

बीकानेर के खारा औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण और लोगों की सेहत को लेकर चिंता गहरा गई है। गांव खारा और आसपास के औद्योगिक इलाकों में 694 घरों के स्वास्थ्य सर्वेक्षण के दौरान 121 लोगों में सांस संबंधी बीमारियों के लक्षण मिले।
इन लोगों को विस्तृत चिकित्सकीय जांच के लिए भेजा गया, जबकि प्रभावित क्षेत्र में समय-समय पर चिकित्सा शिविर भी लगाए गए।
इस बीच, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की भोपाल स्थित केंद्रीय पीठ ने 26 अक्टूबर 2026 को राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन करने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
बोर्ड ने ट्रिब्यूनल को बताया कि जांच के बाद 21 औद्योगिक इकाइयों को बंद करने के नोटिस जारी किए गए हैं। एनजीटी ने तीन सप्ताह के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।
अधिकरण ने औद्योगिक क्षेत्र में पर्याप्त पौधरोपण करने और लगाए गए पौधों को जीवित रखने की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। हालांकि, स्वास्थ्य सर्वेक्षण में मिले लक्षणों को सीधे औद्योगिक प्रदूषण का परिणाम नहीं माना जा सकता। इसके लिए वैज्ञानिक जांच जरूरी है।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों की सेहत से जुड़ी चिंताओं पर कितनी प्रभावी कार्रवाई करता है। मामले की अगली सुनवाई 18 दिसंबर 2026 को होगी।
राजस्थान में बीकानेर जिले के खारा औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर अब कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की भोपाल स्थित सेंट्रल बेंच ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। 26 अक्टूबर 2026 को दिए अपने इस आदेश में ट्रिब्यूनल ने बोर्ड से तीन सप्ताह के भीतर की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है।
इस मामले में चिंता सिर्फ पर्यावरण को हो रहे नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों की सेहत भी सवालों के घेरे में है।
गांव खारा और आसपास के औद्योगिक इलाकों में किए गए स्वास्थ्य सर्वेक्षण के दौरान 121 लोगों में सांस संबंधी बीमारियों के लक्षण मिले। यह आंकड़ा औद्योगिक गतिविधियों के बीच रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य की निगरानी और समय पर इलाज की जरूरत को रेखांकित करता है।
राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एनजीटी को बताया कि उसने संबंधित औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण किया था। जांच के बाद पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन करने वाली 21 इकाइयों को बंद करने के नोटिस जारी किए गए हैं।
एनजीटी ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि औद्योगिक क्षेत्र में पौधरोपण और लगाए गए पौधों को जीवित रखने से जुड़ी पर्यावरणीय शर्तों का पालन नहीं किया जा रहा है, तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पर्याप्त पौधरोपण सुनिश्चित करना होगा। साथ ही, लगाए गए पौधों का जीवित रहना भी सुनिश्चित करना होगा। केवल पौधे लगा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी देखभाल और संरक्षण भी जरूरी है।
खारा गांव और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को देखते हुए बीकानेर के चिकित्सा विभाग ने घर-घर जाकर सर्वेक्षण किया। इस दौरान कुल 694 घरों का सर्वेक्षण किया गया, जिसमें 121 लोगों में सांस संबंधी बीमारियों के लक्षण पाए गए।
इन लोगों को विस्तृत चिकित्सकीय जांच के लिए भेजा गया। इसके अलावा, प्रभावित क्षेत्र में समय-समय पर चिकित्सा शिविर भी आयोजित किए गए।
हालांकि, सर्वेक्षण में सामने आए लक्षणों से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि इन सभी मामलों का कारण औद्योगिक प्रदूषण ही है। इसके लिए विस्तृत चिकित्सकीय जांच और प्रदूषण के प्रभावों का वैज्ञानिक आकलन जरूरी है। फिर भी, इतने लोगों में सांस संबंधी समस्याओं के लक्षण मिलना क्षेत्र में स्वास्थ्य निगरानी और पर्यावरणीय जांच की अहमियत को सामने लाता है।
एनजीटी इस मामले में अगली सुनवाई 18 दिसंबर 2026 को करेगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उल्लंघन करने वाली इकाइयों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है और क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण तथा पौधों के अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।