

छह हफ्तों तक हर रात करीब 80 मिनट कम सोने वाले लोगों का औसतन 450 ग्राम वजन बढ़ा, नई स्टडी में खुलासा।
कम नींद लेने वाले प्रतिभागी पहले की तुलना में अधिक समय तक बैठे रहे और उनकी रोज़मर्रा की शारीरिक गतिविधि कम हुई।
शोधकर्ताओं का कहना है कि पर्याप्त नींद वजन नियंत्रित रखने के साथ हृदय रोग और डायबिटीज का खतरा भी घटा सकती है।
अध्ययन में 95 वयस्क शामिल हुए, जिनकी नींद, वजन, कमर का घेरा, शारीरिक गतिविधि और हार्मोन में बदलाव दर्ज किए गए।
विशेषज्ञों के अनुसार, स्वस्थ भोजन और नियमित व्यायाम के साथ पूरी नींद भी अच्छी सेहत और फिटनेस के लिए बेहद जरूरी है।
रोजाना थोड़ी कम नींद लेना भी सेहत पर असर डाल सकता है। अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी वैगेलोस कॉलेज ऑफ फिजिशियंस एंड सर्जन्स के शोधकर्ताओं की एक नई स्टडी में यह बात सामने आई है। शोध में पाया गया कि जिन लोगों ने लगातार छह हफ्तों तक हर रात लगभग 80 मिनट कम नींद ली, उनका औसतन एक पाउंड यानी करीब 450 ग्राम वजन बढ़ गया। इसके साथ ही वे पहले की तुलना में अधिक समय तक बैठे रहे और उनकी शारीरिक गतिविधि भी कम हो गई।
शोधकर्ताओं का कहना है कि पर्याप्त नींद लेना केवल शरीर को आराम देने के लिए ही नहीं, बल्कि वजन को नियंत्रित रखने और कई गंभीर बीमारियों के खतरे को कम करने के लिए भी जरूरी हो सकता है।
आम लोगों की दिनचर्या को ध्यान में रखकर किया गया अध्ययन
इससे पहले हुई कई स्टडी में लोगों को केवल चार घंटे की नींद लेने दी गई थी। इन अध्ययनों में देखा गया था कि बहुत कम नींद लेने से भूख बढ़ जाती है और लोग अधिक खाना खाने लगते हैं। लेकिन इतनी कम नींद लंबे समय तक लेना अधिकांश लोगों के लिए संभव नहीं होता।
नई स्टडी में वैज्ञानिकों ने ऐसी स्थिति का अध्ययन किया जो आम जीवन के ज्यादा करीब है। आज बड़ी संख्या में लोग रोजाना सात से आठ घंटे की बजाय केवल पांच से छह घंटे ही सो पाते हैं। इसी कारण शोधकर्ताओं ने हल्की लेकिन लगातार होने वाली नींद की कमी के असर को समझने की कोशिश की।
95 लोगों पर हुआ शोध
इस अध्ययन में 95 वयस्कों को शामिल किया गया। ये सभी सामान्य रूप से हर रात सात से आठ घंटे की नींद लेते थे। अध्ययन के दौरान एक चरण में प्रतिभागियों ने छह हफ्तों तक अपनी सामान्य समय से करीब 90 मिनट देर से सोना शुरू किया। दूसरे चरण में उन्होंने अपनी सामान्य नींद की दिनचर्या अपनाई।
पूरे अध्ययन के दौरान सभी प्रतिभागियों ने हाथ में पहनने वाला एक उपकरण लगाया, जिससे उनकी नींद और शारीरिक गतिविधियों पर नजर रखी गई। इसके अलावा उनके शरीर का वजन, कमर का घेरा, शरीर में वसा की मात्रा और भूख से जुड़े कुछ हार्मोन की भी जांच की गई।
वजन बढ़ने के साथ बढ़ा बैठे रहने का समय
अध्ययन में पाया गया कि कम नींद लेने वाले लोगों का औसतन एक पाउंड वजन बढ़ गया। इसके अलावा वे पहले की तुलना में रोज लगभग 17 मिनट अधिक समय तक निष्क्रिय रहे। पुरुषों और रजोनिवृत्ति के बाद की महिलाओं में यह समय करीब 30 मिनट प्रतिदिन तक बढ़ गया।
शोधकर्ताओं का कहना है कि कम नींद लेने पर लोग केवल अधिक देर तक जागते ही नहीं हैं, बल्कि जागने के दौरान भी पहले की तुलना में कम सक्रिय रहते हैं। लंबे समय तक अधिक बैठे रहना कई पुरानी बीमारियों के खतरे को बढ़ा सकता है।
दूसरी स्टडी में भी मिले ऐसे ही संकेत
इसी समूह पर पहले किए गए कुछ अन्य अध्ययनों में भी कम नींद के नुकसान सामने आए थे। एक अध्ययन में पाया गया कि जिन महिलाओं में पहले से हृदय और मेटाबॉलिक बीमारियों का खतरा था, उनमें लगातार कम नींद लेने से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ गया। यह स्थिति आगे चलकर टाइप-टू डायबिटीज का कारण बन सकती है।
एक अन्य अध्ययन में यह भी देखा गया कि हल्की लेकिन लगातार नींद की कमी से शरीर में सूजन से जुड़ी कोशिकाओं की संख्या बढ़ने लगी। यह बदलाव हृदय रोगों के खतरे से जुड़ा माना जाता है।
विशेषज्ञों की क्या है सलाह
शोध पत्र में शोधकर्ताओं के हवाले से कहना है कि स्वस्थ भोजन और नियमित व्यायाम के साथ-साथ पर्याप्त नींद भी अच्छी सेहत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। केवल खानपान और व्यायाम पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। यदि लोग रोजाना पूरी नींद लें तो वजन बढ़ने और उससे जुड़ी बीमारियों का खतरा कम किया जा सकता है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि छह हफ्तों में बढ़ा वजन भले ही बहुत अधिक न लगे, लेकिन यदि यही स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो साल भर में इसका असर काफी बड़ा हो सकता है। इसलिए नियमित रूप से पर्याप्त नींद लेना स्वस्थ जीवनशैली का जरूरी हिस्सा माना जाना चाहिए।
यह अध्ययन "स्किम्पिंग ऑन स्लीप एंड इट्स इम्पैक्ट ऑन बॉडी वेट एंड कंपोजिशन: ए पूल्ड एनालिसिस ऑफ रैंडमाइज्ड ट्रायल्स" शीर्षक से एनल्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस विषय पर आगे भी अध्ययन किए जाएंगे ताकि यह समझा जा सके कि पर्याप्त नींद लेने से लोगों की सेहत पर लंबे समय में कितना सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।