राजस्थान की चांदलई झील से अतिक्रमण हटाएं, गंदा पानी और कचरा डालने पर रोक लगाएं: एनजीटी

लगभग 1,163 वस्त्र उद्योगों द्वारा जल व वायु अधिनियमों के उल्लंघन, सीईटीपी के 21 वर्ष से बंद रहने और बिना अनुमति चल रही 1,255 औद्योगिक इकाइयों पर एनजीटी ने कड़ी नाराजगी जताते हुए पर्यावरणीय क्षति का आकलन व अभियोजन की प्रक्रिया शुरू करने को कहा
राजस्थान की चांदलई झील से अतिक्रमण हटाएं, गंदा पानी और कचरा डालने पर रोक लगाएं: एनजीटी
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राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने 3 जुलाई, 2026 को राजस्थान सरकार के विभिन्न विभागों, विशेषकर जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) की चांदलई झील को अतिक्रमण और कचरा फेंके जाने से बचाने में विफलता पर कड़ी नाराजगी जताई।

न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह की पीठ ने कहा, "यह आश्चर्यजनक है कि राज्य के सभी संबंधित प्राधिकरण कानून का पालन कराने के लिए ईमानदारी, निष्ठा और पूरी सावधानी के साथ अपने दायित्व निभाने के लिए बाध्य थे, लेकिन राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा बताई गई इकाइयों के विरुद्ध कार्रवाई करने में वे अपने कर्तव्यों का पालन नहीं कर सके।"

जयपुर विकास प्राधिकरण की ओर से अधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायाधिकरण की केंद्रीय पीठ ने जयपुर के जिला कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त को तत्काल कार्रवाई कर अभिलेखों और नियमों के अनुसार झील से सभी अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया।

एनजीटी ने यह भी कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि बिना उपचारित गंदा पानी, ठोस कचरा, प्लास्टिक कचरा या अन्य अपशिष्ट झील में न पहुंचे। इसके अलावा, आर्द्रभूमि नियमों की धारा 4 का उल्लंघन कर किए गए सभी निर्माणों को जयपुर नगर निगम तत्काल ध्वस्त करे और इसका पूरा खर्च उल्लंघनकर्ताओं से वसूला जाए।

राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल को भी निर्देश दिया गया कि वह गोयल गंगा डेवलपर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड बनाम भारत संघ एवं अन्य (2018) मामले में उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुरूप पर्यावरणीय क्षति का आकलन करे तथा कानून के अनुसार अभियोजन, कार्रवाई और पर्यावरणीय नुकसान की गणना की प्रक्रिया शुरू करे।

एनजीटी ने जयपुर के जिला कलेक्टर, नगर निगम और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सदस्य सचिव को दो सप्ताह के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया।

याचिका में कहा गया है कि चांदलई झील पर लगातार अतिक्रमण हो रहा है तथा वस्त्र उद्योगों से निकलने वाला प्रदूषित अपशिष्ट जल झील में छोड़ा जा रहा है। यह झील 140 वर्ष से अधिक पुरानी है, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व रखती है तथा रामसर आर्द्रभूमि के रूप में मान्यता प्राप्त है। इसका बांध लगभग वर्ष 1872 में बनाया गया था और यह लगभग 100 प्रवासी पक्षियों की प्रजातियों का महत्वपूर्ण आवास है।

सुनवाई के दौरान केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल, जल संसाधन विभाग, राजस्थान राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण तथा जयपुर कलेक्टर के प्रतिनिधि वाली संयुक्त समिति ने स्थल का निरीक्षण किया। समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि लगभग 1,163 वस्त्र उद्योग वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 तथा जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 का उल्लंघन करते हुए संचालित हो रहे हैं और बिना उपचारित रासायनिक अपशिष्ट जल झील में छोड़ रहे हैं।

याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि अधिकारियों द्वारा जिस साझा अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र (सीईटीपी) को चालू बताया गया था, वह लगभग 21 वर्ष बीत जाने के बाद भी बंद पड़ा है। यह मामला पहले उच्च न्यायालय के समक्ष भी उठाया जा चुका है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता का कहना है कि अनेक उद्योगों में या तो अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र लगाए ही नहीं गए हैं या उन्हें चालू नहीं किया गया है।

राजस्थान सरकार ने अपने जवाब में कहा कि चांदलई बांध के जलग्रहण क्षेत्र में अतिक्रमणों का चिह्नीकरण जारी है। जलग्रहण क्षेत्र की भूमि जयपुर विकास प्राधिकरण के अधीन है। जल संसाधन विभाग अतिक्रमणों को चिह्नित कर कार्रवाई के लिए जेडीए को पत्र भेजता है, लेकिन जेडीए नियमित रूप से कार्रवाई नहीं करता, जिससे अतिक्रमण लगातार बढ़ते जा रहे हैं।

एनजीटी ने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व आदेश में जयपुर विकास प्राधिकरण से सरकारी भूमि के हस्तांतरण के संबंध में रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन अब तक जवाब दाखिल नहीं किया गया है। न्यायाधिकरण ने यह जानना चाहा है कि सरकारी अभिलेखों में दर्ज भूमि किस अधिकार के तहत हस्तांतरित की गई।

राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि संयुक्त समिति की रिपोर्ट के अनुसार सांगानेर और आसपास के क्षेत्रों में लगभग 1,255 औद्योगिक इकाइयां स्थापित हैं। ये अधिकांश वस्त्र उद्योग स्थानीय निकायों, संबंधित विभागों, राजस्व विभाग तथा राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल से आवश्यक अनुमति लिए बिना गैर-अनुमोदित क्षेत्रों में संचालित हो रहे हैं।

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