तेजी से डूब रहे हैं नदियों के डेल्टा, 23 करोड़ से ज्यादा लोगों पर मंडराया खतरा

यह अध्ययन बताता है कि मानवजनित गतिविधियों के कारण दुनिया के कई नदी डेल्टा तेजी से धंस रहे हैं और बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है
मेकांग, गंगा-ब्रह्मपुत्र, नील, मिसिसिपी, येलो और चाओ फ्राया डेल्टा सबसे ज्यादा प्रभावित और तत्काल समाधान की आवश्यकता वाले क्षेत्र हैं।
मेकांग, गंगा-ब्रह्मपुत्र, नील, मिसिसिपी, येलो और चाओ फ्राया डेल्टा सबसे ज्यादा प्रभावित और तत्काल समाधान की आवश्यकता वाले क्षेत्र हैं।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • दुनिया के 40 बड़े नदी डेल्टा में से 18 ऐसे हैं जहां जमीन का धंसना समुद्र स्तर से तेज है।

  • लगभग 23 करोड़ 60 लाख लोग डेल्टा क्षेत्रों में रहते हैं, जो बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं के लिए भारी खतरे में हैं।

  • भूजल अत्यधिक दोहन, नदियों में मिट्टी की कमी और तेज शहरीकरण डेल्टा के धंसने के मुख्य मानवजनित कारण हैं।

  • मेकांग, गंगा-ब्रह्मपुत्र, नील, मिसिसिपी, येलो और चाओ फ्राया डेल्टा सबसे ज्यादा प्रभावित और तत्काल समाधान की आवश्यकता वाले क्षेत्र हैं।

  • समाधान में भूजल संरक्षण, नदियों में मिट्टी की आपूर्ति बढ़ाना और संतुलित शहरी विकास शामिल हैं, जो समस्या को रोक सकते हैं।

हाल ही में नेचर नाम की एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक पत्रिका में एक अहम शोध प्रकाशित हुआ है। इस शोध में बताया गया है कि दुनिया के कई बड़े नदी डेल्टा धीरे-धीरे नीचे धंस रहे हैं। कई जगहों पर जमीन का धंसना समुद्र के स्तर बढ़ने से भी तेज है। इससे इन इलाकों में रहने वाले लाखों-करोड़ों लोगों के लिए बाढ़ और नुकसान का खतरा बढ़ रहा है।

नदी डेल्टा क्या होते हैं?

नदी डेल्टा वह क्षेत्र होता है जहां कोई नदी समुद्र में मिलती है। यहां नदी अपने साथ लाई हुई मिट्टी जमा करती है। इसी वजह से डेल्टा की जमीन बहुत उपजाऊ होती है। इन क्षेत्रों में खेती अच्छी होती है और बड़ी आबादी रहती है। भारत का गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा और मिस्र का नील डेल्टा इसके अच्छे उदाहरण हैं।

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यह अध्ययन वर्जीनिया टेक विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किया। वैज्ञानिकों ने आधुनिक उपग्रह तकनीक की मदद से जमीन की ऊंचाई में हो रहे बदलावों को बहुत बारीकी से मापा।

क्या कहता है शोध?

इस अध्ययन में दुनिया के 40 बड़े नदी डेल्टा की जांच-पड़ताल की गई। नतीजों से पता चला कि 40 में से 18 डेल्टा ऐसे हैं जहां जमीन का धंसना समुद्र के बढ़ते स्तर से तेज है। इसका सीधा मतलब है कि इन जगहों पर बाढ़ का खतरा बहुत अधिक है। लगभग 23 करोड़ 60 लाख लोग इन खतरे वाले डेल्टा क्षेत्रों में रहते हैं।

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जमीन धंसने के मुख्य कारण

जमीन के धंसने के तीन बड़े कारण सामने आए हैं। पहला कारण है भूजल का अत्यधिक उपयोग। कई क्षेत्रों में लोग जमीन के नीचे से बहुत ज्यादा पानी निकाल रहे हैं। जब पानी निकल जाता है, तो जमीन के अंदर खाली जगह बन जाती है और जमीन नीचे बैठने लगती है।

दूसरा कारण है नदियों में मिट्टी की कमी। पहले नदियां अपने साथ बहुत सारी मिट्टी समुद्र तक पहुंचाती थीं। लेकिन अब बांध और नहरों के कारण यह मिट्टी डेल्टा तक नहीं पहुंच पा रही है। इससे जमीन कमजोर हो जाती है।

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मेकांग, गंगा-ब्रह्मपुत्र, नील, मिसिसिपी, येलो और चाओ फ्राया डेल्टा सबसे ज्यादा प्रभावित और तत्काल समाधान की आवश्यकता वाले क्षेत्र हैं।

तीसरा कारण है तेज शहरीकरण। डेल्टा क्षेत्रों में शहर तेजी से फैल रहे हैं। भारी इमारतें, सड़कें और निर्माण कार्य जमीन पर दबाव डालते हैं, जिससे जमीन और तेजी से धंसती है।

कौन-कौन से डेल्टा सबसे ज्यादा प्रभावित हैं?

अध्ययन में मेकांग, नील, गंगा-ब्रह्मपुत्र, मिसिसिपी, येलो रिवर और चाओ फ्राया जैसे बड़े डेल्टा सबसे ज्यादा प्रभावित पाए गए। कुछ जगहों पर जमीन समुद्र के स्तर बढ़ने की गति से दोगुनी रफ्तार से नीचे जा रही है।

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यह समस्या क्यों गंभीर है?

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह कोई दूर की समस्या नहीं है, बल्कि अभी की समस्या है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो बाढ़, जमीन का नुकसान और लोगों का विस्थापन बढ़ जाएगा। इससे खेती, घर और रोजगार सभी प्रभावित होंगे।

समाधान क्या हो सकते हैं?

इस समस्या का अच्छा पहलू यह है कि इसके कारण मानवजनित गतिविधियों से जुड़े हैं। अगर भूजल का सीमित और समझदारी से उपयोग किया जाए, नदियों को प्राकृतिक रूप से बहने दिया जाए और शहरों का विकास संतुलित तरीके से किया जाए, तो डेल्टा को बचाया जा सकता है।

यह अध्ययन हमें चेतावनी देता है कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है। सही फैसले लेकर हम नदी डेल्टा क्षेत्रों को सुरक्षित कर सकते हैं और करोड़ों लोगों के भविष्य को बचा सकते हैं।

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