

भोपाल के बड़े तालाब की सेहत से खिलवाड़ रोकने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त निर्देश दिए हैं।
ट्रिब्यूनल ने भोपाल नगर निगम को तालाब के फुल टैंक लेवल (एफटीएल) क्षेत्र में मिट्टी, निर्माण मलबा और अन्य ठोस सामग्री डालने पर रोक लगाने को कहा है।
साथ ही, तालाब से निकाली जाने वाली जलकुंभी और गाद को भी किनारों पर जमा करने के बजाय पूरी तरह पानी से मुक्त कर निर्धारित स्थान पर पहुंचाने का निर्देश दिया है।
एनजीटी ने आर्द्रभूमि और प्रतिबंधित क्षेत्रों में अतिक्रमण व अवैध निर्माण रोकने तथा आर्द्रभूमि नियम, 2017 का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है। 12 अक्टूबर 2026 को न्यायमूर्ति शियो कुमार सिंह की पीठ ने ये निर्देश दिए।
दरअसल, 15 जुलाई 2026 को दैनिक जागरण में प्रकाशित एक खबर में भदभदा चौराहे के पास, ताज होटल के सामने बड़े तालाब के एफटीएल क्षेत्र में कई ट्रक मिट्टी डाले जाने का मामला उठाया गया था। खबर पर स्वतः संज्ञान लेते हुए एनजीटी ने यह कार्रवाई की।
तालाब में मिट्टी और मलबा जमा होने से उसकी जल संग्रहण क्षमता प्रभावित हो सकती है और जलीय पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में इन निर्देशों का उद्देश्य भोपाल की इस महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि को अतिक्रमण और अनुचित कचरा निपटान से बचाना है।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की जीवनरेखा कहे जाने वाले बड़े तालाब की सुरक्षा को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है।
ट्रिब्यूनल ने भोपाल नगर निगम (बीएमसी) को निर्देश दिया है कि तालाब के फुल टैंक लेवल (एफटीएल) क्षेत्र में मिट्टी, खुदाई से निकली सामग्री, निर्माण संबंधी मलबे या किसी अन्य ठोस पदार्थ को न डाला जाए। इससे तालाब की पानी संजोने की क्षमता घट सकती है और उसका पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ सकता है।
12 अक्टूबर 2026 को न्यायमूर्ति शियो कुमार सिंह की पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि तालाब से निकाली जाने वाली जलकुंभी और गाद का निपटान लापरवाही से नहीं किया जाना चाहिए। इन्हें पहले पूरी तरह पानी से मुक्त किया जाए और फिर बिना देरी किए किनारे से हटाकर निर्धारित स्थान पर पहुंचाया जाए, ताकि यह जैविक सामग्री दोबारा तालाब में न पहुंचे और न ही झील के किनारों पर जमा हो।
एनजीटी ने यह भी निर्देश दिया कि आर्द्रभूमि, प्रतिबंधित क्षेत्र और निर्माण निषिद्ध क्षेत्रों में किसी तरह का अतिक्रमण या निर्माण न होने दिया जाए। इसके लिए आर्द्रभूमि (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
इस मामले में एनजीटी ने 15 जुलाई 2026 को दैनिक जागरण में प्रकाशित एक खबर के आधार पर स्वतः संज्ञान लिया था। खबर में भोपाल नगर निगम द्वारा बड़े तालाब के एफटीएल क्षेत्र में कई ट्रक मिट्टी डाले जाने का मामला सामने लाया गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, भदभदा चौराहे के पास तालाब के एफटीएल क्षेत्र में मिट्टी डालने की घटना सामने आई थी। यह वही इलाका है, जहां एक ओर जिला प्रशासन बड़े तालाब के जलग्रहण क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने का अभियान चला रहा था, वहीं दूसरी ओर ताज होटल के सामने तालाब के एफटीएल क्षेत्र में मिट्टी डाले जाने की सूचना मिली थी।
मामला इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि बड़े तालाब जैसे महत्वपूर्ण जलस्रोत की सुरक्षा केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं है। तालाब में मिट्टी और मलबा डालने से उसकी पानी संजोने की क्षमता प्रभावित हो सकती है और जलीय पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में तालाब के किनारों, जलग्रहण क्षेत्र और एफटीएल क्षेत्र की सुरक्षा के लिए नियमों का पालन जरूरी है।
एनजीटी के निर्देशों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बड़े तालाब में जलकुंभी और गाद हटाने जैसे जरूरी काम भी उसकी सेहत के लिए नई समस्या न बन जाएं और भोपाल की इस महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि को अतिक्रमण तथा अनुचित तरीके से कचरे के निपटान से बचाया जा सके।