

रांची की जीवनरेखा कही जाने वाली हरमू नदी में प्रदूषण रोकने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
रांची नगर निगम की संयुक्त जांच में नदी से जुड़े सभी सात सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बंद पाए गए। एक अक्टूबर 2026 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को इसकी जानकारी दी गई। इसके बाद नगर निगम ने झारखंड अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (जेयूआईडीसीओ) को पत्र लिखकर संयंत्रों की मरम्मत कराने और उन्हें अपने हवाले करने को कहा है।
करीब दो दशकों से हरमू नदी अतिक्रमण, सिकुड़ते दायरे और प्रदूषण की मार झेल रही है। नदी में प्लास्टिक और ठोस कचरा फेंके जाने के साथ घरेलू सीवेज भी लगातार बहाया जा रहा है।
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि एसटीपी बंद होने या अपेक्षित क्षमता से काम नहीं करने के कारण बिना उपचार वाला गंदा पानी नए नालों और अवैध निकास बिंदुओं के जरिए सीधे नदी में पहुंच रहा है।
आवेदक ने सभी एसटीपी की क्षमता, कामकाज और उन्हें पूरी तरह चालू करने की समय-सीमा बताने वाली रिपोर्ट मांगी है। साथ ही, संयंत्रों के चालू होने तक सीवेज को नदी में गिरने से रोकने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है। मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर 2026 को होगी।
रांची की जीवनरेखा कही जाने वाली हरमू नदी प्रदूषण और प्रशासनिक उदासीनता की गहरी मार झेल रही है। नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए बनाए गए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) खुद बदहाली का शिकार हैं। रांची नगर निगम (आरएमसी) की संयुक्त जांच में नदी से जुड़े सभी सात एसटीपी बंद पाए गए। एक अक्टूबर 2026 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को यह जानकारी दी गई।
इसके बाद नगर निगम ने झारखंड अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (जेयूआईडीसीओ) को पत्र लिखकर इन संयंत्रों की मरम्मत कराने और उन्हें नगर निगम को सौंपने को कहा है।
हरमू नदी को फिर से साफ और बेहतर बनाने की परियोजना झारखंड के नगर विकास एवं आवास विभाग के तहत जेयूआईडीसीओ चला रहा है। रांची नगर निगम ने एनजीटी से मामले में आगे की प्रगति और संबंधित दस्तावेजों के साथ नया हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा है। इस मामले में अगली सुनवाई 4 नवंबर 2026 को होगी।
यह मामला हरमू नदी से जुड़े सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थिति और नदी में बिना उपचार के छोड़े जा रहे गन्दे पानी से जुड़ा है। आवेदक ने एनजीटी से सभी एसटीपी की क्षमता, कामकाज और प्रदर्शन से जुड़ी विस्तृत व सत्यापन योग्य रिपोर्ट मांगी है। साथ ही, इन संयंत्रों को पूरी तरह चालू करने की समय-सीमा तय करने की भी मांग की गई है।
आवेदन में कहा गया है कि पिछले करीब दो दशकों से हरमू नदी अतिक्रमण, नदी की चौड़ाई घटने और गंभीर प्रदूषण की समस्या से जूझ रही है। नदी में ठोस कचरा और प्लास्टिक फेंके जाने के साथ-साथ घरेलू सीवेज भी लगातार बहाया जा रहा है।
हालांकि नदी के पुनर्जीवन के लिए रांची नगर निगम ने कई एसटीपी बनाए, लेकिन इसके बावजूद प्रदूषण पर प्रभावी रोक नहीं लग सकी। आवेदन के मुताबिक, नए नाले और अवैध निकास पॉइंट के जरिए बिना उपचार वाला सीवेज अब भी नदी में छोड़ा जा रहा है।
आवेदन में मीडिया रिपोर्टों और मौके पर जुटाए गए साक्ष्यों का हवाला देते हुए कहा गया है कि बनाए गए एसटीपी या तो बंद हैं, या अपेक्षित क्षमता से काम नहीं कर रहे। कुछ संयंत्र पूरी तरह निष्क्रिय बताए गए हैं। इसके बावजूद गंदा पानी सीधे नदी में पहुंच रहा है।
आवेदक ने मांग की है कि सभी ट्रीटमेंट प्लांट के चालू होने तक बिना उपचार वाले सीवेज को नदी में गिरने से रोका जाए। इसके लिए सीवेज का मौके पर ही अस्थाई उपचार करने या उसे किसी वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए दूसरी जगह मोड़ने जैसे कदम उठाए जाएं।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि झारखंड अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड इन सातों संयंत्रों की मरम्मत कब तक पूरी करता है और नदी में गंदे पानी का प्रवाह रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।