

नए शोध में संभावना जताई गई कि शुक्र के पास कभी चांद था, जो बाद में ग्रह की ओर लौटकर नष्ट हो गया।
कंप्यूटर सिमुलेशन के अनुसार, चांद पहले शुक्र से दूर गया, लेकिन ग्रह की बदलती गति से उसकी कक्षा उलट गई।
वैज्ञानिकों ने शुक्र की घूमने की गति, चांद के वजन और दूरी समेत कई कारकों को मॉडल में शामिल किया।
संभावित चांद शुक्र के बनने के 3 करोड़ से 1.7 अरब साल बाद तक कभी भी नष्ट हुआ होगा।
शोध पृथ्वी और शुक्र के अलग-अलग विकास में चांद की मौजूदगी को एक महत्वपूर्ण कारण मानने की संभावना बताता है।
सौरमंडल का शुक्र ग्रह कई मायनों में बेहद अनोखा है। आकार और घनत्व के मामले में यह पृथ्वी से काफी मिलता-जुलता है, इसलिए इसे अक्सर ‘पृथ्वी का जुड़वां’ भी कहा जाता है। लेकिन दोनों ग्रहों में एक बड़ा अंतर है। पृथ्वी के पास एक बड़ा चांद है, जबकि शुक्र के पास कोई प्राकृतिक उपग्रह नहीं है।
वैज्ञानिक लंबे समय से यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर शुक्र का कोई चांद क्यों नहीं है। क्या शुक्र कभी अपना चांद बना ही नहीं पाया? या फिर अरबों साल पहले उसका भी एक चांद था, जो समय के साथ गायब हो गया?
अरक्षिव नामक पत्रिका में प्रकाशित अब एक नए शोध ने इस रहस्य पर नई रोशनी डाली है। हालांकि शोधकर्ताओं के पास अभी इसका पक्का जवाब नहीं है, लेकिन उनके कंप्यूटर मॉडल एक दिलचस्प संभावना की ओर इशारा करते हैं।
कंप्यूटर मॉडल ने खोला नया रास्ता
इस शोध में शोधकर्ताओं की टीम ने यह समझने के लिए कंप्यूटर मॉडल तैयार किया कि अगर शुक्र के पास कभी एक चांद रहा होता, तो अरबों वर्षों में उसके साथ क्या होता।
शोधकर्ताओं ने कई तरह की परिस्थितियों को मॉडल में शामिल किया। इनमें शुक्र के घूमने की गति, संभावित चांद का आकार और वजन, शुक्र से उसकी दूरी और ग्रह के अंदर होने वाले ज्वारीय घर्षण जैसी चीजें शामिल थीं।
इसके बाद कंप्यूटर में करीब 4.5 अरब साल का समय सिमुलेट किया गया। वैज्ञानिकों ने अलग-अलग परिस्थितियों को बदलकर देखा कि किन हालात में कोई चांद लंबे समय तक शुक्र के साथ रह सकता था और किन परिस्थितियों में वह नष्ट हो सकता था।
पहले दूर गया, फिर लौट आया चांद
शोध का सबसे दिलचस्प हिस्सा चांद की कक्षा से जुड़ा है। कुछ परिस्थितियों में शुक्र का संभावित चांद शुरुआत में ग्रह से दूर जाने लगा।
आमतौर पर माना जाता है कि ज्वारीय प्रभावों के कारण कोई उपग्रह अपने ग्रह से धीरे-धीरे दूर जा सकता है। पृथ्वी का चांद भी आज धीरे-धीरे पृथ्वी से दूर जा रहा है। लेकिन शुक्र के मामले में कहानी अलग हो सकती थी।
कंप्यूटर मॉडल के अनुसार, समय के साथ शुक्र की घूमने की गति में बदलाव आया होगा। इसके कारण चांद की कक्षा की दिशा भी बदल सकती थी। जो चांद पहले शुक्र से दूर जा रहा था, वह बाद में उलटी दिशा में बढ़ते हुए फिर से शुक्र की ओर आने लगा होगा।
आखिरकार वह इतना करीब पहुंच सकता था कि शुक्र के साथ उसका टकराव हो जाता या वह ग्रह के बेहद मजबूत ज्वारीय प्रभावों के कारण नष्ट हो जाता।
अपनी ही वजह से खोया चांद?
शोधकर्ताओं के अनुसार, यह संभावना काफी मजबूत है कि शुक्र का चांद किसी बाहरी घटना के कारण नहीं, बल्कि शुक्र की अपनी परिस्थितियों के कारण खत्म हुआ।
मॉडल के मुताबिक, चांद के आकार और शुक्र की शुरुआती घूमने की गति के आधार पर यह घटना शुक्र के बनने के करीब 3 करोड़ साल से लेकर 1.7 अरब साल के बीच कभी भी हो सकती थी। इसका मतलब यह है कि अगर शुक्र का कभी चांद था, तो वह सौरमंडल के शुरुआती दौर में ही गायब हो गया होगा।
पृथ्वी और शुक्र क्यों अलग हुए?
यह शोध सिर्फ शुक्र के चांद का रहस्य सुलझाने तक सीमित नहीं है। इसका संबंध पृथ्वी और शुक्र के अलग-अलग विकास से भी हो सकता है। पृथ्वी और शुक्र शुरुआत में कई मामलों में एक जैसे रहे होंगे। लेकिन पृथ्वी के पास एक बड़ा चांद बना रहा, जबकि शुक्र का संभावित चांद खत्म हो गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह अंतर दोनों ग्रहों के आगे के विकास को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है।
चांद पृथ्वी के ज्वार-भाटे और ग्रह की गति जैसी कई प्रक्रियाओं को प्रभावित करता है। इसलिए दोनों ग्रहों के इतिहास में चांद की मौजूदगी या गैर-मौजूदगी ने उनकी दिशा अलग करने में भूमिका निभाई हो सकती है।
अभी रहस्य पूरी तरह खत्म नहीं हुआ
हालांकि नए शोध से एक आकर्षक संभावना सामने आई है, लेकिन वैज्ञानिक अभी यह दावा नहीं कर रहे कि शुक्र के पास निश्चित रूप से कभी चांद था। यह अध्ययन मुख्य रूप से कंप्यूटर सिमुलेशन पर आधारित है। इसमें दिखाया गया है कि कुछ परिस्थितियों में शुक्र का चांद बन सकता था और बाद में ग्रह की अपनी गतिविधियों के कारण नष्ट हो सकता था।
इसलिए शुक्र का असली रहस्य अभी बाकी है। लेकिन यह नई संभावना जरूर बताती है कि शायद शुक्र हमेशा से बिना चांद का ग्रह नहीं था। हो सकता है, अरबों साल पहले उसके आसमान में भी एक चांद दिखाई देता रहा हो - और फिर धीरे-धीरे वह अपने ही ग्रह की ओर लौटकर हमेशा के लिए गायब हो गया।