

लोकल सर्कल्स की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 46 फीसदी वयस्क रोजाना छह घंटे से कम सोते हैं, जिसे साइलेंट स्लीप एपिडेमिक कहा जा रहा है।
सर्वे में 393 जिलों के लगभग 89,000 लोगों ने भाग लिया, जिसमें युवाओं और कामकाजी लोगों में नींद की समस्या अधिक पाई गई।
करीब 72 फीसदी लोगों ने बताया कि उनकी नींद रात में वॉशरूम जाने, शोर, मच्छरों और अनियमित दिनचर्या के कारण टूटती है।
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के शोध के अनुसार लगातार कम नींद दिमाग, दिल, मानसिक स्वास्थ्य और शरीर की कार्यक्षमता को प्रभावित करती है।
रैंड कॉर्पोरेशन के अध्ययन के मुताबिक, नींद की कमी से वैश्विक अर्थव्यवस्था को हर साल लगभग 680 अरब डॉलर का नुकसान होता है।
हर साल विश्व नींद दिवस 13 मार्च को मनाया जाता है, इस मौके पर लोगों को अच्छी नींद के महत्व के बारे में जागरूक किया जाता है। इस साल जारी एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में नींद की कमी एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार लगभग 46 फीसदी भारतीय वयस्क रोजाना छह घंटे से भी कम नींद ले रहे हैं। विशेषज्ञ इसे “साइलेंट स्लीप एपिडेमिक” यानी चुपचाप फैलती नींद की महामारी कह रहे हैं।
यह रिपोर्ट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लोकल सर्कल्स द्वारा जारी की गई है, जिसमें देश के कई हिस्सों से लोगों की राय ली गई। रिपोर्ट से यह साफ होता है कि बदलती जीवनशैली, ज्यादा स्क्रीन टाइम और तनाव के कारण लोगों की नींद पर बुरा असर पड़ रहा है।
सर्वे में सामने आए अहम आंकड़े
इस सर्वे में देश के 393 जिलों से लगभग 89,000 लोगों ने हिस्सा लिया। सर्वे में कई दिलचस्प आंकड़े सामने आए। जिसमें कहा गया है कि 46 फीसदी लोग रोजाना छह घंटे से कम सोते हैं। 72 फीसदी लोगों की नींद रात में बीच में टूट जाती है। कई लोग रात में बार-बार वॉशरूम जाने के कारण जागते हैं। युवाओं और कामकाजी लोगों में नींद की समस्या ज्यादा देखी गई।
हालांकि एक सकारात्मक बात यह भी है कि पिछले साल की तुलना में स्थिति थोड़ी बेहतर हुई है। एक साल पहले 59 फीसदी लोग छह घंटे से कम सोते थे, जबकि अब यह संख्या घटकर 46 फीसदी रह गई है। इसका मतलब है कि लोग धीरे-धीरे नींद के महत्व को समझने लगे हैं।
युवाओं और कामकाजी लोगों पर ज्यादा असर
रिपोर्ट के अनुसार किशोरों और युवा कामकाजी लोगों में नींद की समस्या सबसे ज्यादा है। इसके पीछे कई कारण बताए गए हैं जिसमें मोबाइल और लैपटॉप का ज्यादा इस्तेमाल, देर रात तक सोशल मीडिया चलाना, अनियमित दिनचर्या, पढ़ाई और काम का ज्यादा दबाव आदि कारण शामिल हैं।
तनाव और चिंता
आजकल कई लोग देर रात तक फोन इस्तेमाल करते रहते हैं। इससे दिमाग को आराम नहीं मिल पाता और नींद आने में देरी होती है। लगातार ऐसा होने से नींद की गुणवत्ता खराब हो जाती है।
नींद टूटने के सामान्य कारण
सर्वे में लोगों से यह भी पूछा गया कि उनकी नींद किन कारणों से टूटती है। इसमें कुछ आम वजहें सामने आईं।
सबसे बड़ा कारण रात में वॉशरूम जाना बताया गया, जो लगभग 72 फीसदी लोगों ने बताया। इसके अलावा अन्य कारण भी सामने आए।
मच्छर या कीड़े
अनियमित सोने का समय
तनाव या चिंता
इन कारणों की वजह से कई लोगों की नींद पूरी नहीं हो पाती और सुबह उठने पर थकान महसूस होती है।
स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर
नींद की कमी का असर केवल थकान तक सीमित नहीं है। डॉक्टरों के अनुसार लगातार कम सोने से कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
शोध संस्थान हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के अनुसार, सिर्फ एक रात की कम नींद भी दिमाग के उस हिस्से को प्रभावित कर सकती है जो फैसले लेने और सोचने की क्षमता को नियंत्रित करता है।
लंबे समय तक नींद की कमी से ये समस्याएं हो सकती हैं -
चिंता और डिप्रेशन
दिल की बीमारी
डायबिटीज और मेटाबॉलिक समस्याएं
पढ़ाई और काम में खराब प्रदर्शन
इसी कारण अब विशेषज्ञ नींद को स्वास्थ्य का तीसरा महत्वपूर्ण स्तंभ मानते हैं, ठीक वैसे ही जैसे अच्छा भोजन और नियमित व्यायाम।
अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है असर
नींद की कमी केवल स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करती है। एक अध्ययन के अनुसार दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को हर साल नींद की कमी के कारण भारी नुकसान होता है।
अमेरिका की रिसर्च संस्था रैंड कॉर्पोरेशन के मुताबिक, पर्याप्त नींद न लेने से वैश्विक अर्थव्यवस्था को हर साल लगभग 680 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है। इसका कारण कम उत्पादकता, काम के दौरान दुर्घटनाएं, बढ़ते स्वास्थ्य खर्च और समय से पहले मौतें हैं।
तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्था जैसे भारत के लिए यह चिंता का विषय है। अगर बड़ी संख्या में लोग पर्याप्त नींद नहीं लेंगे तो इसका असर काम की क्षमता और उत्पादकता पर पड़ेगा।
अच्छी नींद के लिए क्या करें
विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ आसान आदतें अपनाकर नींद की गुणवत्ता बेहतर की जा सकती है।
सोने से पहले मोबाइल और स्क्रीन का उपयोग कम करें
रोज एक ही समय पर सोने और उठने की आदत बनाएं
शाम के बाद कैफीन कम लें
सोने का कमरा शांत और आरामदायक रखें
नियमित व्यायाम करें
डॉक्टरों के अनुसार वयस्कों को रोजाना 7 से 9 घंटे की नींद लेनी चाहिए। अच्छी नींद शरीर और दिमाग दोनों के लिए बेहद जरूरी है।
कुल मिलाकर यह रिपोर्ट दिखाती है कि भारत में नींद की समस्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन लोगों में जागरूकता भी बढ़ रही है। अगर सही जीवनशैली अपनाई जाए तो इस “साइलेंट स्लीप एपिडेमिक” को काफी हद तक रोका जा सकता है।