

सूर्य के कोरोना में अनुप्रस्थ तरंगें सूक्ष्म अशांति पैदा कर स्पेक्ट्रल रेखाओं में असमानता और तापमान रहस्य को समझने में मदद करती हैं।
वैज्ञानिकों ने सिमुलेशन से दिखाया कि चुंबकीय तरंगें बिना प्रवाह भी लाल-नीला स्पेक्ट्रल बदलाव उत्पन्न करती हैं।
कोरोना की ऑप्टिकली पतली संरचना में अलग-अलग वेग वाली रोशनी मिलकर जटिल पैटर्न बनाती है, जिससे नई वेग जैसी धारणा बनती है।
फेज मिक्सिंग प्रक्रिया के कारण सूक्ष्म स्तर पर अशांति बढ़ती है, जिससे तरंगें ऊर्जा फैलाकर सूर्य के बाहरी वातावरण को प्रभावित करती हैं।
नए अध्ययन से संकेत मिलता है कि भविष्य के सौर टेलीस्कोप कोरोना में तरंग-जनित असमानताओं को सीधे देख और माप सकेंगे।
भारत के वैज्ञानिकों ने सूर्य के बाहरी वातावरण यानी कोरोना को समझने की दिशा में एक नई और रोचक खोज की है। यह अध्ययन आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान अनुसंधान संस्थान (एरीज ) नैनीताल और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है।
इस शोध में पाया गया है कि सूर्य के कोरोना में चलने वाली कुछ विशेष प्रकार की तरंगें बिना किसी बड़े प्लाज़्मा बहाव के भी ऐसे संकेत पैदा कर सकती हैं, जिन्हें पहले केवल गैस के तेज प्रवाह का परिणाम माना जाता था। यह शोध प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
सूर्य का कोरोना और उसकी रहस्यमयी गर्मी
सूर्य की सतह को प्रकाशमंडल (फोटोस्फेर) कहा जाता है, लेकिन इसके ऊपर स्थित बाहरी वायुमंडल, जिसे कोरोना कहा जाता है, उससे भी कई गुना अधिक गर्म होता है। यह वैज्ञानिकों के लिए लंबे समय से एक बड़ा रहस्य है कि जब सूर्य की सतह अपेक्षाकृत ठंडी है, तो कोरोना इतना अधिक गर्म क्यों है।
इस रहस्य को समझने के लिए वैज्ञानिक लगातार सूर्य में मौजूद ऊर्जा, तरंगों और चुंबकीय गतिविधियों का अध्ययन कर रहे हैं।
चुंबकीय संरचनाओं में चलने वाली तरंगें
कोरोना में चुंबकीय क्षेत्र की लंबी संरचनाएं होती हैं, जिनमें लगातार तरंगें चलती रहती हैं। इनमें एक प्रकार की तरंगें होती हैं जिन्हें अनुप्रस्थ चुंबकीय-हाइड्रोडायनामिक तरंगें कहा जाता है, जिन्हें वैज्ञानिक भाषा में चुंबक-द्रवगतिकी से जोड़ा जाता है।
ये तरंगें चुंबकीय संरचनाओं को एक ओर से दूसरी ओर हिलाती हैं, जैसे कोई रस्सी हिल रही हो। पहले माना जाता था कि ये तरंगें ज्यादा संपीड़न पैदा नहीं करतीं, इसलिए ये स्पेक्ट्रल संकेतों में बड़ी असमानता नहीं लातीं।
नए अध्ययन में क्या खास पाया गया
शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर आधारित तीन-आयामी सिमुलेशन का उपयोग करके यह देखा कि जब ये तरंगें सूर्य के कोरोना में चलती हैं, तो क्या होता है। उन्होंने एक खुले चुंबकीय क्षेत्र में घनत्व की असमानताओं को भी शामिल किया और तरंगों को नीचे से ऊपर की ओर भेजा।
इसके बाद उन्होंने यह विश्लेषण किया कि यदि इन परिस्थितियों में सूर्य से निकलने वाली रोशनी को मापा जाए, तो वह कैसा दिखाई देगा। इसके लिए उन्होंने लोहे के आयन से बनने वाली एक विशेष प्रकाश रेखा एफई 13 10749 ए का उपयोग किया।
छोटी-छोटी संरचनाओं से बनती है बड़ी जटिलता
सिमुलेशन से पता चला कि जब तरंगें कोरोना में आगे बढ़ती हैं, तो वे समान रूप से नहीं फैलतीं। चुंबकीय संरचना के भीतर घनत्व में छोटे-छोटे अंतर होते हैं। जैसे-जैसे तरंग आगे बढ़ती है, ये अंतर और भी सूक्ष्म हो जाते हैं। इस प्रक्रिया को “फेज मिक्सिंग” कहा जाता है।
इसके कारण छोटे पैमाने पर अशांति (टर्बुलेन्स) पैदा होती है। यानी कोरोना के भीतर प्लाज़्मा एक समान नहीं रहता, बल्कि उसमें अलग-अलग गति से चलने वाले छोटे-छोटे हिस्से बन जाते हैं।
स्पेक्ट्रल रेखाओं में नया संकेत
सूर्य का कोरोना पारदर्शी होता है, यानी एक जगह से निकलने वाली रोशनी दूसरी जगह की रोशनी के साथ मिल जाती है। जब अलग-अलग हिस्सों से आने वाली रोशनी अलग-अलग गति से आती है, तो अंतिम स्पेक्ट्रल रेखा पूरी तरह सममित (सिमेट्रिकल) नहीं रहती।
इसके परिणामस्वरूप स्पेक्ट्रल रेखा में कभी नीली ओर और कभी लाल ओर की असमानता दिखाई देती है। यह असमानता समय और ऊंचाई के साथ बदलती रहती है।
पहले इसे केवल ऊपर की ओर जाने वाले प्लाज़्मा प्रवाह का संकेत माना जाता था, लेकिन इस अध्ययन में पाया गया कि यह प्रभाव तरंगों और सूक्ष्म अशांति के कारण भी बन सकता है।
तेज गति और मजबूत प्रभाव
शोध में यह भी पाया गया कि यह असमानता काफी मजबूत हो सकती है। स्पेक्ट्रल रेखा की तीव्रता में लगभग 20 प्रतिशत तक बदलाव देखा जा सकता है। इसके अलावा, यह प्रभाव ऐसे प्रतीत होते हैं जैसे प्लाज़्मा 30 से 40 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से चल रहा हो।
सबसे रोचक बात यह है कि यह पैटर्न भी ऊपर की ओर उसी गति से चलता है जिस गति से तरंगें आगे बढ़ती हैं।
सूर्य के रहस्य को समझने में नई दिशा
यह अध्ययन बताता है कि सूर्य के कोरोना में केवल गैस का प्रवाह ही नहीं, बल्कि तरंगें और उनसे पैदा होने वाली सूक्ष्म संरचनाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यह खोज सूर्य के तापमान से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे रहस्य को समझने में मदद कर सकती है।
भविष्य में यदि अत्याधुनिक दूरबीनों जैसे डेनियल के. इनोये सोलर टेलीस्कोप (दकिसत) से इन प्रभावों को सीधे देखा जा सके, तो वैज्ञानिक सूर्य की ऊर्जा और गर्मी के स्रोत को और बेहतर तरीके से समझ पाएंगे।
यह शोध इस बात की ओर संकेत करता है कि सूर्य का कोरोना एक अत्यंत जटिल और गतिशील क्षेत्र है, जहां तरंगें, चुंबकीय संरचनाएं और सूक्ष्म अशांति मिलकर ऐसे प्रभाव पैदा करती हैं जो पहले केवल बड़े प्लाज्मा प्रवाह से जुड़े माने जाते थे। यह खोज सूर्य विज्ञान में एक नया अध्याय जोड़ सकती है।