

03 सितंबर 2026 को देश में राजस्थान का श्रीगंगानगर सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 138 दर्ज किया गया। एक दिन पहले के 119 के मुकाबले इसमें 19 अंकों की बढ़ोतरी हुई।
शहर की हवा में पीएम10 कणों का दबदबा रहा और प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 200 फीसदी अधिक दर्ज किया गया।
राजस्थान के सीकर (128) और पाली (121) भी देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे। हालांकि पाली में एक दिन में 36 अंकों का सुधार हुआ है। दूसरी ओर, हरियाणा के चार शहर—फतेहाबाद, पानीपत, गुरुग्राम और पलवल—भी टॉप-10 में रहे।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार 252 शहरों में 94 की हवा ‘बेहतर’, 137 की ‘संतोषजनक’ और 21 शहरों की हवा ‘मध्यम’ श्रेणी में रही। मध्यम श्रेणी वाले शहरों की संख्या में एक दिन में 10.5 फीसदी की बढ़ोतरी चिंता बढ़ाती है।
दिल्ली में एक्यूआई 85 से घटकर 74 पर पहुंच गया है, जबकि फरीदाबाद में 142 से घटकर 105 पर पहुंचा। इसके बावजूद कई शहरों में पीएम2.5 और पीएम10 का बढ़ता दबाव साफ हवा के लिए चुनौती बना हुआ है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 03 सितम्बर 2026 को देश में श्री गंगानगर सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 138 दर्ज किया गया, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (02 सितम्बर) श्री गंगानगर में वायु गुणवत्ता का स्तर 119 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 19 अंकों का इजाफा हुआ है और वायु गुणवत्ता ‘मध्यम’ श्रेणी में बनी हुई है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि श्री गंगानगर की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
श्री गंगानगर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 200 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में आइजोल की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर श्री गंगानगर की तुलना आइजोल से करें तो वहां स्थिति 9.8 गुणा खराब है।
वहीं कल देश में पाली की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 157 तक पहुंच गया था। हालांकि आज में 36 अंकों के भारी सुधार के साथ पाली में सूचकांक घटकर 121 पर आ गया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 85 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 74 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 11 अंकों की गिरावट आई है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक श्रेणी में बनी हुई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 07-03 सितम्बर को 63 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 142 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 105 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 37 अंकों के सुधार के बावजूद फरीदाबाद में आज भी एक्यूआई मध्यम श्रेणी में बना हुआ है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 03 सितम्बर 2026 को 252 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 37.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 54.4 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 8.3 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 4.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 4.2 फीसदी की कमी दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से करीब 10.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में सीकर (128) दूसरे जबकि फतेहाबाद (126) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह पाली (121) चौथे स्थान पर है। भागलपुर (116) – पानीपत (115) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
ग्रेटर नोएडा (114) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गुरुग्राम (114), पीथमपुर (113) और पलवल (111) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार शहर (फतेहाबाद, पानीपत, गुरुग्राम, पलवल) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि फतेहाबाद, गुरुग्राम, वातवा, कोलकाता और गुम्मिडीपूंडी आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं श्रीगंगानगर, सीकर, पाली, भागलपुर, पानीपत, ग्रेटर नोएडा, पीथमपुर, टोंक, विशाखापत्तनम, दौसा, नारनौल, फरीदाबाद, अलवर और अमृतसर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 37.3 फीसदी यानी 94 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में धौलपुर, धुले, एलुरु, गया, हाजीपुर, हापुड़, हिंगोली, हुबली, इंदौर, जलगांव, काकीनाडा, कलबुर्गी, कल्याण, कानपुर, कारवार, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, कोल्हापुर, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, मदिकेरी, महाद, मेरठ, मीरा-भायंदर, मोदीनगर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, पंचकुला, परभणी, पटियाला, रायपुर, राजकोट, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सहरसा आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 137 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें अंबाला, अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बड़ौत, बारबिल, बारीपाड़ा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कुड्डालोर, कटक, देहरादून, दिल्ली, देवास, धारवाड़, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, गडग, गजरौला, गांधीनगर, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हिसार, हावड़ा, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, कन्नूर, करौली, करनाल, कटिहार, खन्ना, खोरा, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोटा आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 21 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अलवर, अमृतसर, बद्दी, भागलपुर, दौसा, फरीदाबाद, फतेहाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, कोलकाता, नारनौल, पाली, पलवल, पानीपत, पीथमपुर, सीकर, श्रीगंगानगर, टोंक, वातवा और विशाखापत्तनम आदि शामिल हैं।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 252 में से 94 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 137 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 02 सितम्बर को भी यह आंकड़ा 143 दर्ज किया गया था।
21 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज श्री गंगानगर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 138 दर्ज किया गया, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (02 सितम्बर) श्री गंगानगर में वायु गुणवत्ता का स्तर 119 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 19 अंकों का इजाफा हुआ है।
वहीं कल देश में पाली की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 157 तक पहुंच गया था। हालांकि आज में 36 अंकों के भारी सुधार के साथ पाली में सूचकांक घटकर 121 पर आ गया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 85 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 74 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 11 अंकों की गिरावट आई है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 142 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 105 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 37 अंकों के सुधार के बावजूद फरीदाबाद में आज भी एक्यूआई मध्यम श्रेणी में बना हुआ है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 03 सितम्बर को पाली (121) चौथे स्थान पर है, वहीं सीकर (128) दूसरे, जबकि फतेहाबाद (126) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 55, गाजियाबाद में 58, गुवाहाटी में 53, गुरूग्राम में 114, नोएडा में 68, ग्रेटर नोएडा में 114 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 44 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 43, चेन्नई में 72, चंडीगढ़ में 33, हैदराबाद में 50, जयपुर में 87 और पटना में 74 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 94 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में अगरतला, अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), अंगुल, अररिया, बागपत, बारबिल, बरेली, बीड, बेलापुर, बेतिया, भरतपुर, भिलाई, भिवंडी, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, दमोह, देहरादून, धौलपुर, धुले, डोंबिवली, फतेहपुर सीकरी, हाजीपुर, हापुड़, हुबली, हैदराबाद, जलगांव, झांसी, काकीनाडा, कलबुर्गी, कानपुर, करौली, कटनी, क्योंझर, कोल्हापुर, कोरबा, कुरनूल, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, मदिकेरी, महाड, मेरठ, मिलुपारा, मोदीनगर, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, रायपुर, रायरंगपुर, राजकोट, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, सहरसा, सांगली, शामली, शिलांग, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, सोलापुर, सूरत, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, तुमडीह, उल्हासनगर, वापी, वाराणसी, विजयपुरा, विरार, वृंदावन और यादगीर शामिल हैं।
वहीं आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अंबाला, अंबरनाथ, अनंतपुर, अंकलेश्वर, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बहादुरगढ़, बालासोर, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बड़ौत, बारीपाड़ा, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेंगलुरु, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलीपाड़ा, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, छाल, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दिल्ली, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, गडग, गजरौला, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हिंगोली, हिसार, हावड़ा, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, जालौर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, कल्याण, करनाल, कारवार, कटिहार, खन्ना, खोरा, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोटा, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, मंगुराहा, मथुरा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मैसूरु, नागौर, नलबाड़ी, नंदेसरी, नयागढ़, नेल्लोर, नोएडा, पंचगांव, पटना, प्रतापगढ़, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, रोहतक, रूपनगर, समस्तीपुर, सासाराम, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, सिंगरौली, सिरोही, सिरसा, शिवसागर, सिवान, सोनीपत, श्रीकाकुलम, श्रीनगर, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, विजयवाड़ा और यमुना नगर आदि 137 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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