भारत में निपाह वायरस का खतरा, क्या पहली वैक्सीन 'निपाह-बी' बनेगी उम्मीद की किरण?

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की निपाह-बी वैक्सीन 2026 में फेज दो परीक्षण में प्रवेश करने वाली पहली वैक्सीन होगी।
निपाह वायरस जानवरों से इंसानों में फैलता है और अस्पतालों में एक व्यक्ति से दूसरे में संक्रमण का खतरा बना रहता है।
निपाह वायरस जानवरों से इंसानों में फैलता है और अस्पतालों में एक व्यक्ति से दूसरे में संक्रमण का खतरा बना रहता है।प्रतीकात्मक छवि, फोटो साभार: आईस्टॉक
Published on
सारांश
  • पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो मामले सामने आए, दोनों संक्रमित व्यक्ति अस्पताल में काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मी थे।

  • निपाह वायरस जानवरों से इंसानों में फैलता है और अस्पतालों में एक व्यक्ति से दूसरे में संक्रमण का खतरा बना रहता है।

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन ने निपाह वायरस को उच्च जोखिम वाला प्राथमिकता रोगजनक घोषित किया है।

  • ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की निपाह-बी वैक्सीन 2026 में फेज दो परीक्षण में प्रवेश करने वाली पहली वैक्सीन होगी।

  • सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया आपात स्थिति के लिए एक लाख वैक्सीन डोज बनाने की तैयारी कर रहा है।

भारत के पश्चिम बंगाल राज्य में निपाह वायरस के दो नए मामलों की पुष्टि हुई है। ये दोनों मामले बारासात शहर के एक निजी अस्पताल में काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों से जुड़े हैं। राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों ने इस जानकारी को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को भी भेज दिया है। यह घटना यह दिखाती है कि अस्पतालों में इलाज के दौरान निपाह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है।

हालांकि अब तक 190 से अधिक लोगों की जांच की जा चुकी है और सभी की रिपोर्ट नकारात्मक आई है। इससे यह साफ होता है कि समय पर निगरानी और जांच से संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है।

यह भी पढ़ें
पश्चिम बंगाल में दिसंबर से अब तक निपाह के सिर्फ दो मामले सामने आए: एनसीडीसी
निपाह वायरस जानवरों से इंसानों में फैलता है और अस्पतालों में एक व्यक्ति से दूसरे में संक्रमण का खतरा बना रहता है।

निपाह वायरस क्या है?

निपाह वायरस एक जूनोटिक बीमारी है। इसका मतलब है कि यह बीमारी जानवरों से इंसानों में फैलती है। यह वायरस मुख्य रूप से फल खाने वाली चमगादड़ों में पाया जाता है। जब इंसान संक्रमित जानवरों के संपर्क में आते हैं या दूषित फल खाते हैं, तो यह वायरस फैल सकता है।

कुछ मामलों में यह वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में भी फैलता है, खासकर अस्पतालों और देखभाल केंद्रों में। निपाह वायरस से बुखार, सिरदर्द, उल्टी, सांस लेने में दिक्कत और दिमाग से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

यह भी पढ़ें
चिंताजनक: चीन के फलों के बागानों में चमगादड़ों में मिले 20 नए वायरस
निपाह वायरस जानवरों से इंसानों में फैलता है और अस्पतालों में एक व्यक्ति से दूसरे में संक्रमण का खतरा बना रहता है।

निपाह वायरस कितना खतरनाक है?

निपाह वायरस बहुत ही गंभीर बीमारी मानी जाती है। इसकी मृत्यु दर 40 प्रतिशत से लेकर 75 प्रतिशत तक हो सकती है। इसी कारण डब्ल्यूएचओ ने इसे “प्राथमिकता वाला रोगजनक” घोषित किया है। इसका मतलब है कि यह बीमारी भविष्य में महामारी का रूप ले सकती है।

पश्चिम बंगाल में यह तीसरी बार है जब निपाह वायरस के मामले सामने आए हैं। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि यह कोई एक बार होने वाली घटना नहीं है, बल्कि बार-बार लौटने वाला खतरा है। चमगादड़ इस वायरस का स्थायी स्रोत बने हुए हैं।

यह भी पढ़ें
नई तकनीक से 20 मिनट में लग जाएगा एंटी-वायरस एंटीबॉडी का पता
निपाह वायरस जानवरों से इंसानों में फैलता है और अस्पतालों में एक व्यक्ति से दूसरे में संक्रमण का खतरा बना रहता है।

वैक्सीन और दवा की कमी

फिलहाल निपाह वायरस के लिए कोई भी लाइसेंस प्राप्त वैक्सीन या दवा उपलब्ध नहीं है। यही वजह है कि इसका इलाज करना मुश्किल हो जाता है। इस वायरस पर शोध करना भी आसान नहीं है क्योंकि इसके लिए बहुत सुरक्षित प्रयोगशालाओं की जरूरत होती है।

इसके अलावा निपाह वायरस तेजी से अपना रूप बदल सकता है। इससे वैज्ञानिकों के लिए एक स्थायी और प्रभावी वैक्सीन या दवा बनाना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

यह भी पढ़ें
नई-नई महामारियों को रोकने की चाबी है जैव विविधता का संरक्षण: अध्ययन
निपाह वायरस जानवरों से इंसानों में फैलता है और अस्पतालों में एक व्यक्ति से दूसरे में संक्रमण का खतरा बना रहता है।

ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन से नई उम्मीद

इस बीच एक अच्छी खबर सामने आई है। यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड द्वारा विकसित निपाह वायरस वैक्सीन “निपाह-बी” अब 2026 में दूसरे-चरण के क्लिनिकल ट्रायल में प्रवेश करने वाली है। यह निपाह वायरस के खिलाफ सबसे आगे बढ़ी हुई वैक्सीन मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह वैक्सीन कई वर्षों के शोध और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का परिणाम है। यह पहली बार है जब निपाह वायरस की कोई वैक्सीन इस स्तर तक पहुंची है।

यह भी पढ़ें
क्या है निपाह वायरस, कैसे बचे इसके प्रकोप से, आइए जानते हैं
निपाह वायरस जानवरों से इंसानों में फैलता है और अस्पतालों में एक व्यक्ति से दूसरे में संक्रमण का खतरा बना रहता है।

भारत में ट्रायल और उत्पादन की योजना

वैक्सीन के ट्रायल उन देशों में करने की योजना है जहां निपाह वायरस के मामले बार-बार सामने आते हैं। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि वैक्सीन प्रभावी होने के साथ-साथ सभी के लिए उपलब्ध भी हो।

इस वैक्सीन के निर्माण में भारत की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया भी शामिल है। कंपनी आपात स्थिति के लिए लगभग एक लाख वैक्सीन तैयार करने की योजना बना रही है। इससे भविष्य में किसी भी निपाह प्रकोप से निपटने में मदद मिलेगी।

यह भी पढ़ें
जीका वायरस: कोशिकाओं की सुरक्षा प्रणाली को बनाता है हथियार
निपाह वायरस जानवरों से इंसानों में फैलता है और अस्पतालों में एक व्यक्ति से दूसरे में संक्रमण का खतरा बना रहता है।

दवाओं के नए प्रयोग

वैक्सीन के साथ-साथ दवा कंपनियां पहले से मौजूद कुछ दवाओं को निपाह वायरस के इलाज में इस्तेमाल करने पर भी काम कर रही हैं। कुछ कैंसर की दवाओं को इस वायरस की बढ़ने की प्रक्रिया को रोकने में उपयोगी माना जा रहा है। यह तरीका समय और लागत दोनों की बचत कर सकता है और जल्दी इलाज उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, निपाह वायरस का खतरा अभी स्थानीय स्तर पर मध्यम है। लेकिन अगर इसे समय पर नहीं रोका गया, तो यह एक बड़ा वैश्विक स्वास्थ्य संकट बन सकता है। इसलिए सरकारों, वैज्ञानिकों और दवा उद्योग को मिलकर काम करने की जरूरत है।

निपाह वायरस भले ही एक गंभीर चुनौती हो, लेकिन चल रहे शोध, वैक्सीन परीक्षण और तैयारी से भविष्य में इस बीमारी को बड़े खतरे में बदलने से रोका जा सकता है।

Related Stories

No stories found.
Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in