

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में पेश दो अलग-अलग रिपोर्टों ने देश में जलस्रोतों की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पर्यावरण मंत्रालय द्वारा पेश रिपोर्ट के अनुसार जम्मू-कश्मीर में स्पेस एप्लिकेशन्स सेंटर के एटलस में दर्ज 260 आद्रभूमियों में से 35 जमीन पर “गायब” पाई गईं, जबकि क्षेत्र में 34 नई आद्रभूमियों की पहचान भी हुई है।
दूसरी ओर दिल्ली जल बोर्ड ने अधिकरण को बताया है कि उसके नियंत्रण में अब एक भी जलाशय नहीं है, जबकि राजस्व रिकॉर्ड के मुताबिक पहले उसकी जमीन पर छह जलाशय दर्ज थे, जिनकी जमीन बाद में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, पंपिंग स्टेशन और भूमिगत जलाशय बनाने के लिए स्थानांतरित कर दी गई।
इन दोनों मामलों ने देश में जलस्रोतों के रिकॉर्ड, निगरानी और संरक्षण की व्यवस्था पर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर की आद्रभूमियों की मौजूदा स्थिति पर 12 फरवरी 2026 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में रिपोर्ट प्रस्तुत की है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पर्यावरण मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर वेटलैंड अथॉरिटी को प्राथमिकता में राजस्व रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के लिए ईमेल भेजा था। इसके जवाब में जम्मू-कश्मीर के वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण विभाग ने आद्रभूमियों और झीलों की स्थिति पर प्रगति रिपोर्ट भेजी है। इसमें हर साइट के भौगोलिक निर्देशांक (जियो-कोऑर्डिनेट्स), राजस्व क्षेत्र और वास्तविक स्थिति व सीमा निर्धारण की जानकारी शामिल की गई है।
स्पेस एप्लिकेशन्स सेंटर द्वारा जारी एटलस में कुल 260 आद्रभूमियां दर्ज हैं, जिनमें से 35 साइट "गायब" पाई गई। इसके अलावा, क्षेत्र में 34 नई आद्रभूमियों की पहचान हुई है।
पर्यावरण मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि राज्यों और स्टेट वेटलैंड अथॉरिटीज को अपने क्षेत्र में मौजूद आद्रभूमियों की निगरानी और संरक्षण की पूरी जिम्मेदारी दी गई है।
रिकॉर्ड में छह जलाशय थे, अब एक भी नहीं: दिल्ली जल बोर्ड ने एनजीटी में दी जानकारी
दिल्ली में जलस्रोतों को लेकर एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को जानकारी दी है कि उसके नियंत्रण में कोई भी जलाशय नहीं है।
एनजीटी के आदेश पर दाखिल अपने हलफनामे में जल बोर्ड ने कहा कि राजस्व अभिलेखों के अनुसार पहले उसकी जमीन पर छह जलाशय मौजूद थे, लेकिन बाद में इन जमीनों को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, सीवेज पंपिंग स्टेशन और भूमिगत जलाशय बनाने के लिए स्थानांतरित कर दिया गया।
गौरतलब है कि एनजीटी ने दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) को निर्देश दिया था कि वह राजस्व अभिलेखों के आधार पर अपने नियंत्रण में आने वाले हर जलाशय का क्षेत्रफल और भू-स्थानिक निर्देशांक (जियो-कोऑर्डिनेट्स) सार्वजनिक करे। साथ ही अधिकरण ने यह भी पूछा था कि इन जलाशयों की मौजूदा स्थिति और क्षेत्रफल क्या है, तथा उन पर हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
डीजेबी के मुताबिक, जब इन जमीनों का हस्तांतरण हुआ, उस समय वहां कोई जलाशय मौजूद नहीं था। बाद में इन जगहों पर जल बोर्ड से जुड़ी सुविधाओं का निर्माण किया गया।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जिन जमीनों पर अब डीजेबी के संयंत्र बने हैं, उनका उपयोग पूरी तरह पानी से जुड़ी सेवाओं के लिए किया जा रहा है और इससे लोगों की जल संबंधी जरूरतें पूरी होती हैं।
हालांकि, मौजूदा स्थिति को लेकर डीजेबी का कहना है कि उसके स्वामित्व या प्रबंधन में अब कोई जलाशय नहीं है। यह रिपोर्ट 23 दिसंबर 2025 को तैयार की गई थी, जिसे 9 मार्च 2026 को एनजीटी की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है।