

एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि मलेरिया ने अफ्रीका में शुरुआती इंसानों की बसावट और उनके विकास को गहराई से प्रभावित किया। मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट ऑफ जियोएंथ्रोपोलॉजी और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के अनुसार, पिछले करीब 74,000 वर्षों में यह बीमारी सिर्फ स्वास्थ्य संकट नहीं रही, बल्कि इंसानी इतिहास को आकार देने वाली एक महत्वपूर्ण ताकत रही।
अध्ययन बताता है कि जहां मलेरिया का खतरा अधिक था, वहां शुरुआती इंसान या तो बसते नहीं थे या लंबे समय तक टिक नहीं पाते थे। इससे वे सुरक्षित क्षेत्रों की ओर बढ़े और अलग-अलग समूहों में बंट गए। इस बिखराव ने उनके आपसी संपर्क और जीन के आदान-प्रदान को प्रभावित किया।
समय के साथ यह दूरी इंसानों की बनावट, उनके जीन और उनके आपसी संबंधों को प्रभावित करती गई। मतलब आज इंसानों की जो विविधता दिखती है, उसकी जड़ें कहीं न कहीं इसी इतिहास में छिपी हैं।
इस अध्ययन की एक और खास बात यह है कि यह इंसानी विकास की कहानी को नए नजरिए से देखता है। अब तक बीमारियों को सिर्फ एक चुनौती माना जाता था, लेकिन यह अध्ययन दर्शाता है कि वे हमारे इतिहास को गढ़ने वाली एक बड़ी ताकत भी थीं।
कल्पना कीजिए एक ऐसी दुनिया, जहां दुश्मन दिखाई नहीं देता, न कोई आवाज, न कोई चेहरा, फिर भी वही तय करता है कि इंसान कहां रहेगा, कहां नहीं, कैसे मिलेगा और कैसे जिएगा।
हैरानी की बात है कि हजारों साल पहले, जब इंसान इतिहास लिखना भी नहीं जानते थे, तब मलेरिया नाम की बीमारी दबे पांव हमारी कहानी गढ़ रही थी। उस समय यह महज जान लेने वाली बीमारी नहीं थी, बल्कि एक ऐसी ताकत थी जिसने इंसानों को बिखेरा, उन्हें नए रास्ते चुनने पर मजबूर किया और धीरे-धीरे हमें वह बनाया, जो हम आज हैं।
मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट ऑफ जियोएंथ्रोपोलॉजी और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किए नए अध्ययन से पता चला है कि पिछले 74,000 सालों में मलेरिया ने अफ्रीका में शुरुआती इंसानों की जिंदगी को गहराई से प्रभावित किया।
इस बीमारी ने हमारे पूर्वजों को सुरक्षित जगहों की तलाश करने पर मजबूर किया, जिससे वो अलग-अलग समूहों में बिखर गए और उनका आपस में मिलना-जुलना भी बदल गया।
अब तक वैज्ञानिक मानते थे कि इंसान कहां रहेगा, यह सिर्फ मौसम और जलवायु तय करते हैं। लेकिन यह नया अध्ययन बताता है कि बीमारियां, खासतौर पर मलेरिया, भी इसमें उतनी ही बड़ी भूमिका निभा रही थीं।
जब बीमारी गढ़ रही थी इंसान की कहानी
प्रतिष्ठित जर्नल साइंस एडवांसेज में प्रकाशित इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने यह समझने का प्रयास किया है कि प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम नाम का परजीवी, जो मलेरिया फैलाता है, कैसे उस दौर में, इंसानों के रहने की जगहों को प्रभावित कर रहा था। यह वो समय था जब इंसान अफ्रीका से बाहर फैलना शुरू ही कर रहे थे और खेती की शुरुआत भी नहीं हुई थी।
अध्ययन में पाया गया कि जहां मलेरिया का खतरा ज्यादा था, वहां इंसान या तो बसते नहीं थे। यदि बसते भी थे तो ज्यादा समय तक टिक नहीं पाते थे। यानी बीमारी ने इंसानों को खतरनाक इलाकों से दूर धकेला और अलग-अलग समूहों में बंटने को मजबूर कर दिया।
कैसे बिखराव से बनी इंसान की पहचान
समय के साथ, यही बिखराव इंसानों के विकास की कहानी बन गया। अलग-अलग समूहों का मिलना, अलग होना और जीन का आदान-प्रदान, इन सब पर मलेरिया का असर पड़ा।
इसकी वजह से अलग-अलग समूह अलग-अलग जगहों पर बस गए, जिससे उनके बीच संपर्क कम हुआ। समय के साथ यह दूरी इंसानों की बनावट, उनके जीन और उनके आपसी संबंधों को प्रभावित करती गई। मतलब आज इंसानों की जो विविधता दिखती है, उसकी जड़ें कहीं न कहीं इसी इतिहास में छिपी हैं।
वैज्ञानिकों ने मच्छरों के फैलाव, पुराने मौसम के आंकड़ों और बीमारी के जोखिम को जोड़कर यह अनुमान लगाया कि कहां मलेरिया ज्यादा फैलता था। फिर उन्होंने इसे उस समय के इंसानी जीवन-क्षेत्र से मिलाया, और तस्वीर साफ हो गई, इंसान उस समय मलेरिया से बचने के लिए अपना रास्ता बदल रहे थे। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एंड्रिया मैनिका के मुताबिक, “मलेरिया ने इंसानी समाज को अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया, और यही बंटवारा आज की मानव संरचना का आधार बना।“
इस अध्ययन की एक और खास बात यह है कि यह इंसानी विकास की कहानी को नए नजरिए से देखता है। अब तक बीमारियों को सिर्फ एक चुनौती माना जाता था, लेकिन यह अध्ययन दर्शाता है कि वे हमारे इतिहास को गढ़ने वाली एक बड़ी ताकत भी थीं।
मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट की प्रोफेसर एलेनोर स्केरी का कहना है, “हमने पहली बार यह दिखाया है कि बीमारी भी इंसान के शुरुआती इतिहास को आकार देने में अहम भूमिका निभाती रही है।“
यह कहानी हमें याद दिलाती है, इंसान का इतिहास सिर्फ लड़ाइयों, मौसम या भूगोल की कहानी नहीं है। यह उन अदृश्य खतरों की भी कहानी है, जिन्होंने हमें बार-बार रास्ता बदलने पर मजबूर किया… और उसी में हमने खुद को पाया।