बढ़ती गर्मी व उमस काल बन रही है पक्षियों के लिए, कई प्रजातियों पर गंभीर संकट

बढ़ती गर्मी और उमस से पक्षियों पर मंडरा रहा खतरा, नई रिसर्च में चेतावनी; हीटवेव से मौतें बढ़ीं, वैज्ञानिकों ने संरक्षण के लिए नए उपाय सुझाए
बढ़ती हीटवेव और सूखा पक्षियों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं, कई जगह बड़े पैमाने पर पक्षियों की मौतें दर्ज हुईं।
बढ़ती हीटवेव और सूखा पक्षियों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं, कई जगह बड़े पैमाने पर पक्षियों की मौतें दर्ज हुईं।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • बढ़ती हीटवेव और सूखा पक्षियों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं, कई जगह बड़े पैमाने पर पक्षियों की मौतें दर्ज हुईं।

  • पक्षी दिन में सक्रिय रहते हैं और गर्मी से बचने के लिए सुरक्षित स्थान नहीं ढूंढ पाते, इसलिए ज्यादा प्रभावित होते हैं।

  • लुंड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने बताया कि पक्षियों पर गर्मी और उमस के प्रभाव की यूरोप में बहुत कम जानकारी है।

  • उमस और बढ़ती नमी भी पक्षियों की गर्मी सहने की क्षमता को कम कर देती है, जिससे उनका शरीर जल्दी असंतुलित होता है।

  • नई रिसर्च में उम्र, स्वास्थ्य और जीवनकाल को महत्वपूर्ण बताया गया है, जो पक्षियों की गर्मी सहनशीलता को प्रभावित करते हैं।

दुनिया भर में बढ़ती गर्मी और बदलता मौसम अब सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि पक्षियों के लिए भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है। हाल ही में स्वीडन की लुंड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक नई रिसर्च में बताया है कि तेज गर्मी, सूखा और उमस जैसे मौसम पक्षियों की जान तक ले सकते हैं। यह अध्ययन वैज्ञानिक पत्रिका “ट्रेंड्स इन इकोलॉजी एंड इवोल्यूशन” में प्रकाशित हुआ है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि आने वाले वर्षों में लू या हीटवेव और ज्यादा खतरनाक हो सकती हैं। ऐसे मौसम में पक्षियों के लिए खुद को सुरक्षित रखना बहुत मुश्किल हो जाता है।

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गर्मी से मर रहे हैं पक्षी

अध्ययन में बताया गया है कि दुनिया के कई हिस्सों में भीषण गर्मी के कारण बड़ी संख्या में पक्षियों की मौत हुई है। जो पक्षी बच जाते हैं, उनकी शारीरिक स्थिति कमजोर हो जाती है। लंबे समय तक गर्मी सहने के कारण उनका स्वास्थ्य खराब हो सकता है और उनकी उम्र भी कम हो सकती है।

शोध के प्रमुख वैज्ञानिक एंड्रियास नॉर्ड के अनुसार पक्षी दिन में ज्यादा सक्रिय रहते हैं। कई जानवर तेज गर्मी से बचने के लिए जमीन के नीचे बिलों में छिप जाते हैं, लेकिन पक्षियों के पास ऐसा कोई सुरक्षित तरीका नहीं होता। यही कारण है कि वे गर्मी का ज्यादा शिकार बनते हैं।

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यूरोप के पक्षियों पर बहुत कम जानकारी

वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है कि यूरोप, खासकर उत्तरी यूरोप के पक्षियों पर गर्मी के असर को लेकर बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। अब तक जो अध्ययन हुए हैं, वे ज्यादातर रेगिस्तानी इलाकों और दक्षिणी गोलार्ध के देशों में किए गए हैं।

शोधकर्ताओं का कहना है कि अलग-अलग पक्षियों की गर्मी सहने की क्षमता भी अलग होती है। कुछ पक्षी थोड़ी गर्मी में ही परेशान हो जाते हैं, जबकि कुछ लंबे समय तक गर्म मौसम में जीवित रह सकते हैं। लेकिन इस बारे में अभी पर्याप्त जानकारी नहीं है।

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उमस भी बन रही बड़ी समस्या

अध्ययन में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है कि सिर्फ तापमान ही नहीं, बल्कि हवा में नमी यानी उमस भी पक्षियों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अब तक अधिकतर शोधों में उमस को नजरअंदाज किया गया था।

जब वातावरण में नमी ज्यादा होती है, तब पक्षियों के शरीर को ठंडा रखना मुश्किल हो जाता है। इससे उन्हें सांस लेने और शरीर का तापमान नियंत्रित करने में परेशानी होती है। यही वजह है कि गर्म और उमस भरे मौसम में पक्षियों की हालत ज्यादा खराब हो सकती है।

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उम्र और स्वास्थ्य का भी असर

शोध में यह भी पाया गया है कि हर पक्षी पर गर्मी का असर एक जैसा नहीं होता। बूढ़े, बीमार और कमजोर पक्षी ज्यादा जल्दी प्रभावित होते हैं। जिन पक्षियों का स्वास्थ्य पहले से खराब होता है, उनके लिए तेज गर्मी जानलेवा साबित हो सकती है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि पक्षियों की उम्र, उनकी जीवनशैली और स्वास्थ्य को समझे बिना इस समस्या का सही आकलन नहीं किया जा सकता।

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नई तकनीकों से होगी मदद

इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य उन कमियों को समझना है, जिनकी वजह से पक्षियों पर मौसम के असर का सही अनुमान नहीं लगाया जा पा रहा है। वैज्ञानिकों ने कुछ नए मॉडल और संकेतक भी सुझाए हैं, जिनकी मदद से यह पता लगाया जा सकेगा कि कौन-से पक्षी ज्यादा खतरे में हैं।

शोधकर्ताओं का मानना है कि इन तरीकों से भविष्य में पक्षियों को बचाने की बेहतर योजना बनाई जा सकती है। साथ ही, जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे को समझने में भी मदद मिलेगी।

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भविष्य के लिए चेतावनी

वैज्ञानिकों ने साफ कहा है कि अगर दुनिया में तापमान इसी तरह बढ़ता रहा, तो पक्षियों की कई प्रजातियां गंभीर संकट में आ सकती हैं। इसलिए समय रहते इस दिशा में ज्यादा रिसर्च और संरक्षण की जरूरत है।

यह अध्ययन एक चेतावनी की तरह है कि बदलता मौसम केवल पर्यावरण ही नहीं, बल्कि धरती पर रहने वाले छोटे-छोटे जीवों के अस्तित्व के लिए भी बड़ा खतरा बन चुका है।

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