क्या कैंसर के खतरे को प्रभावित कर सकता है, हमारी थाली में परोसा भोजन? क्या कहती है वैज्ञानिक स्टडी

18 लाख लोगों पर हुए वैश्विक अध्ययन में स्तन, प्रोस्टेट और किडनी जैसे कैंसर के जोखिम में कमी के संकेत मिले हैं
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सारांश
  • क्या हमारी थाली में परोसा भोजन कैंसर के खतरे को प्रभावित कर सकता है? 18 लाख लोगों पर हुए वैश्विक अध्ययन से संकेत मिला है कि शाकाहारी आहार स्तन, प्रोस्टेट, किडनी और पैंक्रियाज जैसे कई कैंसर के जोखिम को कम कर सकता है।

  • हालांकि शोध में यह भी सामने आया है कि कुछ विशेष प्रकार के कैंसर में जोखिम बढ़ने के संकेत मिल सकते हैं, जिससे संतुलित और पोषक आहार की अहमियत और बढ़ जाती है।

हर दिन हमारी थाली में परोसा जाने वाला भोजन सिर्फ पेट नहीं भरता, बल्कि हमारी सेहत और बीमारियों के जोखिम को भी तय कर सकता है।

बता दें कि शाकाहारी भोजन को लंबे समय से सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। इस बारे में किए दुनिया के सबसे बड़े अध्ययनों में से एक ने संकेत दिया है कि शाकाहारी भोजन कई प्रकार के कैंसर के खतरे को कम कर सकता है। हालांकि कुछ मामलों में जोखिम बढ़ने के संकेत भी मिले हैं।

ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड के कैंसर एपिडेमियोलॉजी विभाग के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए इस अध्ययन में सामने आया है कि शाकाहारी लोगों में स्तन, प्रोस्टेट, गुर्दे (किडनी) और अग्न्याशय (पैंक्रियाज) जैसे कैंसर का खतरा कम हो सकता है। इस अध्ययन के नतीजे प्रतिष्ठित ब्रिटिश जर्नल ऑफ कैंसर में प्रकाशित हुए हैं।

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18 लाख लोगों पर हुआ अध्ययन

संतुलित और सुनियोजित शाकाहारी आहार को आम तौर पर स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। लेकिन यह अभी तक साफ नहीं था कि यह अलग-अलग तरह के कैंसर के खतरे को किस हद तक प्रभावित करता है, क्योंकि अधिकांश अध्ययनों में शाकाहारियों की संख्या कम होती है।

इस कमी को दूर करने के लिए शोधकर्ताओं ने 'कैंसर रिस्क इन वेजिटेरियंस कंसोर्टियम' के जरिए तीन महाद्वीपों के 18 लाख से अधिक लोगों के डेटा का विश्लेषण किया है।

अध्ययन में लोगों को उनके खान-पान की आदतों के आधार पर पांच समूहों में बांटा गया - मांसाहारी, केवल पोल्ट्री उत्पाद खाने वाले (जो लाल या प्रोसेस्ड मीट नहीं खाते), मछली खाने वाले, शाकाहारी (जो दूध या अंडा लेते हैं) और वीगन, जिनका भोजन पूरी तरह पौधों पर आधारित होता है। शोधकर्ताओं ने इन पांच समूहों में 17 अलग-अलग प्रकार के कैंसर के खतरे की तुलना की।

शाकाहारियों में कई कैंसर का खतरा कम

अध्ययन में सामने आया कि मांस खाने वालों की तुलना में शाकाहारियों में कई प्रकार के कैंसर का खतरा कम पाया गया।

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शाकाहारी लोगों में अग्न्याशय (पैंक्रियाज) कैंसर का जोखिम 21 फीसदी कम था। इसी तरह स्तन कैंसर का 9 फीसदी, प्रोस्टेट कैंसर का 12 फीसदी, किडनी कैंसर का 28 फीसदी और मल्टीपल मायलोमा का खतरा 31 फीसदी तक कम देखा गया। हालांकि शोध में यह भी पाया गया कि शाकाहारियों में भोजन नली के स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा नामक कैंसर का जोखिम करीब दोगुना हो सकता है।

हालांकि कोलोरेक्टल, पेट, लीवर, फेफड़े, अंडाशय, एंडोमेट्रियल, मुंह-गला और मूत्राशय जैसे कई अन्य कैंसरों में शाकाहारियों और मांसाहारियों के बीच कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं मिला।

वीगन डाइट पर मिला अलग संकेत

वीगन लोगों में आंत (बॉवेल) के कैंसर का खतरा मांस खाने वालों की तुलना में अधिक पाया गया। शोधकर्ताओं के अनुसार शाकाहारियों में आहार नली के स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा और वीगन लोगों में आंत (बॉवेल) के कैंसर का अधिक जोखिम संभवतः उन कुछ पोषक तत्वों की कम मात्रा से जुड़ा हो सकता है, जो आमतौर पर पशु-आधारित भोजन में ज्यादा पाए जाते हैं।

हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि वीगन प्रतिभागियों की संख्या कम होने के कारण इस नतीजे की पुष्टि के लिए और शोध जरूरी है।

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यह भी सामने आया है कि मछली खाने वालों में स्तन और किडनी के कैंसर के साथ-साथ आंत के कैंसर का जोखिम भी कम था, जबकि केवल पोल्ट्री उत्पाद खाने वालों में प्रोस्टेट कैंसर का खतरा अपेक्षाकृत कम पाया गया।

अध्ययन से जुड़े शोधकर्ता प्रोफेसर 'टिम की' का इस बारे में प्रेस विज्ञप्ति में कहना है, "दुनिया के कई हिस्सों में शाकाहार के प्रति रुचि तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि कैंसर दुनियाभर में मौत के प्रमुख कारणों में से एक है और करीब हर छह में से एक मौत कैंसर के कारण होती है। उनके अनुसार कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए ऐसे आहार की सलाह दी जाती है जिसमें फल, सब्जियां और फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ ज्यादा हों और प्रोसेस्ड मीट से परहेज किया जाए।"

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शोध से जुड़े वैज्ञानिकों के मुताबिक शाकाहारी लोग आमतौर पर फल, सब्जियां और फाइबर ज्यादा खाते हैं और प्रोसेस्ड मीट नहीं खाते, जिससे कुछ कैंसर का खतरा कम हो सकता है। लेकिन कुछ पोषक तत्व जो मुख्य रूप से पशु-आधारित भोजन में मिलते हैं, उनकी कमी कुछ कैंसर जोखिमों को प्रभावित कर सकती है।

ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर से बचाव के लिए भोजन में साबुत अनाज, दालें-फलियां, फल और सब्जियां ज्यादा शामिल करें। साथ ही प्रोसेस्ड मीट से बचें और लाल मांस सीमित मात्रा में ही लें।

शोधकर्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से और अधिक आंकड़े जुटाने की जरूरत है, खासकर वीगन डाइट पर, ताकि यह बेहतर समझा जा सके कि अलग-अलग तरह का खान-पान कैंसर के खतरे को कैसे प्रभावित करते हैं।

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