विश्व टीकाकरण सप्ताह: डब्ल्यूएचओ ने देशों से कहा, तेज करें टीकाकरण अभियान के प्रयास

डब्ल्यूएचओ ने कहा, हर पीढ़ी की सुरक्षा के लिए टीकाकरण बढ़ाएं, खसरा-पोलियो जैसी बीमारियों से बचाव सुनिश्चित करें
2024 में लगभग 2.1 करोड़ बच्चों को कम से कम एक भी टीका नहीं मिला, जिससे बिमारियों का खतरा बढ़ा है।
2024 में लगभग 2.1 करोड़ बच्चों को कम से कम एक भी टीका नहीं मिला, जिससे बिमारियों का खतरा बढ़ा है।फोटो साभार: आईस्टॉक
Published on
सारांश
  • दुनिया भर में टीकों ने 1974 से अब तक 15 करोड़ से अधिक लोगों की जान बचाई, जो ऐतिहासिक स्वास्थ्य उपलब्धि है।

  • 2024 में लगभग 2.1 करोड़ बच्चों को एक भी टीका नहीं मिला, जिससे बिमारियों का खतरा बढ़ा है।

  • पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र, जहां लगभग 2.2 अरब लोग रहते हैं, ने टीकाकरण के क्षेत्र में अच्छी प्रगति की है।

  • खसरे की वापसी चिंता का विषय है, रोकथाम के लिए 95 प्रतिशत से अधिक टीकाकरण कवरेज जरूरी माना जाता है।

  • पोलियो के नए मामलों के बाद कई देशों में टीकाकरण अभियान चलाए जा रहे हैं, स्थिति नियंत्रण में रखने का प्रयास है।

विश्व टीकाकरण सप्ताह (24 से 30 अप्रैल) के अवसर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने दुनिया भर के देशों से टीकाकरण प्रयासों को और मजबूत करने की अपील की है। इस वर्ष की थीम “हर पीढ़ी के लिए टीके काम करते हैं” इस बात पर जोर देती है कि टीकों ने दशकों से मानव जीवन की रक्षा की है और आज भी यह सुरक्षा कवच बने हुए हैं।

टीकों की ऐतिहासिक भूमिका

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, वर्ष 1974 से अब तक टीकों ने दुनिया भर में 15 करोड़ से अधिक लोगों की जान बचाई है। यह उपलब्धि सार्वजनिक स्वास्थ्य के इतिहास में सबसे बड़ी सफलताओं में गिनी जाती है। इसके बावजूद, साल 2024 में करीब दो करोड़ बच्चे ऐसे रहे जिन्हें कम से कम एक टीका भी नहीं लग पाया। यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि इससे कई जानलेवा बीमारियों का खतरा फिर से बढ़ सकता है।

यह भी पढ़ें
बीमारियों से बचने के लिए हर व्यक्ति तक टीकों की पहुंच जरूरी
2024 में लगभग 2.1 करोड़ बच्चों को कम से कम एक भी टीका नहीं मिला, जिससे बिमारियों का खतरा बढ़ा है।

पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र की स्थिति

पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र, जहां लगभग 2.2 अरब लोग रहते हैं, ने टीकाकरण के क्षेत्र में अच्छी प्रगति की है। यहां कई देशों ने टीके से रोकी जा सकने वाली बीमारियों पर काफी हद तक नियंत्रण पाया है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रगति अभी भी नाजुक है और थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े संकट का कारण बन सकती है।

खसरे की वापसी से चेतावनी

हाल के वर्षों में खसरे के मामलों में फिर से वृद्धि देखी गई है। खसरा दुनिया की सबसे तेजी से फैलने वाली बीमारियों में से एक है। इसे रोकने के लिए हर समुदाय में कम से कम 95 प्रतिशत टीकाकरण आवश्यक माना जाता है। जब यह स्तर गिरता है, तो संक्रमण तेजी से फैल सकता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार टीकाकरण कवरेज बढ़ाने पर जोर दे रही हैं।

यह भी पढ़ें
भारत में 14 साल की लड़कियों के लिए मुफ्त 'एचपीवी टीकाकरण' अभियान
2024 में लगभग 2.1 करोड़ बच्चों को कम से कम एक भी टीका नहीं मिला, जिससे बिमारियों का खतरा बढ़ा है।

पोलियो का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं

पोलियो को लेकर भी चिंता बनी हुई है। कुछ देशों में हाल ही में इसके मामले सामने आए हैं, जिसके चलते फिर से विशेष टीकाकरण अभियान चलाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पोलियो मुक्त स्थिति को बनाए रखने के लिए सतत प्रयास जरूरी हैं।

हर आयु वर्ग के लिए टीकाकरण जरूरी

विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि टीकाकरण केवल बच्चों तक सीमित नहीं होना चाहिए। किशोर, वयस्क और बुजुर्गों के लिए भी टीके उतने ही महत्वपूर्ण हैं। जीवन के हर चरण में टीकाकरण से बीमारियों के जोखिम को कम किया जा सकता है और समाज को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है।

यह भी पढ़ें
भारत में निपाह वायरस का खतरा, क्या पहली वैक्सीन 'निपाह-बी' बनेगी उम्मीद की किरण?
2024 में लगभग 2.1 करोड़ बच्चों को कम से कम एक भी टीका नहीं मिला, जिससे बिमारियों का खतरा बढ़ा है।

भ्रामक सूचनाएं बनी चुनौती

आज के डिजिटल युग में टीकों को लेकर गलत जानकारी और अफवाहें तेजी से फैल रही हैं। सोशल मीडिया पर फैलने वाली ऐसी सूचनाएं लोगों के मन में संदेह पैदा करती हैं, जिससे टीकाकरण दर प्रभावित होती है। इस चुनौती से निपटने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन लोगों से अपील कर रहा है कि वे केवल विश्वसनीय और वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित जानकारी पर ही भरोसा करें।

विशेषज्ञों की अपील

प्रेस विज्ञप्ति में विश्व स्वास्थ्य संगठन के क्षेत्रीय निदेशक साइआ माऊ पिउकाला ने कहा कि टीके विज्ञान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक हैं, लेकिन इन्हें हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि टीकाकरण में कमी आई, तो पहले से नियंत्रित बीमारियां फिर से फैल सकती हैं। वहीं, स्वास्थ्य अधिकारी हुओंग ट्रान ने सरकारों और समुदायों से टीकाकरण को प्राथमिकता देने की अपील की है।

यह भी पढ़ें
2024 में एक करोड़ 40 लाख बच्चों को एक भी टीका नहीं लगा: डब्ल्यूएचओ व यूनिसेफ
2024 में लगभग 2.1 करोड़ बच्चों को कम से कम एक भी टीका नहीं मिला, जिससे बिमारियों का खतरा बढ़ा है।

साझा जिम्मेदारी का आह्वान

इस वर्ष के अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को अपने और अपने परिवार के टीकाकरण रिकॉर्ड की जांच करने के लिए प्रेरित करना है। साथ ही, सरकारों, स्वास्थ्य कर्मियों और समुदायों से मिलकर काम करने का आह्वान किया गया है, ताकि कोई भी व्यक्ति टीकाकरण से वंचित न रहे।

विश्व टीकाकरण सप्ताह हमें यह याद दिलाता है कि टीके केवल व्यक्तिगत सुरक्षा ही नहीं, बल्कि सामूहिक स्वास्थ्य का भी आधार हैं। यदि हम सभी मिलकर टीकाकरण को प्राथमिकता दें, तो आने वाली पीढ़ियों को कई गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकता है। टीकाकरण की यह मुहिम हर व्यक्ति की भागीदारी से ही सफल हो सकती है।

Related Stories

No stories found.
Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in