कोलेस्ट्रॉल के नए दिशानिर्देशों में जल्द जांच व जीवनभर हृदय रोग के खतरों को कम करने पर जोर

नए दिशानिर्देशों के मुताबिक, जल्दी जांच, सही जीवनशैली, उन्नत परीक्षण और समय पर दवा के जरिए दिल की बीमारी के खतरों को कम किया जा सकता है
नए दिशानिर्देशों में जीवनभर के खतरे पर ध्यान, कम उम्र से जांच और समय पर इलाज शुरू करने की सलाह दी गई है।
नए दिशानिर्देशों में जीवनभर के खतरे पर ध्यान, कम उम्र से जांच और समय पर इलाज शुरू करने की सलाह दी गई है।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • नए दिशानिर्देशों में जीवनभर के खतरे पर ध्यान, कम उम्र से जांच और समय पर इलाज शुरू करने की सलाह दी गई है।

  • एएससीवीडी की रोकथाम यह नया टूल है, जो 10 और 30 साल का दिल की बीमारी का खतरा अधिक सटीक तरीके से बताता है।

  • एलडीएल के साथ एलपी(ए), एपीओ बी और सीएसी स्कोर जैसे टेस्ट से छिपे हुए खतरों को पहचानने में मदद मिलती है।

  • स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम और खराब आदतों से बचना दिल की बीमारी रोकने का पहला और सबसे जरूरी कदम माना गया है।

  • यदि जीवनशैली से सुधार न हो, तो स्टैटिन और अन्य दवाओं का जल्दी उपयोग कर जोखिम को कम करने की सलाह दी गई है।

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (एएचए) और अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी (एसीसी) ने 2026 में कोलेस्ट्रॉल (डिस्लिपिडेमिया) के इलाज और रोकथाम के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। यह 2018 के बाद पहला बड़ा अपडेट है। इसका मुख्य उद्देश्य दिल की बीमारी को कम करना और लोगों को कम उम्र से ही सावधान करना है। दिशानिर्देश जर्नल ऑफ द अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी' नामक पत्रिका में प्रकाशित किए गए हैं।

दिल की बीमारी को पहले से रोकने पर जोर

नए दिशानिर्देश का सबसे बड़ा संदेश है कि दिल की बीमारी को शुरू होने से पहले ही रोका जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, लगभग 80 फीसदी दिल की बीमारियां रोकी जा सकती हैं।

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अब डॉक्टर सिर्फ 10 साल का जोखिम नहीं देखते, बल्कि पूरे जीवन का खतरा देखते हैं। इसका मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति कम उम्र में ही अपना कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखता है, तो आगे चलकर हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बहुत कम हो जाता है।

नया रिस्क कैलकुलेटर: एएससीवीडी की रोकथाम

पहले “लोगों पर किए गए परीक्षण संबंधी समीकरण” नाम का टूल इस्तेमाल होता था, लेकिन यह जोखिम को ज्यादा दिखाता था। अब इसकी जगह नया टूल आया है - एथेरोस्क्लेरोटिक हृदय रोग (एएससीवीडी) की रोकथाम। यह टूल 10 साल और 30 साल दोनों का जोखिम बताता है और व्यक्ति की पूरे स्वास्थ्य को ध्यान में रखता है।

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रिस्क कैटेगरी -

  • तीन फीसदी से कम - कम जोखिम

  • तीन से पांच फीसदी - थोड़ा जोखिम

  • पांच -10 फीसदी मध्यम जोखिम

  • 10 फीसदी या ज्यादा - ज्यादा जोखिम

इससे डॉक्टर यह तय करते हैं कि मरीज को दवा शुरू करनी है या नहीं।

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सिर्फ बैड कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) नहीं, और भी टेस्ट जरूरी - पहले सिर्फ एलडीएल (बैड कोलेस्ट्रॉल) पर ध्यान दिया जाता था, लेकिन अब नई गाइडलाइन में कुछ और टेस्ट भी जरूरी बताए गए हैं।

1. लिपोप्रोटीन (ए) – एलपी (ए) : इसे जीवन में कम से कम एक बार जरूर जांचना चाहिए। यह ज्यादातर जेनेटिक होता है, अगर इसका स्तर ज्यादा है, तो दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।

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2. एपीओबी टेस्ट : यह शरीर में खराब कणों की सही संख्या बताता है, यह एलडीएल से ज्यादा सटीक माना जाता है।

3. सीएसी स्कोर (कैल्शियम स्कोर) : यह एक सीटी स्कैन होता है, इससे दिल की धमनियों में जमी चर्बी (प्लाक) का पता चलता है। शून्य स्कोर मतलब कम खतरा। 100 से ज्यादा स्कोर मतलब तुरंत इलाज जरूरी।

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युवाओं के लिए खास सलाह

नए दिशानिर्देश में 30-39 साल के लोगों पर खास ध्यान दिया गया है। अगर किसी को नीचे दिए गए खतरे हैं, तो जल्दी जांच शुरू करनी चाहिए।

परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास, धूम्रपान, उच्च रक्तचाप, डायबिटीज और मोटापा आदि। इसका मकसद है कि बीमारी को शुरुआती स्टेज में ही रोका जा सके।

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जीवन शैली है सबसे जरूरी

डॉक्टरों का कहना है कि सबसे पहले जीवनशैली सुधारना जरूरी है। जेसा ज्यादा फल और सब्जियां खाएं, साबुत अनाज खाएं, कम फैट वाला प्रोटीन लें,

हफ्ते में कम से कम 150 मिनट व्यायाम करें।

क्या कम करें : मीठा, प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा नमक, तैलीय खाना आदि। लेकिन अगर जीवनशैली से सुधार नहीं होता, तो दवा जरूरी हो सकती है।

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दवाओं का जल्दी इस्तेमाल

नई गाइडलाइन कहती है कि अगर कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण में नहीं है, तो पहले से जल्दी दवा शुरू करनी चाहिए।

मुख्य दवाएं-

स्टैटिन (सबसे पहले दी जाती है)

अन्य विकल्प -

  • एजेटिमिब

  • बेम्पेडोइक एसिड

  • इन्क्लिसिरान

  • इवोलोक्युमैब

यह दवाएं उन लोगों के लिए हैं जिन्हें स्टैटिन से फायदा नहीं होता या और ज्यादा कंट्रोल की जरूरत होती है।

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ट्राइग्लिसराइड्स पर भी ध्यान

अगर ट्राइग्लिसराइड्स 150 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से ज्यादा हैं, तो कारणों को ठीक करना जरूरी है जैसे - मोटापा और शराब आदि।

अगर यह 500 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से ज्यादा हो जाए, तो दवा जरूरी हो जाती है, ताकि पैंक्रियाटाइटिस जैसी गंभीर समस्या से बचा जा सके।

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2026 की यह नई दिशानिर्देश हमें एक साफ संदेश देती है कि दिल की बीमारी को रोका जा सकता है, अगर समय रहते सही कदम उठाए जाएं।

जल्दी जांच, सही जीवनशैली और जरूरत पड़ने पर समय पर दवा - यही दिल को स्वस्थ रखने का सबसे अच्छा तरीका है।

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