संसद में आज: साल 2030 तक देश में करीब छह लाख टन सौर कचरा पैदा हो सकता है

आज, 12 अगस्त, 2026 को संसद के दोनों सदनों में ऊर्जा, खनिज, सौर ऊर्जा, मानसून व सौर पैनल के कचरे के पुनर्चक्रण जैसे कई मुद्दों को लेकर पूछे गए प्रश्नों का सरकार के विभिन्न मंत्रालयों द्वारा उत्तर दिया गया।
वर्ष 2047 तक पुराने सौर पैनलों के कचरे के उचित प्रबंधन के लिए हर साल करीब 3,600 टन प्रसंस्करण क्षमता की जरूरत होने का अनुमान है।
वर्ष 2047 तक पुराने सौर पैनलों के कचरे के उचित प्रबंधन के लिए हर साल करीब 3,600 टन प्रसंस्करण क्षमता की जरूरत होने का अनुमान है। फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • भारत परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ा रहा है, कर्नाटक में कैगा की दो नई इकाइयों का निर्माण तेजी से जारी है।

  • पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में दुर्लभ मृदा तत्वों की खोज जारी है, लेकिन अबतक कोई संसाधन स्थापित नहीं हुआ है।

  • महाराष्ट्र के जायकवाड़ी बांध पर तैरते सौर संयंत्र की तैयारी जारी है, परियोजना पर अंतिम फैसला अभी बाकी है फिलहाल।

  • 2026 में मानसून की बारिश सामान्य से कम रही, दो अगस्त तक संचयी बारिश बारह प्रतिशत कम दर्ज की गई।

  • भारत टैक्सी ने चार क्षेत्रों में विस्तार किया, 8.48 लाख चालक और 44.27 लाख ग्राहक मंच से जुड़ चुके हैं।

परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के तहत बिजली उत्पादन

संसद के मानसून सत्र का आखिरी दौर जारी है। इसी बीच सदन में उठे एक सवाल के जवाब में आज, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री तथा कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बताया कि भारत अपनी बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए परमाणु ऊर्जा की क्षमता बढ़ा रहा है। देश में इस समय 24 परमाणु बिजली संयंत्रों की कुल स्थापित क्षमता 8,780 मेगावाट है। साल 2025-26 में देश में पैदा हुई कुल बिजली में परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी 3.1 प्रतिशत रही।

सिंह ने कहा कि सरकार परमाणु ऊर्जा को देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देख रही है। कर्नाटक में कैगा परमाणु बिजलीघर इस दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है। कैगा की पहली से चौथी इकाई तक चार परमाणु बिजली इकाइयां चालू हैं। इन चारों की कुल क्षमता 880 मेगावाट है। इसके अलावा कैगा की पांचवीं और छठी इकाई का निर्माण चल रहा है। इन दोनों इकाइयों की कुल क्षमता 1,400 मेगावाट होगी।

इन नई इकाइयों के पूरा होने के बाद कर्नाटक में परमाणु ऊर्जा उत्पादन की क्षमता में काफी वृद्धि होगी। इससे राज्य के साथ-साथ देश की बिजली जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

पश्चिम बंगाल में दुर्लभ मृदा तत्वों की खोज

सदन में पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए आज, कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा की पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में दुर्लभ मृदा तत्वों की खोज का काम जारी है। दुर्लभ मृदा तत्व आधुनिक तकनीक के लिए बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक सामान, बिजली से चलने वाले वाहनों, रक्षा उपकरणों और कई आधुनिक औद्योगिक उत्पादों में किया जाता है।

रेड्डी ने बताया कि भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने पुरुलिया जिले के बेलमा-मालथोर क्षेत्र में सामान्य स्तर की खोज का काम पूरा किया है। इस दौरान 50 लाइन किलोमीटर का भू-भौतिकीय सर्वेक्षण किया गया और 2,001.95 मीटर की ड्रिलिंग की गई। इसके अलावा 2,400 कोर नमूने भी एकत्र किए गए। पुरुलिया जिले के चिरुगोरा, मेदनीतर और पुरदाहा क्षेत्रों को भी खोज के जी-3 स्तर से जी-2 स्तर तक आगे बढ़ाया गया है। हालांकि अभी तक इन क्षेत्रों में दुर्लभ मृदा तत्वों का कोई संसाधन स्थापित नहीं हुआ है। देश में महत्वपूर्ण खनिजों की खोज को बढ़ाने के लिए ऐसे सर्वेक्षणों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जायकवाड़ी बांध पर तैरता सौर ऊर्जा संयंत्र

तैरता सौर ऊर्जा संयंत्र को लेकर सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा तथा विद्युत मंत्रालय में राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने लोकसभा में बताया कि महाराष्ट्र के जायकवाड़ी बांध पर तैरता हुआ सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की संभावना पर काम किया जा रहा है। राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम की हरित ऊर्जा कंपनी इस परियोजना के लिए शुरुआती गतिविधियां कर रही है।

नाइक ने कहा हालांकि अभी इस परियोजना को लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। परियोजना की स्थापना की संभावना का मूल्यांकन किया जा रहा है। तैरते सौर ऊर्जा संयंत्रों में पानी की सतह पर सौर पैनल लगाए जाते हैं। इससे जमीन की जरूरत कम होती है। देश में सौर ऊर्जा का विस्तार होने के साथ ऐसे विकल्पों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

दक्षिण-पश्चिम मानसून का पूर्वानुमान

सदन में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में आज, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में कहा कि साल 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून अब तक सामान्य से कमजोर रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 13 अप्रैल 2026 को मानसून का पहला दीर्घकालिक पूर्वानुमान जारी किया था। इसमें पूरे मानसून मौसम में दीर्घकालिक औसत की तुलना में 92 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान लगाया गया था।

बाद में दूसरे चरण के पूर्वानुमान में इसे 90 प्रतिशत कर दिया गया। साथ ही अल नीनो की स्थिति बनने की संभावना भी जताई गई। जून में देश में सामान्य से 35 प्रतिशत कम बारिश हुई। इस दौरान करीब 70 प्रतिशत जिलों में बारिश की कमी दर्ज की गई। जुलाई में स्थिति कुछ सुधरी और पूरे देश के स्तर पर बारिश दीर्घकालिक औसत से एक प्रतिशत अधिक रही। हालांकि बारिश का वितरण सभी क्षेत्रों में एक जैसा नहीं रहा। जुलाई में भी 47 प्रतिशत जिलों में कम या बहुत कम बारिश दर्ज की गई। दो अगस्त 2026 तक पूरे मानसून मौसम की संचयी बारिश दीर्घकालिक औसत से 12 प्रतिशत कम थी।

सौर पैनल कचरे के पुनर्चक्रण की क्षमता

सदन में उठे एक और सवाल का जवाब देते हुए आज, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा तथा विद्युत मंत्रालय में राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने लोकसभा में बताया कि देश में सौर ऊर्जा का तेजी से विस्तार हो रहा है। इसके साथ पुराने सौर पैनलों से निकलने वाले कचरे की समस्या भी बढ़ रही है। मंत्रालय के सहयोग से ऊर्जा, पर्यावरण और जल परिषद ने अनुमान लगाया है कि मौजूदा और प्रस्तावित सौर क्षमता से वर्ष 2030 तक करीब छह लाख टन सौर कचरा पैदा हो सकता है

नाइक ने कहा सरकार सौर पैनलों और नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों के निर्माण, पुनर्चक्रण और दोबारा इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है। वर्ष 2047 तक पुराने सौर पैनलों के कचरे के उचित प्रबंधन के लिए हर साल करीब 3,600 टन प्रसंस्करण क्षमता की जरूरत होने का अनुमान है। हालांकि अभी नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने सौर पैनलों के पुनर्चक्रण संयंत्रों के लिए कोई विशेष स्थान तय नहीं किया है।

असम में बाढ़

असम में बाढ़ को लेकर उठे एक प्रश्न के उत्तर में आज, गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में कहा कि असम में जुलाई 2026 के दौरान आई बाढ़ का मुख्य कारण लगातार हुई भारी बारिश रही। असम के अलावा पड़ोसी राज्यों अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड में हुई बारिश का भी बाढ़ की स्थिति पर असर पड़ा।

राय ने क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र, गुवाहाटी व भारत मौसम विज्ञान विभाग का हवाला दिया। जिसमें इस दौरान किसी भी बादल फटने की घटना की सूचना नहीं थी। असम में मानसून के दौरान हर साल बाढ़ एक बड़ी समस्या रहती है। लगातार बारिश के कारण कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ। ऐसी स्थिति में मौसम की सही जानकारी, समय पर चेतावनी और राहत-बचाव कार्यों की अहम भूमिका होती है।

भारत टैक्सी का विस्तार

सदन में उठाए गए एक सवाल का जवाब देते हुए आज, सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में बताया कि देश में सहकारी मॉडल पर आधारित भारत टैक्सी सेवा भी तेजी से आगे बढ़ रही है। भारत टैक्सी एक डिजिटल ऐप आधारित परिवहन मंच है, जिसका संचालन सहकार टैक्सी सहकारी लिमिटेड कर रही है। यह सेवा दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान में शुरू की जा चुकी है।

चार अगस्त 2026 तक भारत टैक्सी मंच पर 8.48 लाख चालक और 44.27 लाख ग्राहक पंजीकृत हो चुके थे। इस मंच के माध्यम से प्रतिदिन 11,106 यात्राएं हो रही थीं। चालकों की कुल कमाई 83.70 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी थी।

शाह ने कहा कि भारत टैक्सी का विस्तार देश के अन्य शहरों और राज्यों में चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। इसमें चालकों का पंजीकरण, ग्राहकों को जोड़ना, प्रशिक्षण और नई जगहों पर सेवा शुरू करना शामिल है। अन्य शहरों और राज्यों में विस्तार जरूरी मंजूरियों और स्थानीय जरूरतों के आधार पर किया जाएगा।

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