

पंचमढ़ी की चंपक झील का असल आकार आखिर कितना है? इस सवाल ने झील के संरक्षण की मौजूदा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 11 सितंबर 2026 के आदेश में झील का वैज्ञानिक तरीके से सीमांकन कराने का निर्देश दिया है। वजह है सरकारी दस्तावेजों में झील के क्षेत्रफल को लेकर करीब 20 हेक्टेयर का बड़ा अंतर।
पंचमढ़ी स्पेशल अथॉरिटी डेवलपमेंट एरिया ने दिसंबर 2025 में झील का क्षेत्रफल 43.4 हेक्टेयर बताया था, जबकि संयुक्त समिति की रिपोर्ट में नोटिफाइड वेटलैंड क्षेत्र केवल 23.12 हेक्टेयर बताया गया।
एनजीटी ने कहा है कि झील की सीमा तय करते समय केवल मौजूदा पानी को नहीं, बल्कि उसके मूल क्षेत्र, कैचमेंट, वास्तविक जलभराव क्षेत्र और बफर जोन को भी शामिल किया जाए। इसके लिए जियो-टैगिंग, मैपिंग और ड्रोन सर्वे जैसी तकनीकों का इस्तेमाल होगा।
ट्रिब्यूनल ने झील में पहुंचने वाले प्राकृतिक नालों को बचाने, कचरे और गाद को रोकने, आसपास ग्रीन बेल्ट विकसित करने और पेट्रोल-डीजल से चलने वाली नावों पर रोक लगाने के निर्देश भी दिए हैं।
साथ ही झील के आसपास विकास कार्यों को वेटलैंड नियमों के अनुरूप रखने को कहा गया है। संदेश साफ है—झील को बचाने के लिए सिर्फ उसके पानी की नहीं, बल्कि पूरे प्राकृतिक तंत्र की रक्षा जरूरी है।
मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में पंचमढ़ी की चंपक झील के संरक्षण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कई अहम निर्देश दिए हैं। 11 सितंबर 2026 को दिए अपने आदेश में एनजीटी ने जिला वेटलैंड संरक्षण समिति को झील का वैज्ञानिक तरीके से सीमांकन करने का निर्देश दिया है। इस समिति की अध्यक्षता नर्मदापुरम के कलेक्टर करेंगे।
एनजीटी ने कहा है कि चंपक झील की सीमा तय करते समय उसके मूल क्षेत्र, वास्तविक जलभराव क्षेत्र, कैचमेंट एरिया और बफर जोन को ध्यान में रखा जाए। इसके लिए जियो-टैगिंग, उचित मैपिंग और ड्रोन सर्वे जैसी वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाए।
सरकारी आंकड़ों में झील के आकार को लेकर दिखा अंतर
गौरतलब है कि मामले की सुनवाई के दौरान झील के क्षेत्रफल को लेकर सरकारी दस्तावेजों में बड़ा अंतर सामने आया। न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह की पीठ ने विभिन्न प्राधिकरणों और संयुक्त समिति की रिपोर्टों की समीक्षा की। इसमें पता चला कि पंचमढ़ी स्पेशल अथॉरिटी डेवलपमेंट एरिया ने 30 दिसंबर 2025 को एक पत्र में चंपक झील का कुल क्षेत्रफल 43.4 हेक्टेयर बताया था।
वहीं, संयुक्त समिति की रिपोर्ट में बताया गया कि नोटिफाइड वेटलैंड एरिया लगभग 23.12 हेक्टेयर है। यानी दोनों दस्तावेजों में झील के क्षेत्र को लेकर करीब 20 हेक्टेयर का अंतर है।
ऐसे में एनजीटी ने राज्य वेटलैंड प्राधिकरण को इस अंतर की जांच कर क्षेत्रफल का सत्यापन और जरूरी सुधार करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा है कि झील के पूरे वेटलैंड क्षेत्र को प्रभावी तरीके से संरक्षित किया जाए।
झील में गंदगी पहुंचने से रोकने के निर्देश
एनजीटी ने चंपक झील को पानी पहुंचाने वाले प्राकृतिक नालों को संरक्षित करने पर भी जोर दिया है। झील में जंगल से आने वाले मलबे और कचरे को रोकने के लिए पर्याप्त गाद हटाने और स्क्रीनिंग की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
झील की सीमा से लगे चंपक बंगले और घासभूमि वाले हिस्सों में नियमित पौधरोपण करने को कहा गया है। यहां घने पौधे लगाए जाएं और ग्रीन बेल्ट विकसित कर उसका नियमित रखरखाव किया जाए।
झील के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को देखते हुए एनजीटी ने जिला वेटलैंड संरक्षण समिति, कलेक्टर और पंचमढ़ी स्पेशल डेवलपमेंट अथॉरिटी को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि वेटलैंड के भीतर पेट्रोल या डीजल से चलने वाली नावें न चलाई जाएं।
नियमों के बिना नहीं होगा झील के आसपास विकास
एनजीटी ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि झील और उसके आसपास की सभी गतिविधियों को वेटलैंड (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 के अनुरूप नियंत्रित किया जाए। झील के आसपास किसी भी तरह का विकास कार्य सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना नहीं किया जा सकेगा।
देखा जाए तो चंपक झील के मामले में एनजीटी के ये निर्देश केवल उसकी सीमा तय करने तक सीमित नहीं हैं। आदेश में झील तक पहुंचने वाले प्राकृतिक जलस्रोतों, उसके कैचमेंट, आसपास की ग्रीन बेल्ट और मानवीय गतिविधियों को नियंत्रित करने पर भी जोर दिया गया है।
इससे साफ है कि झील को बचाने के लिए सिर्फ उसके पानी को नहीं, बल्कि उस पूरे प्राकृतिक तंत्र को बचाना जरूरी है जो झील को जिंदा रखता है।