पहाड़ों पर बर्फबारी, मैदानों में शीतलहर का प्रकोप, प्रदूषण व कोहरे का कहर

19 जनवरी, 2026 को जारी पूर्वानुमान में कहा गया है कि पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से पहाड़ों में बर्फबारी, मैदानों में शीतलहर, घना कोहरा व प्रदूषण से जनजीवन प्रभावित होने के आसार
उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब जैसी ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ की सफेद चादर बिछ गई है, जिससे वादियों में शीतलहर का सितम बढ़ गया है।
उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब जैसी ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ की सफेद चादर बिछ गई है, जिससे वादियों में शीतलहर का सितम बढ़ गया है।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • दो पश्चिमी विक्षोभों के कारण उत्तर भारत में मौसम सक्रिय, पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश और बर्फबारी का पूर्वानुमान।

  • उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब सहित मैदानी इलाकों में घना कोहरा और शीतलहर से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित।

  • दिल्ली में वायु गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में, एक्यूआई 434 दर्ज, ग्रेप-चार प्रतिबंध लागू किए गए।

  • 23 जनवरी को कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड और हिमाचल के ऊंचे क्षेत्रों में भारी बर्फबारी की चेतावनी जारी।

  • घना कोहरा और प्रदूषण से सांस, आंखों और हृदय रोगियों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह।

भारत के कई इलाके इस समय मौसम में बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं। उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड, घना कोहरा और वायु प्रदूषण लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग के द्वारा आज सुबह, 19 जनवरी, 2026 को जारी पूर्वानुमान में कहा गया है कि आने वाले दिनों में पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम और भी सक्रिय हो सकता है।

पश्चिमी विक्षोभ का असर

इस समय उत्तर पाकिस्तान, पंजाब और आसपास के इलाकों में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है। यह वायुमंडल के ऊपरी हिस्से में चक्रवाती प्रसार के रूप में मौजूद है। इसके प्रभाव से उत्तर भारत के कई राज्यों में बादल छाए हुए हैं। राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के कुछ हिस्सों में भी इसका असर देखा जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार 19 और 21 जनवरी 2026 की रात से दो पश्चिमी विक्षोभ एक के बाद फिर उत्तर-पश्चिम भारत के मौसम में बदलाव कर सकते हैं।

बारिश और बर्फबारी की संभावना

जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद और हिमाचल प्रदेश में 19 से 21 जनवरी के बीच हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी हो सकती है। इसके बाद 22 से 24 जनवरी के दौरान इन इलाकों में बारिश और बर्फबारी और तेज हो सकती है। 23 जनवरी को कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के ऊंचे इलाकों में भारी बर्फबारी होने की संभावना है। इससे पहाड़ी क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हो सकता है।

वहीं उत्तराखंड के ऊंचाई वाले हिमालयी इलाकों में बीते दिनों हल्का हिमपात होने से पहाड़ों पर सर्दी बढ़ गई है। बद्रीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब जैसी ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ की सफेद चादर बिछ गई है, जिससे वादियों में शीतलहर का सितम बढ़ गया है। वहीं मैदानी इलाकों में धूप निकली। जनवरी में पर्याप्त बारिश-बर्फबारी न होने से सूखी ठंड जारी है। 21 से 24 जनवरी के बीच पश्चिमी विक्षोभ के चलते बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी का पूर्वानुमान जताया गया है।

कोहरा और ठंड का प्रकोप

उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, बिहार और पश्चिमी राजस्थान में घने से बहुत घना कोहरा छाया रहा। सुबह और रात के समय दृश्यता बहुत कम हो जाती है, जिससे सड़क, रेल और हवाई यातायात प्रभावित हो रहा है। उत्तर प्रदेश में 19 से 20 जनवरी तक घना कोहरा रहने का अंदेशा जताया गया है। दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में भी 20 जनवरी तक कोहरा बना रह सकता है।

हिमाचल प्रदेश के कुछ इलाकों में 19 से 21 जनवरी के बीच शीतलहर चलने का अंदेशा जताया गया है। ओडिशा में भी 19 जनवरी को ठंड का असर देखा जा सकता है।

तापमान में उतार-चढ़ाव

विभाग की मानें तो अगले तीन दिनों तक उत्तर-पश्चिम भारत में न्यूनतम तापमान में कोई खास बदलाव होने की संभावना नहीं है। इसके बाद तापमान में दो से पांच डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है। महाराष्ट्र में अगले चार दिनों में न्यूनतम तापमान दो से चार डिग्री तक बढ़ सकता है। गुजरात और पूर्वी भारत में अगले दो दिनों में तापमान दो से तीन डिग्री तक बढ़ने की संभावना है। जबकि देश के अन्य हिस्सों में तापमान के लगभग स्थिर रहने की उम्मीद है।

देश भर में अधिकतम और न्यूनतम तापमान की बात करें तो कल, 18 जनवरी, 2026 को कर्नाटक के कारवार में अधिकतम तापमान 35.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जबकि कल, देश के मैदानी इलाकों में पंजाब के अमृतसर में न्यूनतम तापमान 1.7 डिग्री सेल्सियस रहा।

दिल्ली में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोहरे के साथ-साथ वायु प्रदूषण भी गंभीर बना हुआ है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 434 दर्ज किया गया है, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। खराब हवा के कारण ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप)-चार लागू किया गया है। इससे निर्माण कार्य, वाहनों और अन्य गतिविधियों पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गई हैं।

वहीं आज देश की राजधानी दिल्ली में न्यूनतम तापमान के 13 डिग्री सेल्सियस, जबकि अधिकतम तापमान के 21 डिग्री सेल्सियस तक रहने का पूर्वानुमान है।

स्वास्थ्य पर प्रभाव

घना कोहरा और प्रदूषित हवा स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक होती है। कोहरे में मौजूद सूक्ष्म कण और प्रदूषक सांस के जरिए फेफड़ों में चले जाते हैं। इससे खांसी, सांस फूलना और सीने में जकड़न की समस्या बढ़ जाती है। दमा और ब्रोंकाइटिस के मरीजों को खास सावधानी बरतने की जरूरत है।

आंखों में जलन, लालिमा और सूजन की समस्या भी प्रदूषित हवा के कारण हो सकती है। लंबे समय तक ठंड और कोहरे के संपर्क में रहने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर हो जाती है।

शीतलहर से बचाव की सलाह

ठंड के मौसम में शरीर को गर्म रखना बेहद जरूरी है। यदि शरीर कांपने लगे तो इसे नजरअंदाज न करें, क्योंकि यह शरीर के अधिक ठंडा होने का पहला संकेत है। ऐसे में तुरंत घर के अंदर जाएं और गर्म कपड़े पहनें।

लंबे समय तक ठंड में रहने से फ्रॉस्टबाइट हो सकता है। इसमें त्वचा पीली, सख्त और सुन्न हो जाती है। उंगलियां, पैर की उंगलियां, नाक और कान सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। गंभीर स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

मौसम का खेती और अन्य क्षेत्रों पर असर

मौसम की इस स्थिति का असर खेती, पशुपालन, जल आपूर्ति, परिवहन और बिजली आपूर्ति पर भी पड़ सकता है। घने कोहरे के कारण फसलों पर नमी का असर बढ़ सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी से सड़कें बंद हो सकती हैं और बिजली आपूर्ति बाधित हो सकती है।

दक्षिण भारत में मौसम का रुख

दक्षिण भारत में उत्तर-पूर्वी मानसून की बारिश धीरे-धीरे समाप्त होने की ओर है। तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में अगले 48 घंटों में मानसून की गतिविधियां कम हो सकती हैं। हालांकि लक्षद्वीप और निकोबार द्वीप समूह में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है

कुल मिलाकर देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। उत्तर भारत में ठंड, कोहरा और प्रदूषण लोगों के लिए चुनौती बने हुए हैं, जबकि पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी से जनजीवन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना और आवश्यक सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है।

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