नया ब्रह्मांडीय रहस्य: पृथ्वी से 65 प्रकाश वर्ष दूर छिपे मिले चार सफेद बौने तारे

हमारे पड़ोसी अंतरिक्ष में मिले चार सफेद बौने अनदेखे तारे, वैज्ञानिकों को मिली बड़ी सफलता
25 प्रकाश वर्ष दूर जी 203-47 प्रणाली ने वैज्ञानिकों को चौंकाया, क्योंकि इसकी गति और बनावट बेहद अनोखी मिली।
25 प्रकाश वर्ष दूर जी 203-47 प्रणाली ने वैज्ञानिकों को चौंकाया, क्योंकि इसकी गति और बनावट बेहद अनोखी मिली।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के करीब चार छिपे सफेद बौने तारों की खोज की, जो लाल बौने तारों के पीछे छिपे थे।

  • हबल टेलीस्कोप की मदद से अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने नए तारों की पहचान की, जिससे स्थानीय तारकीय गणना में सुधार हुआ।

  • 25 प्रकाश वर्ष दूर जी 203-47 प्रणाली ने वैज्ञानिकों को चौंकाया, क्योंकि इसकी गति और बनावट बेहद अनोखी मिली।

  • नई खोज से पता चला कि हमारे आसपास अंतरिक्ष में कई और छिपे सफेद बौने तारे मौजूद हो सकते हैं।

  • लाल बौने तारों के अध्ययन से वैज्ञानिकों को ब्रह्मांडीय विकास और तारों के पुराने इतिहास को समझने में मदद मिलेगी।

अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने हमारी आकाशगंगा के नजदीकी हिस्से में चार ऐसे सफेद बौने तारों की खोज की है, जो अब तक छिपे हुए थे। यह खोज यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक और यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो बोल्डर के वैज्ञानिकों की टीम ने की है। ये सभी तारे पृथ्वी से लगभग 65 प्रकाश वर्ष की दूरी के अंदर मौजूद हैं। इनमें से एक तारा सूर्य का नौवां सबसे नजदीकी ज्ञात सफेद बौना तारा है। यह शोध मंथली नोटिस ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी में प्रकाशित किया गया है।

यह खोज वैज्ञानिकों के लिए इसलिए खास है क्योंकि ये सफेद बौने तारे सीधे दिखाई नहीं दे रहे थे। ये सभी लाल बौने तारों के साथ एक जोड़ी में मौजूद हैं। लाल बौने तारे आकार में बड़े और ज्यादा चमकीले होते हैं, इसलिए उनकी रोशनी में सफेद बौने तारे छिप जाते हैं। सामान्य दूरबीनों से देखने पर ये सिस्टम एक ही तारे जैसे दिखाई देते थे।

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सही तरीके और नई तकनीक से मिली सफलता

वैज्ञानिकों ने इन छिपे हुए तारों को खोजने के लिए तारों की गति का अध्ययन किया। जब कोई बड़ा तारा किसी दूसरे तारे की परिक्रमा करता है, तो उसके गुरुत्वाकर्षण के कारण पहला तारा थोड़ा-थोड़ा हिलता हुआ दिखाई देता है। इस हलचल को रेडियल वॉबल कहा जाता है।

इन चारों तारों में ऐसी ही हलचल देखी गई, जिससे वैज्ञानिकों को शक हुआ कि इनके पास कोई भारी साथी तारा मौजूद हो सकता है। इसके बाद वैज्ञानिकों ने हबल स्पेस टेलीस्कोप से मिलने वाली पराबैंगनी (अल्ट्रावायलेट) रोशनी की जानकारी का इस्तेमाल किया।

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सफेद बौने तारे पराबैंगनी रोशनी में ज्यादा आसानी से दिखाई देते हैं, लेकिन लाल बौने तारों में होने वाली तेज चमक और गतिविधियां कई बार भ्रम पैदा कर सकती हैं। वैज्ञानिकों ने विशेष तकनीकों से इन संकेतों की जांच की और चारों सफेद बौने तारों की मौजूदगी की पुष्टि की।

एक तारा बना वैज्ञानिकों के लिए रहस्य

इन चार प्रणालियों में जी 203-47 नाम का तारा वैज्ञानिकों के लिए सबसे ज्यादा दिलचस्प साबित हुआ। यह पृथ्वी से केवल 25 प्रकाश वर्ष दूर है, लेकिन इसके साथी सफेद बौने तारे को खोजने में वैज्ञानिकों को 27 साल लग गए।

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इस प्रणाली में लाल बौना तारा अपने सफेद बौने साथी की परिक्रमा केवल 14.9 दिनों में पूरी करता है। आमतौर पर इतनी नजदीकी दूरी पर दोनों तारों के बीच गुरुत्वाकर्षण का असर इतना ज्यादा होता है कि वे एक-दूसरे के साथ तालमेल में घूमने लगते हैं। इसे ज्वारीय लॉकिंग कहा जाता है।

लेकिन जी 203-47 में ऐसा नहीं हुआ। इसका लाल बौना तारा बहुत धीरे घूमता है और एक चक्कर पूरा करने में 100 दिन से ज्यादा समय लेता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह प्रणाली सामान्य तरीके से नहीं बनी होगी और इसका इतिहास बाकी तारों से अलग रहा होगा।

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पास के अंतरिक्ष में अभी भी छिपे हैं कई तारे

इस खोज से वैज्ञानिकों को हमारे आसपास मौजूद सफेद बौने तारों की संख्या समझने में मदद मिलेगी। पहले के वैज्ञानिक मॉडल बताते थे कि पृथ्वी के 65 प्रकाश वर्ष के दायरे में लगभग चार से पांच ऐसे सफेद बौने और लाल बौने तारों की जोड़ियां हो सकती हैं। नई खोज में चार ऐसी प्रणालियां मिलना इन अनुमानों से मेल खाता है।

हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि खोज अभी पूरी नहीं हुई है। पास के लाल बौने तारों में से केवल लगभग 30 प्रतिशत की ही अच्छी तरह जांच की गई है। इसका मतलब है कि हमारे आसपास अंतरिक्ष में कई और छिपे हुए सफेद बौने तारे मौजूद हो सकते हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार, अगर लाल बौने तारों की अधिक गहराई से जांच की जाए तो आने वाले समय में कई नई खोजें हो सकती हैं। यह खोज एक बार फिर दिखाती है कि पृथ्वी के सबसे नजदीकी अंतरिक्ष क्षेत्र में भी अभी कई रहस्य छिपे हुए हैं।

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