दिल्ली, हरियाणा-पंजाब में सर्दी व कोहरे का रेड अलर्ट, जानें पूरे देश के मौसम का हाल

आज, 13 जनवरी, 2025 को जारी पूर्वानुमान के मुताबिक, उत्तराखंड में शीत दिवस (कोल्ड डे), जबकि पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में गंभीर शीत दिवस रहने का अंदेशा जताया गया है।
दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार में घना कोहरा, शीत दिवस और शीतलहर का असर बढ़ने के आसार
दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार में घना कोहरा, शीत दिवस और शीतलहर का असर बढ़ने के आसारफोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में कड़ाके की ठंड व घने कोहरे को लेकर मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया।

  • उत्तर भारत में शीतलहर, गंभीर शीत दिवस और पश्चिमी विक्षोभ के कारण ठंड और बारिश का असर बना हुआ है।

  • कई राज्यों में घने से बहुत घने कोहरे के चलते सड़क, रेल और हवाई यातायात प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।

  • ठंड और प्रदूषण से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस व सांस संबंधी मरीजों को अधिक सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

  • दक्षिण भारत के तमिलनाडु और कोमोरिन क्षेत्र में बारिश, बिजली और तेज हवाओं का अंदेशा जताया गया है।

इस समय देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम की स्थिति काफी बदली हुई है। उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड, घना कोहरा और शीतलहर का असर देखा जा रहा है, वहीं दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में बारिश और तेज हवाओं के आसार बने हुए हैं। यह मौसम केवल आम लोगों के जीवन को ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, खेती, पशुपालन, यातायात और बिजली आपूर्ति जैसे क्षेत्रों को भी प्रभावित कर रहा है।

उत्तर भारत में मौसम की स्थिति

मौसम विभाग के द्वारा आज सुबह, 13 जनवरी, 2025 को जारी ताजा अपडेट में कहा गया है कि उत्तर भारत के ऊपर इस समय तेज गति से चलने वाली पवन प्रणाली सक्रिय है, जिसे उपोष्णकटिबंधीय पछुआ जेट स्ट्रीम कहा जाता है। यह लगभग 12.6 किमी की ऊंचाई पर बह रही है और इसकी गति लगभग 100 नॉट्स के करीब है। इसके कारण वातावरण में ठंड बनी हुई है। इसके साथ ही पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय है, जो उत्तर-पश्चिम भारत में बादल, बारिश और बर्फबारी का कारण बन रहा है।

हरियाणा और उसके आसपास के क्षेत्रों में ऊपरी हवा में चक्रवाती प्रसार बना हुआ है, जिससे मौसम में नमी बनी हुई है और ठंड का असर बढ़ गया है। पश्चिमी हिमालयी इलाकों जैसे हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश और ऊंचे इलाकों में बर्फबारी की संभावना है। उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में भी कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश होने का पूर्वानुमान है।

तापमान में उतार-चढ़ाव

विभाग के मुताबिक, आने वाले कुछ दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत में न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है। इसके बाद धीरे-धीरे तापमान में दो से चार डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है।

महाराष्ट्र में अगले 24 घंटों में न्यूनतम तापमान दो से तीन डिग्री तक बढ़ सकता है, उसके बाद मौसम लगभग स्थिर रहेगा। गुजरात में पहले तापमान बढ़ेगा, फिर अगले दो दिनों में गिरावट आएगी। देश के बाकी हिस्सों में तापमान में कोई खास बदलाव होने की संभावना नहीं है।

देश भर में अधिकतम और न्यूनतम तापमान की बात करें तो कल,12 जनवरी, 2026 को केरल के कोट्टायम में अधिकतम तापमान 36.6 डिग्री सेल्सियस रहा। जबकि कल, देश के मैदानी इलाकों में पंजाब के बठिंडा में न्यूनतम तापमान 0.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

देश की राजधानी दिल्ली में न्यूनतम तापमान पांच से सात डिग्री सेल्सियस दर्ज किया जा रहा है, जबकि कई इलाकों में तापमान पांच डिग्री से नीचे रिकॉर्ड किया गया। दिल्ली-एनसीआर में लुढ़कते पारे के कारण सर्दी के सितम में बढ़ोतरी जारी है।

आज, 13 जनवरी, 2026 को न्यूनतम तापमान के सात डिग्री तथा अधिकतम तापमान के 19 डिग्री रहने का पूर्वानुमान है। हालांकि दिन में धूप खिलने से सर्दी से राहत मिल सकती है, जबकि शाम होते-होते एक बार फिर शीतरलहर के प्रकोप के बढ़ने के आसार जताए गए हैं।

शीतलहर और शीत दिवस की चेतावनी

कई राज्यों में शीतलहर चलने के आसार बने हुए हैं। हिमाचल प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में शीतलहर चल सकती है। उत्तराखंड में शीत दिवस रह सकता है, जबकि पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में शीत दिवस से गंभीर शीत दिवस की स्थिति बन सकती है

मौसम विभाग ने आज, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में भयंकर सर्दी और घने कोहरे के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कोहरे और ठंड को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

कोहरे का प्रकोप

मौसम विभाग के द्वारा घने से बहुत घने कोहरे की चेतावनी भी जारी की गई है। बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में घना कोहरा छा सकता है। वहीं, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बहुत घना कोहरा देखने को मिल सकता है। इससे सड़क, रेल और हवाई यातायात प्रभावित हो सकता है।

स्वास्थ्य पर प्रभाव

घना कोहरा और ठंड लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकते हैं। कोहरे में मौजूद प्रदूषक कण सांस के जरिए फेफड़ों में चले जाते हैं, जिससे खांसी, सांस लेने में दिक्कत और घरघराहट बढ़ सकती है। अस्थमा और ब्रोंकाइटिस के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

आंखों में जलन, लालिमा और संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। ठंड और कोहरे के कारण सर्दी, खांसी, फ्लू, नाक बहना, नाक से खून आना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक ठंड में रहने से शरीर का तापमान तेजी से गिर सकता है।

कंपकंपी को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह शरीर के अधिक ठंडा होने का पहला संकेत है। अधिक ठंड के संपर्क में रहने से शीतदंश (फ्रॉस्टबाइट) हो सकता है, जिसमें उंगलियां, पैर की उंगलियां, नाक और कान सुन्न हो जाते हैं और गंभीर स्थिति में छाले पड़ सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

खेती और पशुपालन पर असर

ठंड और पाले का असर फसलों पर भी पड़ता है। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा और झारखंड में किसानों को सलाह दी गई है कि वे फसलों की सुरक्षा के लिए शाम के समय हल्की और बार-बार सिंचाई करें। इससे फसलों को ठंड से बचाया जा सकता है।

सब्जियों की नर्सरी और छोटे फलदार पौधों को भूसे या पॉलीथीन शीट से ढककर रखने की सलाह दी गई है। इससे मिट्टी का तापमान संतुलित रहता है और फसल को नुकसान कम होता है। पशुपालकों को भी अपने पशुओं को ठंड से बचाने के लिए उचित इंतजाम करने चाहिए।

दक्षिण भारत में मौसम का मिजाज

दक्षिण भारत के कोमोरिन क्षेत्र और उसके आसपास ऊपरी हवा में चक्रवाती प्रसार बना हुआ है। इसके कारण तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में कुछ हिस्सों में गरज के साथ बारिश और बिजली गिरने की आशंका है। कोमोरिन क्षेत्र में तेज हवाएं चल सकती हैं, जिनकी गति 35 से 45 किमी प्रति घंटे से 55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंचने के आसार हैं।

कुल मिलाकर देश के कई हिस्सों में मौसम चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। ठंड, कोहरा, बारिश और तेज हवाओं के कारण आम जनजीवन प्रभावित हो सकता है। लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना चाहिए, अनावश्यक यात्रा से बचना चाहिए और स्वास्थ्य व खेती से जुड़ी सावधानियों को अपनाना चाहिए। सतर्कता और सावधानी ही इस मौसम में सुरक्षित रहने का सबसे अच्छा उपाय है।

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