

नए शोध में पाया गया कि शुरुआती गर्भावस्था में वजन घटाने वाली दवाओं का असर हर महिला पर एक जैसा नहीं होता।
जो महिलाएं केवल वजन कम करने के लिए दवा ले रही थीं, उनमें समय से पहले जन्म या अन्य जटिलताओं का खतरा नहीं बढ़ा।
डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं में इन दवाओं के साथ समय से पहले बच्चे के जन्म का खतरा थोड़ा अधिक देखा गया।
शोधकर्ताओं का मानना है कि बढ़ा हुआ खतरा दवा से ज्यादा डायबिटीज बीमारी के कारण हो सकता है।
डॉक्टर अब मरीज की स्थिति देखकर सलाह देंगे, लेकिन गर्भावस्था से पहले दवाएं बंद करने की सलाह अभी भी जारी है।
हाल ही में एक बड़े शोध में यह बात सामने आई है कि गर्भावस्था के शुरुआती समय में वजन कम करने वाली दवाओं का असर हर महिला पर एक जैसा नहीं होता। यह जानकारी बहुत जरूरी है, क्योंकि आजकल कई महिलाएं वजन घटाने के लिए ऐसी दवाओं का उपयोग कर रही हैं।
कुछ दवाएं जैसे सेमाग्लूटाइड और लिराग्लूटाइड पहले डायबिटीज यानी शुगर की बीमारी के इलाज के लिए बनाई गई थीं। बाद में यह देखा गया कि ये दवाएं भूख कम कर देती हैं। जब भूख कम लगती है, तो व्यक्ति कम खाना खाता है और उसका वजन धीरे-धीरे कम होने लगता है। इसी कारण अब इन दवाओं का उपयोग वजन कम करने के लिए भी किया जाने लगा है।
गर्भावस्था के समय इन दवाओं को लेकर चिंता इसलिए होती है क्योंकि अभी तक यह साफ नहीं है कि ये दवाएं गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए सुरक्षित हैं या नहीं। डॉक्टर आमतौर पर सलाह देते हैं कि अगर कोई महिला बच्चा प्लान कर रही है, तो उसे कम से कम आठ हफ्ते पहले ये दवाएं बंद कर देनी चाहिए। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि महिला को यह पता ही नहीं होता कि वह गर्भवती है और वह दवा लेती रहती है। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि इससे कोई नुकसान होता है या नहीं।
इस सवाल का जवाब जानने के लिए डेनमार्क में एक बड़ा अध्ययन किया गया। इसमें सात 7,50,000 से ज्यादा गर्भावस्थाओं के आंकड़ों को देखा गया। शोधकर्ताओं ने यह समझने की कोशिश की कि जिन महिलाओं ने गर्भधारण से पहले या गर्भावस्था के शुरुआती समय में इन दवाओं का उपयोग किया, उनमें कोई समस्या हुई या नहीं। इस दौरान उन्होंने महिलाओं की उम्र, वजन, धूम्रपान की आदत, शिक्षा और पहले से मौजूद बीमारियों जैसी बातों को भी ध्यान में रखा, ताकि सही नतीजे सामने आ सकें।
ह्यूमन रिप्रोडक्शन ओपन में प्रकाशित इस शोध में एक बहुत महत्वपूर्ण बात सामने आई। जिन महिलाओं ने इन दवाओं का उपयोग केवल वजन कम करने के लिए किया था, उनमें गर्भावस्था से जुड़ी कोई बड़ी समस्या नहीं देखी गई। ऐसे मामलों में समय से पहले बच्चे का जन्म होने का खतरा नहीं बढ़ा। इसके अलावा ब्लड प्रेशर की समस्या और अन्य जटिलताएं भी ज्यादा नहीं पाई गईं। यह बात उन महिलाओं के लिए थोड़ी राहत देने वाली है, जिन्होंने गलती से गर्भावस्था के शुरुआती समय में ये दवाएं ले ली हों।
लेकिन तस्वीर पूरी तरह से एक जैसी नहीं है। जिन महिलाओं को पहले से डायबिटीज थी और वे इन दवाओं का उपयोग कर रही थीं, उनमें समय से पहले बच्चे के जन्म का खतरा थोड़ा बढ़ा हुआ पाया गया। हालांकि यह खतरा बहुत ज्यादा नहीं था। लगभग नौ से ग्यारह प्रतिशत मामलों में ही समय से पहले जन्म हुआ। फिर भी यह एक महत्वपूर्ण संकेत है, जिस पर ध्यान देने की जरूरत है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि इस खतरे के पीछे केवल दवाएं ही जिम्मेदार नहीं हैं। असली कारण डायबिटीज भी हो सकती है। डायबिटीज पहले से ही गर्भावस्था में कई तरह की समस्याओं का खतरा बढ़ाती है। इसलिए यह हो सकता है कि दवाओं के बजाय बीमारी खुद इस खतरे को बढ़ा रही हो। यानी दवा लेने वाली महिलाओं में ज्यादा खतरा इसलिए दिखा, क्योंकि उन्हें पहले से डायबिटीज थी।
इस शोध से डॉक्टरों को काफी मदद मिल सकती है। अब वे हर महिला को एक जैसा खतरा बताने के बजाय उसकी स्थिति को समझकर सलाह दे सकते हैं। वे यह देख सकते हैं कि महिला दवा किस कारण से ले रही थी और उसकी सेहत कैसी है। इससे महिलाओं को ज्यादा सही और व्यक्तिगत सलाह मिल सकेगी।
फिर भी यह समझना बहुत जरूरी है कि अभी इन दवाओं को गर्भावस्था में सुरक्षित नहीं माना गया है। डॉक्टर अभी भी यही कहते हैं कि गर्भधारण से पहले इन दवाओं को बंद कर देना चाहिए। इसका कारण यह है कि अभी और शोध की जरूरत है और यह अध्ययन केवल संबंध दिखाता है, यह साबित नहीं करता कि दवा ही समस्या का कारण है।
अंत में यही कहा जा सकता है कि यह नया शोध थोड़ी राहत जरूर देता है, खासकर उन महिलाओं के लिए जिन्होंने अनजाने में शुरुआती गर्भावस्था में ये दवाएं ले ली हों। लेकिन सावधानी रखना अभी भी बहुत जरूरी है। अगर किसी महिला ने गलती से ऐसी दवा ले ली है, तो उसे घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। सही जानकारी और समय पर इलाज से ही मां और बच्चे दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।