डब्ल्यूएचओ का लक्ष्य, 2040 तक स्तन कैंसर से 25 लाख महिलाओं की जान बचाना

डब्ल्यूएचओ की पहली वैश्विक रिपोर्ट में सामने आई स्तन कैंसर से जीवित रहने की तस्वीर, अमीर और गरीब देशों के बीच इलाज व जीवन रक्षा में बड़ा अंतर
वर्ष 2024 में स्तन कैंसर से लगभग 6.94 लाख महिलाओं की मौत हुई, जिनमें 70 प्रतिशत निम्न और मध्यम आय वाले देशों में थीं।
वर्ष 2024 में स्तन कैंसर से लगभग 6.94 लाख महिलाओं की मौत हुई, जिनमें 70 प्रतिशत निम्न और मध्यम आय वाले देशों में थीं।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • डब्ल्यूएचओ ने पहली बार 194 देशों के लिए स्तन कैंसर से पांच वर्ष तक जीवित रहने के वैश्विक आंकड़े जारी किए।

  • दुनिया में स्तन कैंसर से पांच वर्ष तक जीवित रहने की औसत दर 77.8 प्रतिशत रही, लेकिन देशों के बीच बड़ा अंतर दिखा।

  • कम आय वाले देशों में जीवित रहने की दर 41.9 प्रतिशत रही, जबकि उच्च आय वाले देशों में यह 87.3 प्रतिशत पहुंची।

  • वर्ष 2024 में स्तन कैंसर से लगभग 6.94 लाख महिलाओं की मौत हुई, जिनमें 70 प्रतिशत निम्न और मध्यम आय वाले देशों में थीं।

  • डब्ल्यूएचओ का लक्ष्य वर्ष 2040 तक स्तन कैंसर से समय से पहले होने वाली मौतों में कमी लाकर 25 लाख महिलाओं की जान बचाना है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने पहली बार दुनिया के सभी 194 सदस्य देशों के लिए स्तन कैंसर से पांच साल तक जीवित रहने के अनुमान जारी किए हैं। ये आंकड़े उन महिलाओं पर आधारित हैं जिनमें वर्ष 2017 से 2021 के बीच स्तन कैंसर का पता चला था। यह अध्ययन प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका नेचर मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है। इन आंकड़ों से यह समझने में मदद मिलेगी कि अलग-अलग देशों में स्तन कैंसर की पहचान, इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति कैसी है।

वैश्विक स्तर पर 77.8 प्रतिशत रही जीवित रहने की दर

रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में स्तन कैंसर से पीड़ित महिलाओं की पांच वर्ष तक जीवित रहने की औसत दर 77.8 प्रतिशत रही। हालांकि, विभिन्न क्षेत्रों और देशों के बीच इसमें बड़ा अंतर देखा गया। अमेरिका क्षेत्र में यह दर सबसे अधिक 88.5 प्रतिशत रही, जबकि यूरोप क्षेत्र में यह 84 प्रतिशत दर्ज की गई। दूसरी ओर, अफ्रीकी क्षेत्र में यह दर केवल 39.1 प्रतिशत रही। इससे साफ है कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं वाले देशों में मरीजों के बचने की संभावना अधिक है।

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वर्ष 2024 में स्तन कैंसर से लगभग 6.94 लाख महिलाओं की मौत हुई, जिनमें 70 प्रतिशत निम्न और मध्यम आय वाले देशों में थीं।

आय के स्तर का भी पड़ा असर

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि किसी देश की आर्थिक स्थिति का स्तन कैंसर से जीवित रहने की दर पर सीधा प्रभाव पड़ता है। कम आय वाले देशों में पांच वर्ष तक जीवित रहने की दर केवल 41.9 प्रतिशत रही। निम्न-मध्यम आय वाले देशों में यह 60.1 प्रतिशत, उच्च-मध्यम आय वाले देशों में 78.7 प्रतिशत और उच्च आय वाले देशों में 87.3 प्रतिशत दर्ज की गई। इससे स्पष्ट होता है कि जहां बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और इलाज उपलब्ध हैं, वहां मरीजों के बचने की संभावना भी अधिक रहती है।

हर साल लाखों महिलाओं की जाती है जान

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, स्तन कैंसर 158 देशों में महिलाओं में पाया जाने वाला सबसे सामान्य कैंसर है। साल 2024 में इस बीमारी के कारण दुनिया भर में लगभग 6.94 लाख महिलाओं की मौत हुई। इनमें से करीब 70 प्रतिशत मौतें निम्न और मध्यम आय वाले देशों में हुई। वहीं, दुनिया में लगभग 80 लाख महिलाएं स्तन कैंसर के साथ जीवन जी रही थीं, जिनमें अधिकतर उच्च आय वाले देशों की थीं।

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समय पर पहचान और इलाज सबसे जरूरी

डब्ल्यूएचओ का कहना है कि किसी भी देश में स्तन कैंसर से जीवित रहने की दर इस बात का महत्वपूर्ण संकेत है कि वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था कितनी प्रभावी है। यदि बीमारी का पता शुरुआती चरण में चल जाए और मरीज को समय पर सही इलाज मिल जाए, तो उसके स्वस्थ होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसलिए शुरुआती जांच, समय पर निदान और आधुनिक इलाज को बेहद जरूरी माना गया है।

अध्ययन में अपनाई गई वैज्ञानिक पद्धति

इस अध्ययन के लिए डब्ल्यूएचओ ने 194 सदस्य देशों में से 67 देशों के कैंसर रजिस्ट्रियों से उपलब्ध वास्तविक आंकड़ों का उपयोग किया। इसके साथ ही बीमारी के चरण, कैंसर की दवाओं की उपलब्धता, रेडियोथेरेपी, मैमोग्राफी सुविधाओं और वयस्क मृत्यु दर जैसे कई अन्य कारकों को भी शामिल किया गया। इन सभी जानकारियों के आधार पर वैज्ञानिक मॉडल तैयार कर प्रत्येक देश के लिए अनुमान लगाए गए।

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रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 36 संघर्ष प्रभावित और नाजुक देशों में से केवल दो देशों के पास ही इस तरह के आंकड़े उपलब्ध थे। इससे पता चलता है कि कई देशों में अभी भी कैंसर से जुड़े आंकड़ों को एकत्र करने की व्यवस्था मजबूत नहीं है।

शुरुआती चरण में पहचान से बढ़ती है बचने की संभावना

रिपोर्ट के अनुसार, जिन देशों में स्तन कैंसर का पता शुरुआती चरण में चल जाता है, वहां मरीजों के पांच वर्ष तक जीवित रहने की संभावना काफी अधिक होती है। इसके विपरीत, जहां बीमारी का पता देर से चलता है, वहां मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए लोगों में जागरूकता बढ़ाने और जांच सुविधाओं को मजबूत करने की जरूरत बताई गई है।

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साल 2040 तक लाखों जीवन बचाने का लक्ष्य

डब्ल्यूएचओ की ग्लोबल ब्रेस्ट कैंसर इनिशिएटिव का लक्ष्य हर साल स्तन कैंसर से समय से पहले होने वाली मौतों में 2.5 प्रतिशत की कमी लाना है। इसके माध्यम से वर्ष 2040 तक 25 लाख महिलाओं की जान बचाने का लक्ष्य रखा गया है। इस पहल के तहत शुरुआती चरण में बीमारी की पहचान, 60 दिनों के भीतर जांच पूरी करना और जरूरतमंद मरीजों को समय पर पूरा इलाज उपलब्ध कराना प्रमुख उद्देश्य हैं।

डब्ल्यूएचओ का मानना है कि नए वैश्विक आंकड़े सभी देशों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बनेंगे। इनके माध्यम से देश अपनी स्वास्थ्य सेवाओं का आकलन कर सकेंगे, कमियों की पहचान कर सकेंगे और स्तन कैंसर की रोकथाम तथा उपचार को और बेहतर बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठा सकेंगे।

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