के द्वारा आज सुबह, पांच जनवरी, 2026 को जारी बुलेटिन के मुताबिक, वर्तमान में एक पश्चिमी विक्षोभ उत्तरी पाकिस्तान और उससे सटे जम्मू के इलाकों के ऊपर सक्रिय है। यह समुद्र तल से लगभग 3.1 किमी की ऊंचाई पर चक्रवाती प्रसार के रूप में मौजूद है। इसके साथ ही ऊपरी स्तरों पर पश्चिमी हवाओं की एक ट्रफ भी बनी हुई है। उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट स्ट्रीम सक्रिय है, जिसकी हवाओं की गति लगभग 130 नॉट्स है और यह समुद्र तल से करीब 12.6 किमी की ऊंचाई पर बह रही है।
इन मौसमी गतिविधियों के कारण उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। इसके प्रभाव से जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी की संभावना बढ़ गई है।
उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में कड़ाके की ठंड
उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में सुबह के समय तापमान माइनस तीन डिग्री सेल्सियस से एक डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। ऊंचाई वाले इलाकों में पाला जमने और हल्की बारिश व बर्फबारी की आशंका है। इससे ठंड का असर और भी ज्यादा महसूस किया जा रहा है। पाले के कारण खेतों में खड़ी फसलों और बागवानी को नुकसान पहुंच सकता है।
हिमाचल प्रदेश में शीतलहर का असर
हिमाचल प्रदेश में इस मौसम की सबसे तीव्र शीतलहर कांगड़ा जिले में दर्ज की गई, जहां शीत दिवस (कोल्ड डे) जैसे हालात बने हुए हैं। राज्य के चार इलाकों कुकुमसेरी, ताबो, कल्पा और रिकांग पिओ में न्यूनतम तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस से नीचे चला गया।
वहीं सुंदरनगर, ऊना और नाहन में न्यूनतम तापमान समान रूप से 5.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कुल मिलाकर राज्य के 16 स्थानों पर न्यूनतम तापमान पांच डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा, जो ठंड की गंभीरता को दर्शाता है। मौसम विभाग ने आज भी बारिश और बर्फबारी होने के आसार जताए हैं।
जम्मू और कश्मीर में बर्फबारी के बाद ठंड का प्रकोप
जम्मू और कश्मीर में हाल ही में हुई बर्फबारी के बाद कश्मीर घाटी शीतलहर की चपेट में है। घाटी के अधिकांश जिलों में रात का तापमान शून्य से नीचे चला गया है। दुनिया के प्रसिद्ध स्की रिसोर्ट गुलमर्ग में भी कड़ाके की ठंड पड़ रही है, जहां दिन का तापमान भी शून्य डिग्री के आसपास बना हुआ है। इससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं पांच और छह जनवरी, 2026 के दौरान जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद में हल्की से मध्यम बारिश व बर्फबारी होने की संभावना जताई गई है।
दिल्ली में शीतलहर और वायु गुणवत्ता की स्थिति
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली शीतलहर व शीत दिवस के सितम से बेहाल है। जबकि बीते कल, चार जनवरी को न्यूनतम तापमान में 0.5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि अधिकतम तापमान में दो डिग्री सेल्सियस की गिरावट देखी गई। न्यूनतम तापमान 7.4 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 0.5 डिग्री कम है। वहीं अधिकतम तापमान 17.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो औसत से दो डिग्री अधिक है।
आने वाले एक सप्ताह में दिल्ली में अधिकतम तापमान के 18 से 21 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान के आठ से 10 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है।
सोमवार सुबह दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब बनी रही। कोहरे और प्रदूषण के मिश्रण के कारण कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 200 से ऊपर दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ से ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है।
तापमान में उतार-चढ़ाव
मौसम विभाग के पूर्वानुमान की मानें तो उत्तर-पश्चिम भारत में अगले 24 घंटों के दौरान न्यूनतम तापमान में कोई खास बदलाव नहीं होगा, लेकिन इसके बाद अगले दो दिनों में तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ सकती है।
वहीं, मध्य और पूर्वी भारत में अगले तीन दिनों में न्यूनतम तापमान दो से चार डिग्री सेल्सियस तक गिरने के आसार हैं। इसके बाद तापमान लगभग स्थिर बना रह सकता है। महाराष्ट्र में भी अगले 24 घंटों में तापमान स्थिर रहेगा, लेकिन इसके बाद चार दिनों में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ सकती है।
वहीं गुजरात में अगले चार दिनों में न्यूनतम तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होने की संभावना है। जबकि देश के बाकी हिस्सों में तापमान में कोई खास बदलाव होने की संभावना नहीं है।
देश भर में अधिकतम और न्यूनतम तापमान की बात करें तो कल, चार जनवरी, 2026 को कर्नाटक के कारवार में अधिकतम तापमान 35.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जबकि कल, देश के मैदानी इलाकों में राजस्थान के फतेहपुर में न्यूनतम तापमान 1.1 डिग्री सेल्सियस रहा।
आज कहां-कहां रहेगा शीतलहर और शीत दिवस का प्रकोप
आज, पांच जनवरी, 2026 को हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और झारखंड के कुछ हिस्सों में शीतलहर (कोल्ड वेव) चलने का अंदेशा जताया गया है।
इसके अलावा बिहार, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, उत्तराखंड और पश्चिमी मध्य प्रदेश में कुछ हिस्सों में शीत दिवस (कोल्ड डे) के आसार हैं।
सर्दी का स्वास्थ्य पर प्रभाव
लगातार ठंड के संपर्क में रहने से सर्दी, जुकाम, फ्लू, नाक बहना या नाक से खून आने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ठंड में कंपकंपी (शिवरिंग) होना शरीर के तापमान गिरने का पहला संकेत है। ऐसी स्थिति में तुरंत घर के अंदर जाना चाहिए।
लंबे समय तक ठंड में रहने से फ्रॉस्टबाइट की समस्या भी हो सकती है, जिसमें उंगलियां, पैर की उंगलियां, नाक और कान सुन्न पड़ सकते हैं। गंभीर स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सहायता की जरूरत पड़ती है।
घना कोहरा और उसका असर
मौसम विभाग के मुताबिक, आज पांच जनवरी, 2026 को देश के कई हिस्सों में घने से बहुत घना कोहरा छाए रहने की आशंका है। घना कोहरा असम और मेघालय, बिहार, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, राजस्थान, उत्तराखंड, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में देखा जा सकता है।
वहीं, पूर्वी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, मध्य प्रदेश और ओडिशा में घने से बहुत घना कोहरा रहने के आसार हैं।
कोहरे के कारण हवाई अड्डों, रेलवे और राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात प्रभावित हो सकता है। दृश्यता कम होने से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है और कुछ क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति भी बाधित हो सकती है।
कोहरे का स्वास्थ्य पर प्रभाव
घने कोहरे में मौजूद प्रदूषक तत्व फेफड़ों में जाकर सांस लेने में दिक्कत पैदा कर सकते हैं। अस्थमा और ब्रोंकाइटिस के मरीजों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। आंखों में जलन, लालिमा और संक्रमण की समस्या भी कोहरे के कारण बढ़ सकती है।
समुद्री क्षेत्रों में खराब मौसम
दक्षिणी समुद्री क्षेत्रों में भी मौसम खराब बना हुआ है। श्रीलंका तट और बंगाल की खाड़ी के कई हिस्सों में 35 से 45 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाओं में और इजाफा होकर 55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार में तब्दील होने के आसार हैं।
वहीं सोमालिया तट, मन्नार की खाड़ी और कोमोरिन क्षेत्र में 45 से 55 किमी प्रति घंटे की दर से चलने वाली तूफानी हवाओं के और तेज होकर 65 किमी प्रति घंटे तक हो पहुंचने का अंदेशा जताया गया है। इन मौसमी गतिविधियों को देखते हुए विभाग ने मछुआरों को समुद्र में जाने से बचने की सलाह दी गई है।
कुल मिलाकर जनवरी के पहले सप्ताह में देश के कई हिस्सों में ठंड, शीतलहर, कोहरा, बारिश, बर्फबारी और तेज हवाओं का असर देखने को मिलेगा। लोगों को मौसम की चेतावनियों का पालन करने, ठंड से बचाव के उपाय अपनाने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है, ताकि स्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित की जा सकें।