

कांगो में इबोला के 808 मामले सामने आए, बढ़ते संक्रमण से उपचार केंद्रों पर भारी दबाव और चिंता बढ़ी।
स्वास्थ्य कर्मियों को संपर्क खोजने में कठिनाई हो रही है, जिससे संक्रमण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं है।
इटुरी प्रांत में 90 प्रतिशत से अधिक मामले दर्ज हुए, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं पहले से कमजोर हैं।
साफ पानी और स्वच्छता की कमी के कारण प्रभावित क्षेत्रों में इबोला के फैलने का खतरा बढ़ा।
बढ़ते संकट पर चर्चा के लिए अफ्रीकी नेताओं, संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन की आपात बैठक आयोजित।
अफ्रीकी देश कांगो में इबोला वायरस का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों और राहत संगठनों ने चेतावनी दी है कि बीमारी के बढ़ते मामलों के कारण इलाज केंद्रों पर भारी दबाव पड़ रहा है। मरीजों की संख्या इतनी तेजी से बढ़ रही है कि स्वास्थ्य व्यवस्था उन्हें संभालने में कठिनाई महसूस कर रही है।
कांगो के नेशनल इंस्टीटूट ऑफ पब्लिक हेल्थ के अनुसार, 15 जून, 2026 तक देश में इबोला के 808 मामलों की पुष्टि तथा इनमें से 192 लोगों की मौत हो चुकी है। पड़ोसी देश युगांडा में भी 19 संक्रमण के मामले सामने आए हैं। कांगो के इटुरी प्रांत में सबसे अधिक मरीज मिले हैं। कुल मामलों में से 90 प्रतिशत से ज्यादा इसी क्षेत्र में दर्ज किए गए हैं।
इलाज केंद्रों की बढ़ती परेशानी
अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा सहायता संगठन डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने कहा है कि इटुरी प्रांत के कई उपचार केंद्र अब अपनी क्षमता से अधिक मरीजों का इलाज कर रहे हैं। बड़ी संख्या में मरीज तब अस्पताल पहुंच रहे हैं जब उनकी हालत काफी गंभीर हो चुकी होती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कई संक्रमित लोगों की पहचान समय पर नहीं हो पा रही है। ऐसे लोग बीमारी फैलाने के बाद ही स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच रहे हैं। इससे संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ना मुश्किल हो रहा है।
बीमारी की सही तस्वीर अभी साफ नहीं
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक स्थिति सरकारी आंकड़ों से अधिक गंभीर हो सकती है। कई क्षेत्रों में निगरानी और जांच की व्यवस्था कमजोर है। इसके कारण यह पता लगाना कठिन हो रहा है कि बीमारी किन-किन इलाकों तक फैल चुकी है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा कि अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि संक्रमण का भौगोलिक विस्तार कितना बड़ा है। जब तक सभी प्रभावित क्षेत्रों की सही जानकारी नहीं मिलेगी, तब तक बीमारी पर पूरी तरह नियंत्रण पाना कठिन रहेगा।
संपर्कों की निगरानी में कमी
इबोला जैसी बीमारी को रोकने के लिए संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों की पहचान और निगरानी बहुत जरूरी होती है। इसे कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग कहा जाता है। लेकिन कांगो में यह प्रक्रिया अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पा रही है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 14 जून तक केवल 63 प्रतिशत पहचाने गए संपर्कों की निगरानी की जा रही थी। विशेषज्ञों का कहना है कि इस दर को कम से कम 95 प्रतिशत तक पहुंचाने की जरूरत है। निगरानी में कमी के कारण कई संक्रमित लोग बिना पहचान के समुदायों में बीमारी फैलाते रहते हैं।
साफ पानी और स्वच्छता की कमी
राहत संगठन ऑक्सफैम ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में साफ पानी और स्वच्छता सुविधाओं की भारी कमी है। कई समुदायों में केवल पांच में से एक व्यक्ति को ही साफ पानी उपलब्ध है। ऐसी परिस्थितियों में बीमारी के फैलने का खतरा और बढ़ जाता है।
मोंगबवालू नामक खनन नगर, जिसे इस प्रकोप का शुरुआती केंद्र माना जा रहा है, वहां भी स्वच्छता की स्थिति कमजोर है। बड़ी आबादी होने के बावजूद पर्याप्त साफ-सफाई और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
संघर्ष और विस्थापन से बढ़ी चुनौती
पूर्वी कांगो लंबे समय से हिंसा और संघर्ष का सामना कर रहा है। इस क्षेत्र में लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार इटुरी प्रांत में प्रकोप शुरू होने से पहले ही लगभग 9.8 लाख लोग विस्थापित थे।
लगातार संघर्ष के कारण कई स्वास्थ्य केंद्र नष्ट हो चुके हैं। कुछ इलाके ऐसे हैं जहां सरकारी नियंत्रण सीमित है। इन क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना बहुत कठिन है। इसी वजह से बीमारी की पहचान और इलाज में देरी हो रही है।
अफ्रीकी देशों की आपात बैठक
बढ़ते खतरे को देखते हुए अफ्रीकी संघ ने आपात बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। इस बैठक में कांगो, युगांडा और अन्य देशों के नेता हिस्सा लेंगे। संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन के वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें शामिल होंगे।
बैठक का उद्देश्य इबोला के खिलाफ संयुक्त प्रयासों को मजबूत करना और आवश्यक वित्तीय सहायता जुटाना है। इसके लिए 518 मिलियन डॉलर की प्रतिक्रिया योजना पर चर्चा की जाएगी।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि इबोला पर नियंत्रण संभव है, लेकिन इसके लिए समय, संसाधन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता होगी। बेहतर निगरानी, तेज जांच, प्रभावी संपर्क खोज और मजबूत स्वास्थ्य सेवाएं इस लड़ाई में सबसे महत्वपूर्ण हथियार हैं।
फिलहाल कांगो के सामने सबसे बड़ी चुनौती बीमारी की वास्तविक स्थिति को समझना और उसके प्रसार को रोकना है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह प्रकोप और अधिक क्षेत्रों में फैल सकता है।