पावना नदी की हालत गंभीर: सीधे नदी में मिल रहा 20 गांवों का गंदा पानी

रिपोर्ट के मुताबिक 20 गांवों का गंदा पानी और सीवेज सीधे पावना नदी में मिल रहा है, जिससे नदी का पारिस्थितिकी तंत्र बुरी तरह प्रभावित हो रहा है
प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक
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सारांश
  • पावना नदी में 20 गांवों का गंदा पानी सीधे मिल रहा है, जिससे नदी का पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहा है।

  • रिपोर्ट में सीवेज प्रबंधन की कमी उजागर हुई है। 20 गांवों में सीवेज प्रबंधन की स्थिति चिंताजनक है। करीब 73 फीसदी घरों में सेप्टिक टैंक सिस्टम है, जबकि 27 फीसदी घर सिंगल-पिट, टू-पिट या सामुदायिक लीक पिट पर निर्भर हैं।

  • लेकिन इनमें से 57 फीसदी घरों का पानी सीधे खुले नालों में जा रहा है और फिर पावना नदी में मिल रहा है। पुणे जिला परिषद और पीएमआरडीए को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स की स्थापना में तेजी लाने की जरूरत है।

महाराष्ट्र के पुणे में पावना नदी अब गंभीर संकट में है। नदी के दोनों किनारों पर बसे 20 गांवों से निकलने वाला गंदा पानी और सीवेज प्राकृतिक नालों के जरिए सीधे नदी में मिल रहा है, जिससे नदी का पारिस्थितिकी तंत्र बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

यह भयावह स्थिति 9 फरवरी 2026 को पेश हुई संयुक्त समिति की रिपोर्ट में सामने आई है, जिसे नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा 20 अगस्त 2025 को दिए आदेश पर तैयार किया गया है।

संयुक्त समिति की रिपोर्ट ने खोली पोल

रिपोर्ट में कहा गया है कि पावना नदी में गंदगी या सीवेज प्रदूषण को कम करने के लिए अलग-अलग प्रस्तावित उपायों में तेजी लाने के लिए पुणे जिला परिषद और पुणे मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएमआरडीए) की इस मामले प्रतिक्रिया बेहद जरूरी है, क्योंकि सीवरेज प्रबंधन और सफाई की जिम्मेदारी उनके कानूनन दायित्व में आती है।

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रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 20 गांवों में सीवेज प्रबंधन की स्थिति चिंताजनक है। करीब 73 फीसदी घरों में सेप्टिक टैंक सिस्टम है, जबकि 27 फीसदी घर सिंगल-पिट, टू-पिट या सामुदायिक लीक पिट पर निर्भर हैं। लेकिन इनमें से 57 फीसदी घरों का पानी सीधे खुले नालों में जा रहा है और फिर पावना नदी में मिल रहा है।

करीब 43 फीसदी घरों को सेप्टिक टैंक के प्रबंधन के लिए लीच/सोख पिट सिस्टम से जोड़ा गया है।

गहुंजे और सोमटणे जैसे घनी आबादी वाले गांवों में स्थिति और भी गंभीर है, यहां 85 फीसदी और 65 फीसदी घरों का सीवेज सीधे नदी में पहुंच रहा है। इसी तरह घरों से निकलने वाले गंदे पानी (ग्रे वाटर) की स्थिति भी भयावह है। महज केवल 8.3 फीसदी घरों में किचन गार्डन सिस्टम है, बाकी सभी का पानी नालों के जरिए नदी में गिर रहा है।

इस पर अंकुश लगाने के लिए पुणे जिला परिषद ने व्यक्तिगत और सामुदायिक लीक/सोख पिट तथा किचन गार्डन सिस्टम स्थापित करने के लिए आदेश जारी किए हैं। लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश सिस्टम अभी अनुमोदन या टेंडर की प्रक्रिया में अटके हुए हैं, और जिला परिषद ने इस मामले में कोई ठोस जानकारी नहीं दी है।

समय पर कार्रवाई की जरूरत

हालांकि पुणे मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी और जिला परिषद ने पावना नदी में गंदा पानी पहुंचाने वाले 15 प्राकृतिक नालों की पहचान की है। इन्हें साफ करने और सीवेज प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए पीएमआरडीए) ने 14 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है, जिनकी कुल क्षमता 5.84 मिलियन लीटर प्रतिदिन है।

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ग्रे वॉटर के लिए सॉलिड इमोबिलाइज्ड बायो-फिल्टर (एसआईबीएफ) तकनीक और ब्लैक वॉटर के लिए मूविंग बेड बायोफिल्म रिएक्टर (एमएमबीआर) तकनीक का उपयोग किया जाएगा।

हालांकि, इन ट्रीटमेंट प्लांट्स का कार्य भी अभी अनुमोदन या टेंडरिंग प्रक्रिया में अटका हुआ है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि प्रस्ताव की जानकारी देने के अलावा, पुणे मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी और जिला परिषद ने इस मामले में कोई ठोस रिकॉर्ड या कार्रवाई नहीं दिखाई है।

ऐसे में पावना नदी की हालत सुधारने के लिए अब समय पर प्रभावी कार्रवाई और जवाबदेही बेहद जरूरी है।

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