

दिल्ली के पहाड़गंज में भूजल के अनियंत्रित दोहन पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाते हुए दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) को तत्काल और प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
ट्रिब्यूनल ने पाया कि 555 होटल और गेस्टहाउसों में से केवल 162 में ही अब तक पीजोमीटर लगाए गए हैं, जबकि 393 प्रतिष्ठान अब भी बिना इस अनिवार्य उपकरण के भूजल निकाल रहे हैं।
एनजीटी ने जल बोर्ड की धीमी कार्रवाई और अधूरी रिपोर्ट पर नाराजगी जताते हुए कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले सभी प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। साथ ही चार सप्ताह के भीतर ताजा स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया गया है।
ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट किया कि हर बोरवेल पर पीजोमीटर लगाना अनिवार्य है, ताकि भूजल निकासी की सही निगरानी हो सके और उसके अनुसार शुल्क वसूला जा सके। यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का नहीं, बल्कि तेजी से घटते भूजल भंडार और भविष्य की जल सुरक्षा से जुड़ा है।
एनजीटी का संदेश साफ है कि भूजल जैसे अमूल्य प्राकृतिक संसाधन का दोहन अब बिना निगरानी, जवाबदेही और नियमों के पालन के किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
दिल्ली के पहाड़गंज इलाके में भूजल के अंधाधुंध दोहन पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है।
17 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई में ट्रिब्यूनल ने दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) की धीमी कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जिन होटल और गेस्टहाउसों में बिना पीजोमीटर (भूजल की निकासी मापने वाला उपकरण) के भूजल का दोहन किया जा रहा है, उनके खिलाफ जल्द से जल्द और प्रभावी कार्रवाई की जाए।
एनजीटी को जानकारी मिली है कि पिछले तीन महीनों में 555 में से महज 162 होटलों और गेस्टहाउसों में ही पीजोमीटर लगाए गए हैं, जबकि 393 होटल अब भी बिना किसी माप के भूजल निकाल रहे हैं।
जल बोर्ड की सुस्त कार्रवाई पर एनजीटी ने जताई नाराजगी
ट्रिब्यूनल ने यह भी पाया कि जल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट के साथ केवल एक अंतिम नोटिस संलग्न किया है। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले बाकी प्रतिष्ठानों को नोटिस भेजे गए या नहीं।
ऐसे में अदालत ने माना कि डीजेबी ने नियमों का उल्लंघन करने वाले सभी प्रतिष्ठानों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की है। सुनवाई के दौरान जल बोर्ड की ओर से आश्वासन दिया गया कि अब इस मामले में तेजी से कार्रवाई की जाएगी। हालांकि बोर्ड ने मामले में हुई कार्रवाई पर रिपोर्ट दाखिल करने के लिए अदालत से समय मांगा है।
एनजीटी ने याद दिलाया कि डीजेबी ने पहले यह दलील दी थी कि कुछ होटल स्वैच्छिक प्रकटीकरण योजना (वीडीएस) के तहत भूजल निकाल रहे हैं।
लेकिन जांच में ऐसी किसी वैध योजना का कोई ठोस आधार नहीं मिला। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि हर बोरवेल पर पीजोमीटर लगाना अनिवार्य है, ताकि यह पता चल सके कि कितना भूजल निकाला जा रहा है और उसके अनुसार शुल्क भी वसूला जा सके।
393 प्रतिष्ठानों पर अब भी कार्रवाई अधूरी
इससे पहले 1 अप्रैल 2026 के आदेश में भी एनजीटी ने डीजेबी को निर्देश दिया था कि सभी संबंधित होटलों और गेस्टहाउसों में पीजोमीटर लगवाकर भूजल निकासी की निगरानी सुनिश्चित की जाए। इसी क्रम में अदालत ने अब जल बोर्ड को चार सप्ताह के भीतर 555 प्रतिष्ठानों में पीजोमीटर लगाने के सम्बन्ध में ताजा स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
गौरतलब है कि दिल्ली जल बोर्ड ने 16 जुलाई 2026 की अपनी रिपोर्ट में बताया था कि अनुपालन दस्तावेजों के आधार पर 162 प्रतिष्ठानों में डिजिटल जल मीटर/पीजोमीटर लगाए जा चुके हैं।
वहीं बाकी प्रतिष्ठानों को 7 जुलाई 2026 को अंतिम नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर पीजोमीटर लगाने का निर्देश दिया गया है। उन्हें यह भी चेतावनी दी गई है कि आदेश का पालन न करने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
देखा जाए तो यह मामला केवल नियमों के पालन का नहीं, बल्कि भूजल के तेजी से घटते भंडार और आने वाली पीढ़ियों के जल अधिकारों की रक्षा का भी है। एनजीटी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि भूजल जैसे अमूल्य प्राकृतिक संसाधन का दोहन बिना निगरानी और जवाबदेही के स्वीकार नहीं किया जा सकता।