

डब्ल्यूएचओ ने कांगो को बंडीबुग्यो वायरस के लिए बहुत उच्च जोखिम क्षेत्र घोषित किया, युगांडा में स्थिति अपेक्षाकृत नियंत्रित है।
युगांडा में केवल दो मामले सामने आए, दोनों का संबंध कांगो के संक्रमित क्षेत्रों से जुड़ा पाया गया है।
बंडीबुग्यो वायरस इबोला परिवार का खतरनाक वायरस है, जिसके लिए अभी तक कोई वैक्सीन या दवा उपलब्ध नहीं है।
संक्रमित मरीजों के संपर्क में आए लोगों की 21 दिन तक निगरानी और तुरंत जांच की व्यवस्था अनिवार्य की गई है।
डब्ल्यूएचओ ने निगरानी, सुरक्षित इलाज, जागरूकता और सीमा नियंत्रण के जरिए संक्रमण रोकने के लिए देशों को सख्त निर्देश दिए हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अफ्रीकी देशों डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में फैल रहे बंडीबुग्यो वायरस रोग को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। 22 मई 2026 तक डब्ल्यूएचओ ने कांगो के लिए खतरे का स्तर “बहुत अधिक” और युगांडा के लिए “उच्च” बताया है। यह वायरस इबोला परिवार से जुड़ा हुआ है और तेजी से फैलने की क्षमता रखता है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि अभी तक इस वायरस के खिलाफ कोई स्वीकृत वैक्सीन या दवा उपलब्ध नहीं है।
कांगो और युगांडा की स्थिति अलग
डब्ल्यूएचओ के अनुसार दोनों देशों की स्थिति एक जैसी नहीं है। कांगो में वायरस का संक्रमण अधिक व्यापक रूप ले चुका है, जबकि युगांडा में अब तक केवल दो मामलों की पुष्टि हुई है। युगांडा के दोनों संक्रमित मरीजों का संबंध कांगो के उन इलाकों से पाया गया है, जहां पहले से वायरस का प्रसार हो रहा था।
अच्छी बात यह है कि युगांडा में अभी तक संक्रमित लोगों के संपर्क में आए अन्य लोगों में बीमारी फैलने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। फिर भी डब्ल्यूएचओ ने दोनों देशों को सतर्क रहने और तुरंत कदम उठाने की सलाह दी है।
क्या है बंडीबुग्यो वायरस?
बंडीबुग्यो वायरस, ऑर्थोएबोलावायरस समूह का हिस्सा है। यह वायरस इबोला वायरस की तरह ही गंभीर बुखार और रक्तस्राव वाली बीमारी पैदा कर सकता है। संक्रमित व्यक्ति को तेज बुखार, कमजोरी, उल्टी, दस्त और शरीर से खून बहने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इलाज और नियंत्रण न किया जाए तो यह वायरस तेजी से फैल सकता है। चूंकि इसके लिए कोई स्वीकृत दवा या टीका उपलब्ध नहीं है, इसलिए संक्रमण रोकना ही सबसे बड़ा उपाय माना जा रहा है।
डब्ल्यूएचओ ने आपातकालीन तैयारियों पर दिया जोर
डब्ल्यूएचओ ने प्रभावित देशों से स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने और तुरंत विशेष नियंत्रण केंद्र बनाने को कहा है। इन केंद्रों का काम संक्रमण की निगरानी करना, मरीजों की पहचान करना और इलाज की व्यवस्था करना होगा।
इसके अलावा संक्रमित लोगों के संपर्क में आए व्यक्तियों की सूची तैयार करने और 21 दिनों तक उनकी निगरानी करने का निर्देश दिया गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों को हर दिन डब्ल्यूएचओ को नए मामलों की जानकारी भेजने को भी कहा गया है।
डब्ल्यूएचओ ने यह भी कहा है कि जिन इलाकों में संघर्ष या असुरक्षा की स्थिति है, वहां स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित की जाए।
लोगों में जागरूकता फैलाने की जरूरत
डब्ल्यूएचओ का मानना है कि केवल सरकारी कदम पर्याप्त नहीं होंगे। लोगों का सहयोग भी बेहद जरूरी है। इसलिए स्थानीय धार्मिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पारंपरिक चिकित्सकों की मदद से जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया गया है।
लोगों को यह समझाया जा रहा है कि बीमारी छिपाने के बजाय तुरंत जांच कराना जरूरी है। संक्रमित व्यक्ति को अलग रखना, सुरक्षित अंतिम संस्कार करना और स्वास्थ्य नियमों का पालन करना संक्रमण रोकने में मदद करेगा।
कई क्षेत्रों में लोगों के बीच डर और अफवाहें भी फैल रही हैं। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि समुदायों के साथ विश्वास बनाना और उनकी समस्याओं को समझना बहुत आवश्यक है।
अस्पतालों में सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश
डब्ल्यूएचओ ने अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में संक्रमण रोकने के लिए विशेष सावधानी बरतने को कहा है। डॉक्टरों और नर्सों को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण यानी पीपीई किट का सही उपयोग सिखाया जा रहा है।
स्वास्थ्यकर्मियों को पर्याप्त मास्क, दस्ताने और अन्य सुरक्षा सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही संक्रमित मरीजों को अलग रखने के लिए विशेष उपचार केंद्र बनाए जा रहे हैं।
डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी दी है कि अस्पतालों में संक्रमण फैलने का खतरा अधिक रहता है, इसलिए हर स्वास्थ्यकर्मी को पूरी सावधानी बरतनी होगी।
जांच और प्रयोगशालाओं को मजबूत बनाने की कोशिश
संक्रमण की जल्दी पहचान के लिए डब्ल्यूएचओ ने प्रयोगशालाओं की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया है। कई इलाकों में नई जांच सुविधाएं शुरू की जा रही हैं ताकि रिपोर्ट जल्दी मिल सके।
डब्ल्यूएचओ ने यह भी स्पष्ट किया है कि जीन क्सपर्ट मशीन बंडीबुग्यो वायरस का पता नहीं लगा सकती। इसलिए दूसरी आधुनिक आरटी-पीसीआर तकनीकों का उपयोग करने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जितनी जल्दी मरीज की पहचान होगी, उतनी जल्दी उसे अलग करके इलाज शुरू किया जा सकेगा।
यात्रा और सीमा पर सख्ती
संक्रमण को दूसरे देशों में फैलने से रोकने के लिए सीमाओं और हवाई अड्डों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। यात्रियों की जांच की जा रही है और बुखार या बीमारी के लक्षण मिलने पर उन्हें यात्रा की अनुमति नहीं दी जा रही।
डब्ल्यूएचओ ने प्रभावित देशों को सलाह दी है कि संक्रमित मरीजों और उनके संपर्क में आए लोगों की अंतरराष्ट्रीय यात्रा रोकी जाए। इसके अलावा बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों और भीड़ वाले आयोजनों को कुछ समय के लिए टालने पर भी विचार किया जा रहा है।
नई दवाओं और वैक्सीन पर शोध जारी
हालांकि अभी तक इस वायरस के लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन नहीं है, लेकिन वैज्ञानिक नई दवाओं और टीकों पर तेजी से काम कर रहे हैं। डब्ल्यूएचओ ने विभिन्न देशों और शोध संस्थानों से मिलकर क्लिनिकल ट्रायल शुरू करने की अपील की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय पर प्रभावी वैक्सीन और इलाज विकसित हो जाता है, तो भविष्य में इस तरह के प्रकोप को नियंत्रित करना आसान हो जाएगा।
पूरी दुनिया के लिए चेतावनी
बंडीबुग्यो वायरस का यह प्रकोप केवल अफ्रीका तक सीमित चिंता नहीं है। वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी संक्रामक बीमारी का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। इसलिए सभी देशों को सतर्क रहने और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने की जरूरत है।
डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि तेजी से कार्रवाई, लोगों का सहयोग और अंतरराष्ट्रीय समर्थन ही इस खतरनाक वायरस को फैलने से रोक सकता है।